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पिता की परेशानी देख आया आइडिया..बेटे ने कबाड़ से बना डाला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, कीमत बाइक से भी कम

रोहतास के सनीश ने कबाड़ से मिनी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बनाया, जिसकी लागत एक बाइक से भी कम है. रोहतास से रवि कुमार की रिपोर्ट..

mini electric tractor
सनीश का देसी जुगाड़ (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 8, 2026 at 7:00 AM IST

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रोहतास: बिहार के युवा सनीश कुमार जब सड़क पर अपनी बनायी हुई ट्रैक्टर लेकर निकलते हैं तो लोग हैरान हो जाते हैं. रोहतास जिले के पतपुरा गांव के रहने वाले सनीश कोई बड़े आईआईटी कॉलेज नहीं बल्कि एक साधार कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहे हैं. पढ़ाई के दौरान ही इन्होंने ऐसा अविष्कार किया कि इनकी पहचान पूरे बिहार में होने लगी है.

कबाड़ से बनाया ट्रैक्टर: किसान परिवार से आने वाले सनीश कुमार ने सीमित साधनों में एक मिनी ट्रैक्टर बनाया है. यह गांव में उपलब्ध कबाड़ और जुगाड़ के सामानों से बैटरी चालित मिनी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर है. इसकी कीमत एक बाइक से भी कम है. जबकि वही अगर आप कंपनी की मिनी ट्रैक्टर खरीदते हैं तो इसकी लागत लाखों में होती है.

mini electric tractor
ट्रैक्टर चलाता सनीश (ETV Bharat)

ढाई महीने की कड़ी मेहनत: ईटीवी भारत से बातचीत में अनीश ने बताया कि इस अनोखे ट्रैक्टर को बनाने के लिए किसी आधुनिक लैब या बड़ी कंपनी की मदद नहीं ली गई. सनीश ने अपने घर और आसपास से बेकार पड़े लोहे के टुकड़े, पुराने पार्ट्स, मोटर और पहिए इकट्ठा किए. महज दो से ढाई महीने की कड़ी मेहनत और सूझबूझ से शानदार मिनी ट्रैक्टर को पूरी तरह तैयार कर दिया.

खुद बनाई पावरफुल लिथियम बैटरी: इस आविष्कार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ट्रैक्टर की बैटरी भी सनीश ने खुद तैयार की है. यह मिनी ट्रैक्टर सिंगल चार्ज में एक बाइक के बराबर दूरी तय करती है. अपनी बेहतरीन बनावट के कारण यह ट्रैक्टर गांव की संकरी गलियों और खेतों की संकरी पगडंडियों पर भी बहुत आसानी से दौड़ता है.

सनीश का देसी जुगाड़ (ETV Bharat)

"इसे कबाड़ से बनाया गया है. इसे चलाने के लिए बैटरी लगायी गयी है, जो सिंगल चार्ज होने पर 50 किमी की दूरी तय करती है. इसके साथ ही अगर इसमें ट्रॉली फिट कर दिया जाए तो यह एक टन तक का वजन आसानी से खींच सकता है." -सनीश कुमार, इंजीनियरिंग का छात्र

आधुनिक फीचर्स से है पूरी तरह लैस: सनीश बताते हैं कि उन्होंने गांव के हाईस्कूल भेड़िया से पढ़ाई की है. वर्तमान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक कर रहे हैं. बचपन से ही मशीनों से खेलने के शौकीन सनीश ने इस ट्रैक्टर में आधुनिक वाहनों की तरह सेल्फ स्टार्ट सिस्टम, एक्सीलरेटर, ब्रेक और हॉर्न जैसे जरूरी कंट्रोल दिए हैं. इसकी कार्यक्षमता देखकर ग्रामीण दंग हैं.

किसानों के लिए बेहद किफायती विकल्प: बाजार में मिनी ट्रैक्टर की कीमत कम से कम 2.50 से 3 लाख रुपये तक होती है. मगर सनीश ने इसे बहुत कम खर्च में तैयार किया है. बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच यह किसानों के लिए काफी मददगार और किफायती साबित हो रहा है.

mini electric tractor
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

सड़कों पर उमड़ती है लोगों की भीड़: जब भी सनीश अपने इस मिनी ट्रैक्टर को लेकर गांव की सड़कों पर निकलते हैं, तो लोग उन्हें देखने के लिए रुक जाते हैं. बच्चे, बूढ़े और जवान सभी इस मशीन को कौतूहल से देखते हैं. लोग इसकी तस्वीरें और वीडियो भी बनाते हैं. इतनी कम उम्र में ऐसा प्रयोग वाकई प्रेरणादायक है.

बाइक और थार भी कर चुके हैं तैयार: सनीश की नई तकनीकों में गहरी रुचि है और यह उनका पहला आविष्कार नहीं है. इससे पहले भी वह इलेक्ट्रिक बाइक और मिनी थार का मॉडल सफलतापूर्वक तैयार कर चुके हैं. वह लगातार ऐसे मॉडल्स पर काम करना चाहते हैं जो बहुत कम लागत में आम लोगों को बेहतर सुविधाएं दे सकें. सनीश चाहते हैं कि सरकार उन्हें मदद करे.

"इन आविष्कारों को बड़े पैमाने पर विकसित किया जाए ताकि ग्रामीणों को सस्ती और पर्यावरण अनुकूल तकनीक मिले. इसके लिए किसी सरकारी संस्था या निजी कंपनी से स्पॉन्सरशिप, तकनीकी सहयोग और सही मार्गदर्शन की जरूरत है." -सनीश कुमार, इंजीनियरिंग का छात्र

mini electric tractor
बेल्डिंग करता सनीश (ETV Bharat)

पिता की समस्या ने दिया आइडिया: सनीश के पिता सुनील कुमार सिंह एक किसान हैं. खेती के दौरान उन्हें छोटे सामान खेतों तक ले जाने में काफी दिक्कत होती थी. पिता की इसी परेशानी को देखकर सनीश को यह आइडिया आया. यह ट्रैक्टर खेतों से फसल लाने, खाद और बीज पहुंचाने जैसे कार्यों में बहुत उपयोगी है. आज पिता काफी खुश हैं.

"खुशी हो रही है कि मेरे बेटे ने एक समस्या का समाधान निकाला. बचपन से ही टेकनिकल कामों से लगाव रहा है. इससे पहले भी कई वाहन बनाए हैं. मैं एक किसान हूं. मेरे से जितना मदद होगा करेंगे." -सुनील सिंह, सनीश के पिता

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सनीश की इलेक्ट्रिक बाइक (ETV Bharat)

शिक्षक को गर्व महसूस: सनीश की इस बेहतरीन उपलब्धि से उनके शिक्षक भी खुश हैं. उनका कहना है कि बचपन से ही नई चीजें बनाने में दिलचस्पी दिखाई है और आज उसकी मेहनत रंग लाई है. स्कूल के शिक्षक हरेंद्र सिंह सनीश की इस अनोखी प्रतिभा और रचनात्मक सोच की खुलकर सराहना करते हैं.

युवाओं के लिए बने एक रोल मॉडल: आज जब अधिकांश युवा अपना समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं, सनीश की कहानी एक बड़ा संदेश देती है. मजबूत इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों में भी कबाड़ को काम की मशीन बनाया जा सकता है. पूरे रोहतास जिले को आज अपने इस होनहार बेटे पर गर्व है.

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