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जयपुर में प्रदेश की पहली टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू, तुरंत पता चलेगा किस सांप ने काटा, इलाज होगा आसान

पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब में ब्लड-यूरिन से जहर का प्रकार और मात्रा पता चलेगी. सांप काटने के मामलों में सटीक इलाज संभव होगा.

पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब
पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 23, 2026 at 5:00 PM IST

2 Min Read
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जयपुर: के सवाई मानसिंह अस्पताल में राजस्थान की पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब शुक्रवार से शुरू हो गई है. यह लैब डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के अधीन स्थापित की गई है और जहरीले पदार्थों, दवाओं की ओवरडोज तथा जहरीले जानवरों के काटने से जुड़े मामलों में अत्याधुनिक जांच सुविधा प्रदान करेगी.

लैब के नोडल अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि इस लैब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज के ब्लड, यूरिन, लार और बाल जैसे सैंपलों से जहर का सटीक प्रकार और मात्रा आसानी से पता लगाई जा सकेगी. इससे पहले इलाज मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों, परिजनों की जानकारी या अनुमान पर आधारित होता था, जिससे कभी-कभी अनावश्यक दवाएं दी जाती थीं या इलाज में देरी हो जाती थी. अब लैब की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर सही दवा, उसकी मात्रा और उपचार का तरीका तय कर सकेंगे, जिससे इलाज अधिक प्रभावी, सुरक्षित और तेज होगा.

लैब के नोडल अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा (ETV Bharat Jaipur)

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सांप के जहर का सटीक पता चलेगा: यह लैब विशेष रूप से सांप काटने के मामलों में बहुत उपयोगी साबित होगी. डॉ. शर्मा के अनुसार, राजस्थान में बारिश के मौसम में सांप काटने के मामले सबसे ज्यादा आते हैं, जहां औसतन 25-30 मरीज रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं. यहां करैत, वाइपर और कोबरा जैसे जहरीले सांपों के काटने के मामले आम हैं. अक्सर परिजन सांप को मारकर साथ लाते हैं, लेकिन अब लैब से यह वैज्ञानिक रूप से पता चलेगा कि सांप ने काटा है या नहीं, किस प्रकार का जहर (वेनम) है, जहर की मात्रा कितनी है.

टॉक्सिकोलॉजी लैब में ब्लड-यूरिन से जहर का प्रकार और मात्रा पता चलेगी
टॉक्सिकोलॉजी लैब में ब्लड-यूरिन से जहर का प्रकार और मात्रा पता चलेगी (ETV Bharat Jaipur)

मरीज का इलाज होगा आसान: डॉ. शर्मा ने बताया किपहले सामान्य प्रक्रिया के तहत ऐसे मरीजों को लगभग 10 वाइल एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए जाते थे, जो शरीर के लिए काफी हानिकारक साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकते हैं, जैसे एलर्जी, किडनी खराब होना आदि. इस लैब से अब अनावश्यक एंटी-वेनम देने से बचा जा सकेगा और केवल जरूरी मात्रा में ही दवा दी जाएगी, जिससे मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाएगी और इलाज की जटिलताएं कम होंगी. यह सुविधा न केवल सांप-बिच्छू जैसे जानवरों के काटने, बल्कि कीटनाशक, दवाओं की अधिक मात्रा, रासायनिक जहर आदि अन्य विषाक्तता के मामलों में भी बेहद मददगार साबित होगी.

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