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हाथियों की मौत के मामलों में उछाल, 25 सालों में 540 गजराजों ने गंवाई जान, करंट लगने से बढ़ा आंकड़ा

उत्तराखंड में हाथियों की मौत का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. वहीं हाथियों के हमले में इंसानों की जान भी जा रही है.

Elephant deaths in Uttarakhand
बढ़ता हाथियों की मौत का आंकड़ा (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 9, 2026 at 4:15 PM IST

6 Min Read
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नवीन उनियाल

देहरादून: उत्तराखंड में हाथियों की मौत के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. साल 2025 में भी दो दर्जन से ज्यादा हाथियों ने अपनी जान गंवाई. खास बात यह है कि इसमें रेलवे ट्रैक पर आने से हुई मौतों के अलावा करंट लगने से भी कई हाथियों की मौत हुई है. उधर हाथियों के लगातार शहरी क्षेत्र में जाने से खुद वन विभाग भी हैरान है और इसपर भी अध्ययन करने के भी प्रयास हो रहे हैं.

शहरी इलाकों में हाथियों का रुख: उत्तराखंड में हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियां और उनकी मौत के मामले वन विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों में हाथियों का रुख तेजी से शहरी इलाकों की ओर बढ़ा है, जिससे न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि हाथियों की जान पर भी खतरा गहरा गया है. साल 2025 में भी हाथियों के बदले व्यवहार का असर साफ तौर पर देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में हाथियों की मौत रिकॉर्ड की गई.

हाथियों की मौत के मामलों में उछाल. (ETV Bharat)

इस साल इतने हाथियों की हुई मौत: यदि बीते तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता और साफ हो जाती है. साल 2023 में राज्य में कुल 34 हाथियों की मौत दर्ज की गई थी. साल 2024 में यह आंकड़ा कुछ हद तक घटकर 18 पर आ गया, जिससे उम्मीद जगी थी कि हालात सुधर रहे हैं. लेकिन साल 2025 में एक बार फिर हाथियों की मौत के मामलों में उछाल देखने को मिला और इस साल कुल 30 हाथियों की मौत दर्ज की गई. यह आंकड़े साफ तौर पर संकेत देते हैं कि समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है.

Elephant deaths in Uttarakhand
हाथियों की मौत बनी चिंताजनक (ETV Bharat Graphics)

हाथियों की करंट लगने से मौत: हाथियों की मौत के मामलों में प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह के कारण शामिल हैं. प्राकृतिक मौतों में वो हाथी शामिल हैं, जिनकी मौत उम्र पूरी होने या बीमारी के चलते होती है. लेकिन असली चिंता का विषय अप्राकृतिक मौतें हैं, जिनमें दुर्घटनाओं के कारण हाथियों को जान गंवानी पड़ रही है.

इनमें सबसे बड़ा खतरा रेलवे ट्रैक पर हाथियों के दुर्घटनाग्रस्त होने का है. इसके अलावा करंट लगने से होने वाली मौतें भी लगातार सामने आ रही हैं. वहीं आपसी संघर्ष में भी कई हाथी मारे जाते हैं.

Elephant deaths in Uttarakhand
फाइल फोटो (Photo-ETV Bharat)

हाथियों की मौत के चौंकाने वाले आंकड़े: यदि लंबे समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है. पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड में करीब 540 हाथियों की मौत हो चुकी है. इनमें से 169 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 54 हाथियों की मौत सिर्फ करंट लगने से हुई, जबकि 32 हाथी ट्रेन की चपेट में आकर मारे गए. ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि विकास और बुनियादी ढांचे का विस्तार वन्यजीवों के लिए किस तरह खतरा बनता जा रहा है.

Elephant deaths in Uttarakhand
कोटद्वार लैंसडाउन वन क्षेत्र में करंट लगने से हुई थी हाथी की मौत (Photo-ETV Bharat)

रिहायशी इलाकों तक पहुंचते हाथी: वन विभाग का मानना है कि हाथियों के शहरों की ओर बढ़ते रुझान की एक बड़ी वजह उनकी तेज सूंघने की शक्ति है. हाथी इंसानी बस्तियों में मौजूद खाने-पीने की सामग्री की ओर आकर्षित होकर शहरी इलाकों तक पहुंच रहे हैं.

हरिद्वार जिला इसका बड़ा उदाहरण है, जहां आए दिन हाथियों के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों में पहुंचने की खबरें सामने आती रहती हैं. इससे आम लोगों में दहशत का माहौल बन रहा है और संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं.

Elephant deaths in Uttarakhand
रामनगर में टस्कर हाथी की हुई थी मौत (Photo-ETV Bharat)

जानिए क्या कह रहे वन विभाग के अधिकारी: राजाजी टाइगर रिजर्व के ऑनरेरी वार्डन राजीव तलवार का कहना है कि हाथी पहले भी शहरी क्षेत्रों की ओर आते रहे हैं, लेकिन अब समस्या कहीं ज्यादा बढ़ गई है.

करंट लगने से हाथियों की मौत के मामले भी सामने आए हैं, जिनकी वन विभाग अलग-अलग स्तर पर जांच करता है. बढ़ती घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अब इस समस्या पर गंभीरता से अध्ययन और ठोस समाधान की जरूरत है.
- राजीव तलवार, ऑनरेरी वार्डन, राजाजी टाइगर रिजर्व -

Elephant deaths in Uttarakhand
हाथियों की बढ़ती मौत के आंकड़े चिंताजनक (ETV Bharat Graphics)

बदलते व्यवहार पर होगा अध्ययन: इसी को देखते हुए उत्तराखंड वन विभाग ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से हाथियों के बदलते व्यवहार पर अध्ययन कराने का फैसला लिया है. इसके तहत विशेषज्ञ जल्द ही मैदान में उतरकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर हाथियों का रुझान शहरी इलाकों की ओर क्यों बढ़ रहा है और इसे कैसे रोका जा सकता है. वन विभाग को उम्मीद है कि इस अध्ययन से भविष्य की रणनीति तय करने में मदद मिलेगी.

Elephant deaths in Uttarakhand
हाथियों पर मंडराता संकट (Photo-ETV Bharat)

हाथियों के हमले में इंसानी मौत: इस बीच हाथियों के शहरी क्षेत्रों में बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़े भी डराने वाले हैं. साल 2025 में ही हाथियों के हमलों में नौ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं.

Elephant attacks
हाथियों के हमले में कई लोगों की गई जान (ETV Bharat Graphics)

हाथियों की मौत रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रयास: उत्तराखंड वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक हॉफ आरके मिश्रा का कहना है कि हाथियों की मौत के हर मामले की जांच की जाती है और कारणों का पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं.

ट्रेन से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे विभाग के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है और कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, करंट से होने वाली मौतों के मामलों में भी सख्त कार्रवाई की जाती है और उनके समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है.
- आरके मिश्रा, प्रमुख वन संरक्षक -

Elephant deaths in Uttarakhand
मामले में वन अधिकारियों की प्रतिक्रिया (ETV Bharat Graphics)

मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की कवायद: उत्तराखंड में हाथियों की बढ़ती मौतें और शहरी इलाकों में उनकी बढ़ती मौजूदगी वन विभाग और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. आने वाले समय में अध्ययन और ठोस नीतियों के जरिए ही इस मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है.

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