दिल्ली शराब घोटाला : आरोपियों के बरी होने पर किसने क्या कहा, एक नजर
मामले में कुल 23 आरोपी थे. आरोपियों ने कहा, यह एक राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था.

Published : February 27, 2026 at 1:46 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 2:43 PM IST
नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने कथित शराब नीति घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कुल 23 आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. इस मामले पर किसने क्या कहा, आइए जानते हैं.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फैसले का स्वागत किया. मान ने कहा, "सत्य की हमेशा जीत होती है. न्याय में देरी हो सकती है लेकिन न्याय से इनकार नहीं किया जा सकता. अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य सभी को दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाला मामले में माननीय न्यायालय द्वारा झूठे, मनगढ़ंत और झूठ के पुलिंदे से बरी कर दिया गया है, जिससे एक बार फिर साबित हो गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की एजेंसियों ने आम आदमी पार्टी की ईमानदारी की राजनीति को बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने के लिए यह सब किया था."
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, "केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को अल्पकालिक राजनीति के लिए जांच एजेंसियों की निष्ठा को गिरवी नहीं रखना चाहिए. थोड़ी शर्म तो दिखाओ. शाबाश, मेरे आदरणीय मित्र थिरु @ArvindKejriwal और थिरु @msisodia इन सब के बावजूद दृढ़ रहने और सच्चाई को खुद बोलने देने के लिए."
समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव ने कहा, "सच्चाई और न्याय मजबूती से केजरीवाल के साथ खड़ा है और कोई भी आरोप सच्चाई पर हावी नहीं हो सकता. आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के साथ सत्य एवं न्याय दोनों खड़े हैं. आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वह सच को आच्छादित कर ले. आज हर ईमानदार आशा भरी सांस लेगा और भाजपा के समर्थकों को शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी. भाजपा ने दिल्ली के निवासियों के साथ विश्वासघात किया है."
राजद सांसद मनोज झा ने कहा, "इस तरह सारे बदले के केस खत्म होंगे. यह बदले के केस की मेरिट पिटीशन थी. इस तरह से एक पॉलिटिकल लड़ाई लड़ी गई. यह एक शुरुआत है. इन दो लोगों की तरह सभी को राहत मिलेगी."
तेलंगाना जागृति की संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता ने दिल्ली आबकारी नीति "घोटाले" में अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि "सत्य की जीत होती है." उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला उनके खिलाफ "राजनीतिक प्रतिशोध" के तहत "थोपा" गया था.
दिल्ली की एक अदालत के फैसले पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पहली प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "सत्यमेव जयते." बाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "न्यायपालिका ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में झूठ के जाल को ध्वस्त कर दिया."
कविता को इस मामले में मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था और उसी साल 29 अगस्त को दिल्ली की तिहाड़ जेल से वह रिहा हुई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धन शोधन मामले में जमानत दे दी थी.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा को “इच्छाधारी नाग” की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि भाजपा का जुनूनी लक्ष्य कांग्रेस को हराना और “कांग्रेस मुक्त भारत” बनाना है, जिसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है. उन्होंने कहा, "इसमें कोई हैरानी की बात नहीं. यह तो पहले से ही अनुमानित था. भाजपा हर चुनाव से पहले यही करती है. अगर कांग्रेस को कमजोर करना उनके लिए फायदेमंद होता है, तो वे कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वियों को मजबूत करते हैं. अतीत में भी उन्होंने यही किया है. कल उन्होंने पी चिदंबरम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी, ताकि तमिलनाडु में कांग्रेस को कमजोर किया जा सके. कांग्रेस को कमजोर करने के लिए प्रधानमंत्री ने टीएमसी को मंजूरी तक दे दी. जमीनी हकीकत में कुछ नहीं बदलेगा, गुजरात और पंजाब के लोग बदलाव के लिए तैयार हैं और उनकी नजर कांग्रेस पर है."
राज्यसभा सांसद और शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, "झूठ, दुष्प्रचार और जहरीले राजनीतिक एजेंडे के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी और यह सुनिश्चित किया कि सच और न्याय की जीत हो. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को इस दृढ़ता और संघर्ष के लिए बधाई."
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि यह मामला "राजनीति से प्रेरित" था और इसका उद्देश्य विपक्षी नेताओं को "बदनाम" करना था. उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया, "भाजपा ने विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए एक फर्जी मामला दर्ज कराया, जिसके तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनके मनोबल को तोड़ने तथा उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। एक बार फिर सीबीआई और ईडी को अपने राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की भाजपा की बेशर्म चाल बेनकाब हो गई है। मोदी-शाह सरकार इन फर्जी मामलों की तरह जल्द ही ढह जाएगी."
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, "सभी जानते हैं कि ये दोनों (अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया) इस घोटाले के जनक थे. दिल्ली की जनता अच्छे से जानती है कि एक्साइज घोटाले के जनक अरविंद केजरीवाल थे. जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनकी भी गवाही होगी. सभी जानते हैं कि ये लोग इस घोटाले के मास्टर माइंड थे."
मामले में कुल 23 आरोपियों को किया गया बरी. ये हैं उनके नाम.
- अरविंद केजरीवाल (दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री)
- मनीष सिसोदिया (दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री)
- के. कविता (बीआरएस नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी)
- विजय नायर (आप के पूर्व संचार प्रभारी)
- अभिषेक बोइनपल्ली (व्यापारी)
- अरुण रामचंद्र पिल्लई (हैदराबाद के व्यवसायी)
- समीर महेंद्रू (इंडोस्पिरिट के प्रबंध निदेशक)
- अमनदीप सिंह ढल (व्यापारी, ब्रिंडको सेल्स)
- अर्जुन पांडे (विजय नायर के कथित करीबी सहयोगी)
- बुच्चीबाबू गोरंटला (के. कविता के पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट)
- राजेश जोशी (चैरियट प्रोडक्शंस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक)
- दामोदर प्रसाद शर्मा (आबस्ती अधिकारी)
- प्रिंस कुमार (आबस्ती अधिकारी)
- अरविंद कुमार सिंह (इंडिया अहेड न्यूज में प्रोडक्शन कंट्रोलर)
- चानप्रीत सिंह रायत (आप के कथित फंड मैनेजर)
- दुर्गेश पाठक (आप विधायक)
- अमित अरोरा (बडी रिटेल के निदेशक)
- विनोद चौहान (कथित हवाला संचालक)
- आशीष चंद माथुर (व्यापारी)
- सरथ चंद्र रेड्डी (अरबिंदो फार्मा के निदेशक)
- कुलदीप सिंह (पूर्व आबकारी आयुक्त)
- नरेंद्र सिंह (पूर्व उप आबकारी आयुक्त)
- मूथा गौतम (इंडिया अहेड न्यूज के प्रबंध निदेशक)
हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मानना है कि अपील आवश्यक है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को अधीनस्थ अदालत द्वारा या तो "नजरअंदाज किया गया है या उन पर विचार नहीं किया गया है." सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "सीबीआई ने अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में तत्काल अपील करने का फैसला किया है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया है या उन पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया है."
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें उसी वर्ष 13 सितंबर को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गयी थी. वह पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री थे. पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को जमानत पर रिहा होने से पहले लगभग 17 महीने जेल में बिताने पड़े थे.
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