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उत्तराखंड के जंगल में मिली Happy Face Spider, आकर्षित कर रही पीठ पर बनी मुस्कान, देखें तस्वीरें

रिसर्चर्स को उत्तराखंड के चमोली में हैप्पी फेस स्पाइडर जैसी दिखने वाली मकड़ी मिली है. डीएनए विश्लेषण में इनके बीच आनुवंशिक अंतर मिला.

Himalayan Happy Face Spider
उत्तराखंड के जंगल में मिली Happy Face Spider (PHOTO- Evolutionary Systematics)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 23, 2026 at 2:50 PM IST

5 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड के पश्चिमी हिमालयी जंगलों में वैज्ञानिकों को एक ऐसी नई मकड़ी मिली है, जिसके शरीर पर बने रंग-बिरंगे निशान और मुस्कुराते चेहरे जैसे नजर आते हैं. थेरिडियन हिमालयन (Theridion Himalayana) नाम की इस मकड़ी के 32 अलग-अलग रंग और पैटर्न दर्ज किए गए हैं. शोध रिपोर्ट के मुताबिक, यह मशहूर Happy Face Spider (हैप्पी फेस स्पाइडर) जैसी दिखती जरूर है, लेकिन आनुवंशिक रूप से अलग प्रजाति है.

उत्तराखंड के जंगलों में प्रकृति का एक ऐसा रंगीन चेहरा सामने आया है, जिसे देखकर पहली नजर में किसी मकड़ी के बजाय मुस्कुराता हुआ चेहरा नजर आता है. पश्चिमी हिमालय में वैज्ञानिकों ने एक नई मकड़ी की प्रजाति की पहचान की है, जिसे Himalayan Happy Face Spider (हिमालयन हैप्पी फेस स्पाइडर) नाम दिया गया है. इसका वैज्ञानिक नाम Theridion himalayana (थेरिडियन हिमालयन) है. खास बात यह है कि इसके पेट पर लाल, काले और सफेद रंगों के ऐसे निशान पाए जाते हैं, जो कई बार बिल्कुल मुस्कुराते हुए चेहरे जैसे दिखाई देते हैं.

यह खोज उत्तराखंड के चमोली जिले के हिमालयी जंगलों में किए गए सर्वे के दौरान हुई. शोधकर्ताओं ने कुल 61 नमूनों का अध्ययन किया. इनमें नर और मादा दोनों शामिल थे. मकड़ी करीब 2000 से 2200 मीटर की ऊंचाई पर जंगल में पाई गई. शोध में इसका टाइप स्पेसिमेन 2207 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर दर्ज किया गया है.

Himalayan Happy Face Spider
पश्चिमी हिमालय में वैज्ञानिकों ने इस नई मकड़ी की प्रजाति को Himalayan Happy Face Spider नाम दिया. (PHOTO- Evolutionary Systematics)

कलर मॉर्फ्स सबसे खास: इस मकड़ी की सबसे दिलचस्प बात इसका रंग और पैटर्न है. वैज्ञानिकों ने इसके 32 अलग-अलग कलर मॉर्फ्स यानी रंग और निशानों के अलग-अलग रूप दर्ज किए हैं. कुछ में लाल रंग के बीच सफेद घेरा दिखाई देता है, तो कुछ में काले और लाल निशानों का संयोजन है. यही पैटर्न मकड़ी के पीठ को ऐसा रूप देता है, मानो वह मुस्कुरा रही हो. खास बात यह भी है कि यह विविधता केवल मादा मकड़ियों में ही नहीं, बल्कि नर में भी देखी गई है.

पत्तियों पर उलटी लटकी रहती है ये मकड़ी: शोधकर्ताओं ने पाया कि, इस मकड़ी का व्यवहार भी कुछ हद तक खास है. यह पत्तियों की निचली सतह पर अपना जाला बनाती है और उसमें उल्टी लटककर रहती है. यानी जंगल में पेड़ों और पौधों की पत्तियों के नीचे नजर डालने पर यह छोटी सी मकड़ी छिपी मिल सकती है.

Himalayan Happy Face Spider
मकड़ी के शरीर पर रंग-बिरंगे निशान और मुस्कुराते चेहरे. (PHOTO- Evolutionary Systematics)

शोध में दोनों अलग-अलग प्रजाति पाई गई: अब सबसे रोचक सवाल यह कि क्या यह वही हैप्पी फेस स्पाइडर है, जिसके बारे में दुनिया पहले से जानती है? इसका जवाब है-नहीं. शोध पत्र में बताया गया है कि, हवाई द्वीपों में पाई जाने वाली मशहूर हैप्पी फेस स्पाइडर का वैज्ञानिक नाम थेरिडियन ग्रैलेटर (Theridion grallator) है. उत्तराखंड में मिली मकड़ी देखने में उससे काफी मिलती-जुलती है, लेकिन वैज्ञानिक जांच में दोनों अलग प्रजातियां पाई गईं. डीएनए विश्लेषण में इनके बीच करीब 8.5 प्रतिशत आनुवंशिक अंतर मिला. शोधकर्ताओं का मानना है कि, दोनों में मुस्कुराते चेहरे जैसा पैटर्न अलग-अलग स्थानों पर स्वतंत्र रूप से विकसित हुआ होगा.

यही बात इस खोज को और महत्वपूर्ण बनाती है. वैज्ञानिकों के लिए यह समानांतर (Parallel) या अभिसारी विकास (Convergent Evolution) को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण है. यानी अलग-अलग जगह रहने वाली प्रजातियां, एक-दूसरे से सीधे संबंधित न होने के बावजूद, पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण मिलते-जुलते गुण विकसित कर सकती है.

शोध पत्र के मुताबिक, यह भी सामने आया कि यह मकड़ी जंगल के भीतर पत्तियों की सतह से जुड़ी एक बेहद छोटी दुनिया का हिस्सा है. इसके जैसे जीव छोटे कीटों और दूसरे सूक्ष्म जीवों का शिकार करते हैं और इस तरह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका निभाते हैं.

Himalayan Happy Face Spider
मकड़ी के 32 अलग-अलग रंग और पैटर्न दर्ज किए गए (PHOTO- Evolutionary Systematics)

शोध पत्र के लिए क्लिक करें

वैज्ञानिकों ने यह खोज फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून (Forest Research Institute Dehradun) और रीजनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री (Regional Museum of Natural History) से जुड़े शोधकर्ताओं के फील्ड सर्वे के दौरान की. शोध पत्र Evolutionary Systematics (इवोल्यूशनरी सिस्टेमैटिक्स ) में प्रकाशित हुआ है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय के दूरस्थ और कम खोजे गए जंगलों में ऐसी कई और प्रजातियां सामने आ सकती हैं.

यानी उत्तराखंड के जंगलों ने एक बार फिर साबित किया है कि यहां जैव विविधता की दुनिया अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है. हजारों मीटर की ऊंचाई पर पत्तियों के नीचे छिपी यह छोटी सी मुस्कुराती मकड़ी सिर्फ देखने में आकर्षक नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए हिमालय में प्रजातियों के विकास की कहानी समझने का एक नया सुराग भी बन गई है.

यह शोध एफआरआई के शोधार्थी आशीर्वाद त्रिपाठी और बायोलॉजिस्ट देवी प्रियदर्शिनी से संयुक्त रूप से किया है. आशीर्वाद त्रिपाठी ने बताया कि इस शोध का फील्ड वर्क 2023 से 2025 तक चला. इसके बाद इसके डॉक्यूमेंटेशन का काम किया गया. उन्होंने बताया कि, इस मकड़ी की खासियत इस पर मौजूद स्माइली फेस है. इसके अलावा, एक ही तरह की प्रजाति में कई तरह के रंगों का होना भी इसे खास बनाता है. अभी ये मकड़ी चमोली और रुद्रप्रयाग जिले क्षेत्र में मिली है. जबकि कुमाऊं क्षेत्र में भी इसके होने की जानकारी है. अब उत्तराखंड और हिमाचल में भी इसको लेकर शोध का काम किया जाएगा.

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