वंदे भारत से लेकर लोकल ट्रेनों तक, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार के लिए रेलवे की नई पहल
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. अब कर्मचारी पोर्टल पर देंगे सेफ्टी आइडिया.


Published : January 10, 2026 at 5:38 PM IST
चंचल मुखर्जी
नई दिल्लीः भारतीय रेलवे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए रेल मंत्रालय अब अपने 12 लाख कर्मचारियों के दिमाग का इस्तेमाल करेगा. रेल मंत्रालय जल्द ही एक विशेष पोर्टल शुरू करने जा रहा है जहां निचले स्तर से लेकर शीर्ष प्रबंधन तक के कर्मचारी ट्रेनों की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधाओं के लिए अपने 'इनोवेटिव आइडिया' साझा कर सकेंगे. खास बात यह है कि कर्मचारी चाहें तो अपनी पहचान गुप्त रखकर भी सुझाव दे सकते हैं.
रेल मंत्रालय की इस पहल का मकसद फाइलों के लंबे सफर और वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने वाली झिझक को खत्म कर सीधे उपयोगी सुझावों को लागू करना है. वर्तमान में, कर्मचारियों को अपने रचनात्मक नवाचारों के बारे में बताने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से सीधा संपर्क करना पड़ता है, जिसके कारण कुछ कर्मचारी उनसे मिलने में संकोच महसूस करते हैं. लेकिन यह पोर्टल उन्हें अपने विचार स्वतंत्र रूप से साझा करने का अवसर प्रदान करेगा.
एक बार विचार जमा करने के बाद, वरिष्ठ अधिकारी उसका विस्तार से विश्लेषण करेंगे. इसके बाद, यात्रियों और रेलवे के लाभ को बढ़ाने के लिए उस विचार में सुधार करने और उसे सही ढंग से विकसित करने की मंजूरी दी जाएगी. उम्मीद है कि इस कदम से यात्रियों की सुविधाओं में सुधार होगा और साथ ही रेलवे संचालन की दक्षता और सुरक्षा भी मजबूत होगी.
हाल ही में, विभिन्न रेल कर्मचारियों ने अपने नवाचारी विचार दिए थे, जिन्हें भारतीय रेलवे ने तेज़ी से विकास के लिए अपनाया और लागू किया. उदाहरण के लिए, मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता हिमांशु रामदेव ने डेटा-आधारित पहल विकसित की, जिसने क्रू (चालक दल) के प्रशिक्षण और उनके उपयोग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने क्रू ट्रेनिंग के लिए एक 'यार्ड सिग्नल लेआउट ऐप' बनाया, जिसे अन्य मंडलों में भी लागू किया गया, और नई सुविधाओं के साथ रनिंग रूम की क्षमता बढ़ाई गई.
रेलवे अधिकारियों ने बताया, "इसके परिणामस्वरूप, लोको फेल होने और क्रू के रुकने के मामलों में 59 प्रतिशत की गिरावट आई और स्टालिंग (ट्रेन रुकने) के मामले 33 से घटकर 4 रह गए. निरंतर काउंसलिंग, सुरक्षा सेमिनार और केंद्रित पर्यवेक्षण के कारण 2024 में 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) का एक भी मामला सामने नहीं आया."
इसी तरह, पूर्व रेलवे के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता अभिनव बंसल ने वंदे भारत ट्रेनों के लिए एक 'रियल-टाइम डेटा मॉडल' विकसित किया, जो इवेंट लॉग और भौतिक मानकों की निगरानी करता है. यह प्रणाली खराबियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटती है, सीमाओं के उल्लंघन (threshold breaches) का पता लगाती है और सुधारात्मक सुझाव देती है.
रेलवे ने कहा, "उनके काम से खराब वाल्वों, सेंसर और ढीले कनेक्शनों की पहचान करने में मदद मिली, जिससे ट्रेनों की विश्वसनीयता बढ़ी और उनका संचालन सुचारू हुआ."
एक अन्य रेल कर्मचारी और पूर्व रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता नरेंद्र कुमार रवि ने एक ऐसा यांत्रिक उपकरण बनाया जो MIG/MAG फिलर वायर को प्लास्टिक बॉबिन पर दोबारा लोड कर सकता है. इससे खराब हो चुके स्पूल का फिर से उपयोग संभव हुआ, जिससे भारी लागत की बचत हुई और वैगनों की उपलब्धता में सुधार हुआ.
रेलवे के अनुसार, "रवि ने जमालपुर कार्यशाला में भारतीय रेलवे के पहले BRN 22.9 वैगनों के निर्माण का नेतृत्व किया और RDSO व विनिर्माण दिशानिर्देशों के अनुसार रिकॉर्ड समय में उच्च गुणवत्ता वाली वेल्डिंग सुनिश्चित की."
रेलवे में ऐसे कई अन्य कर्मचारी भी हैं जिन्होंने विभाग की प्रगति और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए नए नवाचार (इन्नोवेशंस) विकसित किए हैं. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह समर्पित पोर्टल ऐसे रचनात्मक विचारकों को अपने नवाचार साझा करने में मदद करेगा, जिससे रेलवे की सुरक्षा और विश्वसनीयता में नए मील के पत्थर हासिल किए जा सकें.
वैष्णव ने कहा, "मैं रेल कर्मचारियों के उन सभी विचारों और रचनात्मक सुझावों को आमंत्रित करना चाहता हूं जो रेलवे के विकास और सुधार में मदद करेंगे. रेलवे बहुत जल्द एक समर्पित पोर्टल लॉन्च करेगा जहां कर्मचारी अपने विचार साझा कर सकेंगे. हर एक विचार को गंभीरता से लिया जाएगा और उसकी समीक्षा के बाद उसे सुधारों में शामिल किया जाएगा."
स्टार्टअप्स को शामिल करना
रेलवे स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के साथ और अधिक जुड़ेगा, कर्मचारियों को सुधार के विचार देने के लिए प्रोत्साहित करेगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि सफल नवाचारों को पूरे नेटवर्क में बड़े पैमाने पर लागू किया जाए. अन्य प्रमुख राष्ट्रीय सुधारों के साथ तुलना करते हुए, रेलवे भी बदलाव लाने में वही साहस और आत्मविश्वास दिखाएगा.
क्षमता में वृद्धि
यात्रियों और माल ढुलाई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे ने अभूतपूर्व स्तर पर अपने नेटवर्क का विस्तार किया है. देशभर में कनेक्टिविटी सुधारने और व्यस्त रूटों पर भीड़ कम करने के लिए लगभग 35,000 किलोमीटर नई रेलवे पटरियां बिछाई गई हैं. पिछले तीन वर्षों में रेलवे के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. बड़ी संख्या में वैगन खरीदे गए हैं और लोकोमोटिव (इंजन) के उत्पादन में भी तेजी आई है.
भविष्य के लक्ष्य
रेलवे सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है. पहले जहां ऐसी दुर्घटनाओं की संख्या लगभग 170 थी, वहीं अब यह घटकर करीब 12 रह गई है. अगला लक्ष्य दुर्घटनाओं में 95 प्रतिशत तक की कटौती करना और इस संख्या को इकाई में लाना है.
यात्री सेवाएं
यात्री-केंद्रित सुधार इस पहल का एक प्रमुख हिस्सा हैं. बेहतर योजना और संचालन ने भारतीय रेलवे को त्योहारों के दौरान भारी यात्रा मांग को सुचारू रूप से संभालने में मदद की. निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
- रखरखाव में सुधार
- विक्रेताओं की जवाबदेही तय करना
- स्वच्छता बढ़ाना
- ट्रेन के अंदर के अनुभव को बेहतर बनाना
- विश्वसनीय सेवाएँ सुनिश्चित करना
- समग्र दक्षता बढ़ाना
स्टेशनों का पुनर्विकास सामान्य यात्रियों के लिए सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ आगे बढ़ रहा है, साथ ही ट्रेनों और स्टेशनों पर स्वच्छता में सुधार के लिए एक नया अभियान भी चलाया जा रहा है.
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