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पूरे भारत में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल की कमी, संसदीय समिति ने सरकार को दिया यह सुझाव

एक संसदीय समिति ने सरकार को देश के पिछड़े इलाकों, कम मानव विकास सूचकांक वाले जिलों में आयुष हॉस्पिटल बनाने का सुझाव दिया है.

regions across India lacks integrated Ayush Hospitals Inspite of Ayush mission of Centre
पूरे भारत में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल की कमी, संसदीय समिति ने सरकार को दिया यह सुझाव (File Photo)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : December 13, 2025 at 8:56 PM IST

5 Min Read
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गौतम देबरॉय

नई दिल्ली: केंद्र सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने पर ज्यादा ध्यान दे रही है. हालांकि, एक संसदीय समिति ने पाया है कि देश के कई पिछड़े इलाकों, जिनका मानव विकास सूचकांक कम है, जैसे ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल नहीं हैं. इस मुद्दे पर आयुष मंत्रालय के जवाब का जिक्र करते हुए, समिति को यह भी लगता है कि मंत्रालय का जवाब टालमटोल वाला है और मंत्रालय अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है.

आयुष मंत्रालय के विशेष रूप से पिछड़े और दूर-दराज के इलाकों में आयुष सेवाओं को बढ़ाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए, संसदीय समिति ने आगे कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास ऐसा करने के लिए जरूरी संसाधनों की कमी है.

समिति ने हाल ही में राज्यसभा में पेश की गई स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की अपनी 168वीं रिपोर्ट में कहा, "समिति ने सिफारिश की है कि मंत्रालय को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य वार्षिक एक्शन प्लान (SAAP) के तहत देश के पिछड़े इलाकों, खासकर ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कम मानव विकास सूचकांक वाले जिलों (मुख्य रूप से कोशी/सिमांचल क्षेत्र में पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, फारबिसगंज, अररिया, किशनगंज) में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल बनाने का प्रस्ताव देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने चाहिए."

राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि मंत्रालय आयुष मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बनाने के लिए कम सुविधा वाले जिलों में मानदण्डों का आकलन करने और जगहों की पहचान करने में एक सुव्यवस्थित, विश्लेषणात्मक तरीका अपना सकता है. इससे समय पर आयुष मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बनाने का उसका लक्ष्य प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा. इससे देश के सबसे दूर-दराज के इलाकों में आयुष चिकित्सा पद्धति लाने का लक्ष्य भी प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा, भले ही इसके लिए राज्यों को आयुष के संबंध में राज्य वार्षिक एक्शन प्लान बनाने में मदद की जरूरत पड़े.

मंत्रालय ने समिति को बताया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए देश में आयुष सिस्टम के संबंध में बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करने की मुख्य जिम्मेदारी ग्रामीण और पिछड़े इलाकों सहित संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों की है.

मंत्रालय ने कहा, "हालांकि, नेशनल आयुष मिशन (NAM) के तहत इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल बनाने का प्रस्ताव है और राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें देश के ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों को कवर करने के लिए राज्य वार्षिक एक्शन प्लान (SAAPs) के जरिये जरूरत के हिसाब से अपनी डिमांड बता सकती हैं. इसके अलावा, NAM की अलग-अलग मंजूर गतिविधियों की फिजिकल और वित्तीय प्रगति जानने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अलग-अलग पैरामीटर पर मासिक और तिमाही रिपोर्ट भी ली जा रही हैं."

  • 2014-15 से राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना लागू
  • इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 416 आयुष अस्पतालों और 5036 आयुष डिस्पेंसरियों को समर्थन दिया गया
  • आयुष दवाइयों की सप्लाई के लिए हर साल औसतन 996 आयुष अस्पतालों और 12405 आयुष डिस्पेंसरीज को समर्थन दिया गया
  • इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 76 यूजी और 36 पीजी आयुष शैक्षणिक संस्थानों को सपोर्ट दिया गया

नेशनल आयुष मिशन एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्यों का योगदान अनुपात 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत है. संसदीय समिति को बताया गया कि कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपना हिस्सा देने में असमर्थता जता रहे हैं, जिसके कारण स्कीम का 100 प्रतिशत कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है. इसलिए, समिति आयुष मंत्रालय को NAM पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करने के लिए वित्तीय मदद स्कीम देने की सलाह देती है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "मंत्रालय राज्यों को NAM में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र और राज्य के योगदान अनुपात को 70:30 में बदलने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ संभावना भी तलाश सकता है."

नेशनल आयुष मिशन स्कीम 2014-15 से पूरे देश में लागू है.इसका मकसद आयुष सेवाओं, आयुष अस्पतालों और डिस्पेंसरियों तक बेहतर पहुंच, मौजूदा आयुष डिस्पेंसरियों और स्वास्थ्य उप-केंद्रों को अपग्रेड करके आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को चालू करना है ताकि आम लोगों को जमीनी स्तर पर पूरी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल मिल सके.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 416 आयुष अस्पतालों और 5036 आयुष डिस्पेंसरी को इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं के अपग्रेडेशन के लिए मदद दी गई है. हर साल औसतन 996 आयुष अस्पतालों और 12405 आयुष डिस्पेंसरी को जरूरी आयुष दवाओं की सप्लाई के लिए मदद दी गई है. आंकड़ों के अनुसार, 76 अंडर-ग्रेजुएट और 36 पोस्टग्रेजुएट आयुष शैक्षणिक संस्थानों को इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइब्रेरी और अन्य चीजों के अपग्रेडेशन के लिए समर्थन दिया गया है.

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