RG Kar Case: NHRC ने मांगी रिपोर्ट, UDF की प्रधानमंत्री से अपील- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें
NHRC ने केंद्र से आरजी कार मेडिकल कॉलेज में नियमों के उल्लंघन और संबंधित अधिकारियों पर की गई कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट मांगी है.

Published : May 6, 2026 at 7:07 PM IST
गौतम देबरॉय
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के कुछ दिनों बाद, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना फिर से चर्चा में है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से कहा है कि वे तय नियमों के कथित उल्लंघन और आरजी कार मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में चार हफ्ते के अंदर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जमा करें.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुनिया सलिला श्रीवास्तव को जारी एक पत्र में एनएचआरसी ने कहा, "भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को फिर से निर्देश दिया जाता है कि वे आयोग के दिनांक 11 जून 2025 के निर्देश के अनुसार, चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट/अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ऐसा न करने पर आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए बाध्य होगा, जिसके तहत संबंधित अधिकारी को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा.
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल की शिकायत का जिक्र करते हुए, NHRC ने कहा कि शिकायत करने वाले ने भारत में मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों के काम करने के बहुत ज्यादा और अमानवीय घंटों की ओर आयोग का ध्यान दिलाया है.
NHRC ने मित्तल की 17 मार्च, 2025 को फाइल की गई शिकायत का हवाला देते हुए कहा, "स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के एक निर्देश के बावजूद, जिसमें ड्यूटी के घंटे हर हफ्ते 48 घंटे या हर शिफ्ट में 12 घंटे तक सीमित करने की बात कही गई है, इन नियमों को बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया जाता है, जिससे गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, मरीजों की देखभाल में कमी और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसे दुखद मामले होते हैं. शिकायत में निर्देशों को सख्ती से लागू करने, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, ड्यूटी के घंटों के नियमों में सार्वजनिक पारदर्शिता और पालन सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी तंत्र की मांग की गई है."
इससे पहले, NHRC ने 11 जून 2025 की कार्यवाही के जरिये केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से PGMER 2023 के ऊपर बताए गए नियमों के तहत आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन और की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट और अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी.
एनएचआरसी ने मंगलवार को स्वास्थ्य सचिव को जारी अपने पत्र में कहा, "आयोग को 27 अक्टूबर 2025 के रिमांइडर के बावजूद अभी तक संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है."
ईटीवी भारत से बात करते हुए डॉ. मित्तल ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का नतीजा आरजी कार मामले में एक अहम मोड़ है. उन्होंने कहा, "केंद्र और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तालमेल के साथ – जिसे अक्सर डबल-इंजन सरकार कहा जाता है – अब कोई बहाना नहीं बचा है. हम प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से आग्रह करते हैं कि वे संस्था और दोषियों, दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. साथ ही सभी संस्थाओं में साफ जवाबदेही के सिस्टम के साथ यूनिफॉर्म रेजीडेंसी स्कीम, 1992 को लागू करें."
उन्होंने कहा कि एनएचआरसी का यह सख्त निर्देश पहले के आदेशों के बावजूद बार-बार पालन न करने के बाद आया है, जो आरजी कर मामले में लगातार कार्रवाई न करने पर आयोग की गंभीर चिंता को साफ तौर पर दर्शाता है. डॉ. मित्तल ने कहा, "UDF ने इस बात पर जोर दिया कि यह अहम कदम पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद उठाया गया है, जो जवाबदेही में एक अहम मोड़ है. पहली बार, केंद्र और अब पश्चिम बंगाल में एक ही राजनीतिक नेतृत्व के साथ, बिना किसी प्रशासनिक या राजनीतिक बाधा के लंबे समय से रुके हुए स्वास्थ्य सेवा सुधारों को लागू करने का अच्छा मौका है. अब कोई बहाना नहीं बचा है. सिस्टम को काम करना होगा."
अगस्त 2024 की दुखद घटना को याद करते हुए, जिसमें एक युवा पीजी डॉक्टर को बहुत खराब काम करने के हालात और बेरहमी से टॉर्चर झेलने के बाद अपनी जान गंवानी पड़ी थी, UDF ने दोहराया कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है - बल्कि सिस्टम की नाकामी का प्रतीक है.
यह भी पढ़ें- बंगाल में अगले 100 साल तक सत्ता में रहेगी बीजेपी, नंदीग्राम में बोले शुभेंदु अधिकारी

