NDA की प्रचंड जीत के बाद भी आरजेडी की वोटों में बादशाहत, हार के बाद भी अव्वल
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडी को प्रचंड जीत मिली है. लेकिन इसके बाद भी एक मामले में आरजेडी आज भी सभी पार्टियों से आगे है.

Published : November 16, 2025 at 4:25 PM IST
पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणामों ने राजनीतिक समीकरणों को एक नया रंग दे दिया है. एनडीए ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सीटों में बुरी तरह हारने के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) वोट शेयर और कुल मतों दोनों में राज्य की नंबर-1 पार्टी बनकर उभरी है.
एनडीए का दबदबा, 202 सीटों पर कब्जा: चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक एनडीए ने 202 सीटें जीतीं. गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी बनी, जिसने 89 सीटों पर जीत दर्ज की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19, जीतन राम मांझी की हम ने 5 और आरएलएम ने 4 सीटें हासिल कीं.

महागठबंधन का करारी हार: महागठबंधन को महज 35 सीटें मिलीं. इसमें आरजेडी 25, कांग्रेस 6, भाकपा-माले 2, माकपा और आईपीआई को एक-एक सीट मिली. भाकपा और वीआईपी अपना खाता भी नहीं खोल सकीं. असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने 2020 की तरह फिर 5 सीटें जीतीं. प्रशांत किशोर की बहुप्रचारित जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी.
वोट शेयर में आरजेडी अव्वल: सीटों के इस भारी अंतर के बावजूद वोटों की बाजी आरजेडी ने मारी. पार्टी को पूरे राज्य में 23% वोट शेयर मिला, जो किसी भी दल से सबसे ज्यादा है. बीजेपी को 20.08% और जेडीयू को 19.25% वोट मिले. कांग्रेस महज 8.71% वोट ही हासिल कर सकी.

कुल वोटों में भी आरजेडी सबसे आगे: कुल मतों के मामले में भी लालटेन सबसे अधिक चमकी. आरजेडी को 1 करोड़ 15 लाख 46 हजार 55 वोट मिले, जो राज्य के किसी भी दल को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं. बीजेपी को आरजेडी से करीब 15 लाख वोट कम यानी 1 करोड़ 81 हजार 143 वोट मिले. जेडीयू को 96.67 लाख और कांग्रेस को 43.74 लाख वोट ही नसीब हुए.
हार के बावजूद आरजेडी क्यों बनी सबसे बड़ी पार्टी?: राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आरजेडी का वोट बैंक अभी भी सबसे व्यापक है, लेकिन यह कई क्षेत्रों में बिखरा हुआ है. कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबले की वजह से आरजेडी के वोट बंट गए, जबकि एनडीए के वोटों का ध्रुवीकरण बेहतर हुआ. नतीजा यह रहा कि ज्यादा वोट होने के बावजूद सीटें कम आईं.

पांच साल में लगभग बराबर रहा वोट शेयर: पार्टी स्तर पर वोट शेयर में मामूली उछाल-गिरावट के बावजूद गठबंधन के स्तर पर इस बार बिहार में साफ ध्रुवीकरण दिखा. पांच साल पहले 2020 के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के वोट प्रतिशत लगभग बराबर थे, एनडीए को 37.26% और महागठबंधन को 37.23% वोट मिले थे, यानी महज 0.03 फीसदी का फर्क. सीटों में भी कांटे की टक्कर थी, एनडीए को सिर्फ तीन सीटें ज्यादा मिली थी और उन्होंने 125 सीट हासिल कर सरकार बनाई ती.
लेकिन 2025 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. एनडीए ने अपना वोट शेयर बढ़ाकर 46.6 प्रतिशत तक पहुंचा दिया, जबकि महागठबंधन 37.9 प्रतिशत के आसपास ही ठहर गया. दोनों गठबंधनों के बीच करीब 8.7 प्रतिशत अंकों का बड़ा अंतर बन गया, जो सीटों की खाई (202 बनाम 35) का भी आधार बना.

क्यों जीता एनडीए: एनडीए की जीत की एक बड़ी वजह उसके घटक दलों का आपसी वोट ट्रांसफर रहा. भाजपा के साथ-साथ जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), हम और आरएलएम अपने-अपने कोर वोटरों को एक-दूसरे के पक्ष में सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर सके. इसके उलट राजद अपने सहयोगियों, कांग्रेस, वामदल और वीआईपी को उतना ही वोट ट्रांसफर नहीं करा पाई. नतीजा यह हुआ कि आरजेडी भले ही सबसे ज्यादा वोट और वोट शेयर वाली अकेली पार्टी बनी रहे, लेकिन उसके गठबंधन का कुल वोट शेयर और सीटें दोनों ही बहुत पीछे रह गए.
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