लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप, मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय
लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार समेत अन्य आरोपियों पर राउस एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय किए.

Published : January 9, 2026 at 11:08 AM IST
|Updated : January 9, 2026 at 12:16 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बहु चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है. अदालत ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, साथ ही आईपीसी के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप है. जबकि उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने यह फैसला सुनाया. इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था.
इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर केस को कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी.इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था.
सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में 103 आरोपी हैं जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है. इससे पहले कोर्ट आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर दो बार फैसला टाल चुका है. 4 दिसंबर और 10 नवंबर 2025 को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी. प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.

क्या है लालू परिवार पर आरोप?
सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई. यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई.

क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?
- आरोप है कि कुछ लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई, लेकिन इसके बदले उन्होंने अपनी जमीन बहुत सस्ते दाम पर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार या सहयोगियों को दे दी.
- ये मामला मुख्य रूप से 2004–2009 के समय का है, जब लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे. इस मामले की जांच सीबीआई और ईडी भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कर रही हैं.
- आरोप है कि कुछ लोगों को केवल तब ही रेलवे में ग्रुप‑डी की नौकरी मिली, जब उन्होंने या उनके परिवार ने जमीन बहुत कम दाम पर या गिफ्ट के तौर पर लालू यादव के परिवार को दी.
- कहा जा रहा है कि ये जमीनें अक्सर मार्केट रेट के 1/4 या 1/5 में ली गईं.
- कुल मिलाकर लगभग 1 लाख स्क्वायर फीट जमीन 26 लाख रुपये में ली गई, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत 4.39 करोड़ रुपये से ज्यादा थी.
- सीबीआई और ईडी के मुताबिक पटना और आसपास की कई जमीनें लालू की पत्नी राबड़ी देवी, उनके बच्चे या बाद में उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गईं.
- एजेंसियों का कहना है कि इन जमीनों को बहुत कम दाम या गिफ्ट दिखाकर लिया गया, और जिन लोगों ने ये जमीन दी उनकी रिश्तेदारों को जल्दी ही रेलवे में नौकरी मिली.
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