राज्यसभा चुनाव: साकेत गोखले की हो सकती है छुट्टी! पत्रकार तृणमूल टिकट की रेस में
अगर साकेत गोखले को टिकट नहीं मिला तो उनकी छोड़ी गई सीट पर किसी पत्रकार या मीडियाकर्मी के आने की संभावना है.

Published : February 16, 2026 at 5:04 PM IST
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने में अभी कुछ समय बाकी है. 2026 के चुनावी महासंग्राम से पहले राज्य की राजनीति इस समय राज्यसभा चुनाव में व्यस्त है. राज्य के चार राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल अगले मार्च में खत्म हो रहा है. ऐसे में अब सत्तारूढ़ दल के भीतर इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि इन चार सीटों पर तृणमूल कांग्रेस किसे भेजेगी.
पत्रकारों को तृणमूल का टिकट
राजनीतिक हलकों में यह सुनने को मिल रहा है कि इस चुनाव में तृणमूल खेमा बड़ा बदलाव करने जा रहा है. रविवार तक जो समीकरण था वह एक ही रात में बदल रहा है. सबसे बड़े आश्चर्य के तौर पर एक पत्रकार का नाम सामने आ रहा है. तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, निवर्तमान सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता साकेत गोखले को दोबारा टिकट मिलने की संभावना बहुत कम है. इसके बजाय, पार्टी उस सीट के लिए मीडिया से जुड़े किसी परिचित चेहरे को चुन सकती है.
तृणमूल कांग्रेस की राजनीति में पत्रकारों को राज्यसभा भेजने की परंपरा नई नहीं है. अतीत में, ममता बनर्जी की पार्टी ने कुणाल घोष जैसे पत्रकारों को संसद के ऊपरी सदन में भेजा है. हाल के वर्षों में राज्यसभा पहुंचीं तृणमूल नेता सागरिका घोष असल में एक पत्रकार हैं. उसी सिलसिले को जारी रखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी किसी पत्रकार को राज्यसभा में पार्टी का चेहरा चुना जा सकता है. हालांकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी भी इस बारे में चुप्पी साधे हुए है कि वह पत्रकार कौन है, लेकिन अटकलें तेज हैं.
कौन सूची से हो रहा है बाहर
हालांकि साकेत गोखले पिछले कुछ वर्षों में अखिल भारतीय स्तर पर पार्टी के लिए सोशल मीडिया और विभिन्न मुद्दों पर मुखर रहे हैं, लेकिन इस बार वह पार्टी समीकरण में पिछड़ सकते हैं. अगर साकेत गोखले को टिकट नहीं मिला तो उनके द्वारा छोड़ी गई सीट पर किसी पत्रकार या मीडियाकर्मी के आने की संभावना सबसे प्रबल है.
वहीं, एक और निवर्तमान राज्यसभा सांसद रीताब्रत बनर्जी को लेकर नए राजनीतिक समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं. वामपंथी छात्र राजनीति से उभरे और बाद में तृणमूल में शामिल हुए ऋतब्रत को इस बार राज्यसभा नहीं भेजा जा सकता है. तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, पार्टी उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारने की योजना बना रही है.
पार्टी संगठनात्मक कार्यों में उनके अनुभव और वाकपटुता का इस्तेमाल विधानसभा में विपक्षी दलों से मुकाबला करने के लिए करना चाहती है. ऐसे में रीताब्रता द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट पर किसी नए चेहरे के आने की प्रबल संभावना है.
सूची में कौन हैं?
मौसम बेनजीर नूर की सीट में भी बदलाव हो सकता है. कांग्रेस से तृणमूल में शामिल हुईं मौसम नूर पिछली बार राज्यसभा गईं थीं. लेकिन मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में अल्पसंख्यक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसी खबरें हैं कि इस बार उस सीट के लिए एक नई महिला चेहरे, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इस मामले में, लंबे समय से पार्टी के किसी नेता या समाज के किसी प्रमुख चेहरे को चुना जा सकता है.
इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी राज्यसभा जाएंगे या नहीं, इस पर भी धुंध अभी तक साफ नहीं हुई है. यह मामला पूरी तरह से पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और सुब्रत बख्शी के निजी फैसले पर निर्भर है. हालांकि वह अब भी पद छोड़ने पर अड़े हुए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस सीट पर भी बड़ा आश्चर्य इंतजार कर रहा है. समझा जाता है कि उस सीट पर राज्य के किसी टॉप नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है.
क्या कह रहे हैं राजनीतिक विशेषज्ञ
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह राज्यसभा चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल के लिए एक तरह का 'सेमीफाइनल' नहीं है, बल्कि सदन को व्यवस्थित करने का एक बड़ा मौका है. सत्ता पक्ष जहां अपनी-अपनी व्यवस्था में जुटा है, वहीं विपक्षी बीजेपी भी पीछे नहीं है. भले ही बंगाल में लोकसभा चुनावों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, लेकिन भगवा खेमा 2026 के विहंगम दृश्य के साथ पहले से ही सड़कों पर उतर रहा है. उन्होंने चुनाव से पहले राज्य भर में रथ यात्रा की योजना बनाई है.
बीजेपी अपने 'शीतकालीन शीतनिद्रा' के बाद कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए ब्रिगेड में एक बड़ी रैली बुलाने पर भी विचार कर रही है. फरवरी या मार्च तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे पर आने की संभावना है. कुल मिलाकर इस राज्यसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख विपक्षी दलों की तैयारियों से यह कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक गर्मी धीरे-धीरे बढ़ेगी.
हालांकि, आखिर में साकेत गोखले की जगह किस पत्रकार को राज्यसभा का टिकट मिलता है या रीताब्रत सच में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह तो उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद ही साफ होगा.
कब होंगे राज्यसभा चुनाव?
विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव होने के आसार हैं. चूंकि विधानसभा का आखिरी सत्र खत्म हो चुका है, इसलिए कई लोगों को आश्चर्य हो सकता है कि क्या यह चुनाव संभव है. नियम कहते हैं कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव की घोषणा की जाती है, तो मौजूदा विधायकों के लिए राज्यसभा चुनाव में भाग लेने में कोई बाधा नहीं है. इसके बाद से ही सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही राज्यसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं.
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