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उत्तराखंड में झूमकर बरसा मानसून, ऋषिकेश में राफ्टिंग बंद, पहाड़ों पर बढ़ा खतरा, हाई अलर्ट पर प्रशासन

उत्तराखंड में जमकर बरस रहे बदरा, आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय, अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश, रिपोर्ट किरणकांत शर्मा

MONSON RAIN IN UTTARAKHAND
मानसून की बौछार (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 1, 2026 at 5:34 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून आ चुका है. मानसून के पहली बौछार ने पर्वतीय इलाकों में प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. मौसम के बदलते मिजाज के बीच कई जिलों में भारी से भारी बारिश की संभावना जताई गई है. ऐसे में प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है. जबकि, पहली ही बारिश में देहरादून में सड़कें नदी जैसी नजर आने लगी. सड़कों पर जलभराव ही जलभराव देखने को मिला. वहीं, रिस्पना और बिंदाल नदी में मटमैला पानी ऊफान मारता दिखाई दिया.

बारिश से नदियों और गाड़-गदेरों के जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन से सड़कें बंद होने और निचले इलाकों में जलभराव जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका को देखते शासन और प्रशासन से लेकर पूरे आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय हो गया है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से लेकर जिला स्तरीय नियंत्रण कक्षों तक चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि, किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके.

आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय (वीडियो- ETV Bharat)

पहाड़ों में कुछ दिन बेहद संवेदनशील, कई जिलों के लिए चेतावनी: मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, 1 और 2 जुलाई बारिश के लिहाज से भारी रहने वाले हैं. जिसके तहत देहरादून और बागेश्वर समेत कई जिलों में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है.

इसके साथ ही पर्वतीय इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है. बाकी दिन भी देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जैसे जिलों में भारी से अत्यधिक बारिश का अनुमान है. जबकि, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में भी तेज बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. ऐसे में बारिश खूब भीगो सकती है.

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देहरादून में सड़कें बनी तालाब (फोटो- ETV Bharat)

भूस्खलन और सड़क बाधित होने का बढ़ा खतरा: मानसून की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड में सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क बनाए रखने की होती है. लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से मलबा और बोल्डर गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. चारधाम यात्रा मार्ग समेत सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कें और ग्रामीण संपर्क मार्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

ऐसे में लोक निर्माण विभाग, सीमा सड़क संगठन, एनएच समेत अन्य एजेंसियों को मशीनरी के साथ तैयार रहने को कहा गया है. लोनिवि सचिव पंकज पांडे ने निर्देश दिए हैं कि जहां भी सड़कें बाधित हों, वहां तत्काल मलबा हटाकर यातायात बहाल किया जाए. ताकि, राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए. सचिव पांडे की मानें तो हर मार्ग पर जेसीबी मशीन खड़ी है. जो मार्ग बंद होने की स्थिति में खोलने का काम करेगी.

आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय, अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश: उधर, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने संभावित आपदा को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों आपदा प्रबंधन अधिकारियों और विभिन्न विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं. संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने को कहा है.

इसके अलावा सभी संचार माध्यम सक्रिय रखने के आदेश दिए गए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि मोबाइल फोन हर समय चालू रखें और किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें. इसके साथ ही आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली से जुड़े सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है.

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देहरादून में झमाझम बारिश (फोटो- ETV Bharat)

स्कूलों, ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों पर विशेष नजर: बारिश के मौसम में बच्चों और पर्यटकों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है. पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग गतिविधियों की नियमित समीक्षा करने और मौसम खराब होने पर आवश्यक प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं. स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भवनों की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने को कहा गया है.

नगर निकायों को नालियों और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि, शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति न बने. इसके साथ ही बारिश के दौरान कई बार दूरस्थ गांवों का संपर्क टूट जाता है. इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आवश्यक खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

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देहरादून में ऊफान पर नदी (फोटो- ETV Bharat)

इसके अलावा राहत शिविरों की तैयारियों की समीक्षा भी की जा रही है. ताकि, आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके. स्वास्थ्य विभाग, पेयजल विभाग और बिजली विभाग को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

मानसून के बीच होगी सबसे बड़ी मॉक ड्रिल: भारी बारिश की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार आपदा प्रबंधन व्यवस्था की वास्तविक तैयारी परखने के लिए 2 जुलाई को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल आयोजित करने जा रही है. इसे राज्य की अब तक की सबसे व्यापक आपदा अभ्यास कार्रवाई माना जा रहा है. सभी 13 जिलों में कुल 66 स्थानों पर यह अभ्यास किया जाएगा.

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बरसात के दौरान इन बातों का रखें ध्यान (फोटो- ETV Bharat GFX)

खास बात ये है कि अधिकांश स्थान ऐसे चुने गए हैं, जहां पहले कभी इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित नहीं हुई. इसका उद्देश्य केवल औपचारिक अभ्यास नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थिति बनाकर विभिन्न एजेंसियों की कार्यक्षमता को परखना है. मॉक ड्रिल से पहले उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई.

इस दौरान विभिन्न संभावित परिस्थितियों को सामने रखकर अधिकारियों से पूछा गया कि यदि कहीं अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव या मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी घटनाएं होती हैं, तो किस प्रकार प्रतिक्रिया दी जाएगी. राहत दलों की तैनाती बचाव कार्यों की रणनीति उपकरणों के उपयोग और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की विस्तार से समीक्षा की गई.

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बारिश में बरतें सावधानियां (फोटो- ETV Bharat GFX)

इस बार देर से मानसून की शुरुआत, जून में सामान्य से कम हुई बारिश: मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस साल मानसून ने 30 जून को उत्तराखंड में प्रवेश किया. जून महीने में प्रदेश में सामान्य औसत की तुलना में कम बारिश दर्ज की गई, लेकिन अब मानसून सक्रिय होने के साथ कई इलाकों में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है.

भले ही पूरे सीजन में औसत से कम बारिश की संभावना हो, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाएं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती हैं. यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर अत्यधिक बारिश को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. ताकि, जान माल के नुकसान को कम किया जा सके.

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पानी से लबालब हुईं सड़कें (फोटो- ETV Bharat)

ऋषिकेश में गंगा नदी में राफ्टिंग बंद: ऋषिकेश में भी राफ्टिंग को पर्यटकों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. अब राफ्टिंग दो महीने बाद खोली जाएगी. गंगा का जलस्तर बढ़ने, बहाव तेज होने के कारण कोई दुर्घटना न हो, इसे देखते हुए मानसून के दौरान ये गतिविधि बंद कर दी जाती है. ऐसे में ऋषिकेश आने वाले पर्यटक इस बात का ध्यान रखें कि अब दो महीने के लिए राफ्टिंग और गंगा किनारे कैंप पूरी तरह से बंद रहेंगे.

लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें. नदी-नालों के किनारे जाने, पहाड़ी ढलानों के नीचे रुकने और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से परहेज करें.

यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें. प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें. किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की सलाह दी गई है. खासकर चारधाम यात्रा, पर्वतीय पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है.

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हल्द्वानी में जलभराव की सूचना पर दौड़ा प्रशासन (फोटो- ETV Bharat)

हल्द्वानी में बरसे बादल, जलभराव की सूचना पर दौड़ा प्रशासन: हल्द्वानी में लगातार बारिश से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी. शिकायत मिलते ही नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. नगर आयुक्त और सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नालों की तत्काल सफाई शुरू कराई. ताकि, बारिश के पानी की निकासी सुचारु बनी रहे.

मसूरी में पहाड़ी दरकी, मलबे की चपेट में आया वाहन: मसूरी में हाथीपांव रोड पर माइंस क्षेत्र के पास अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर आ गिरा. हादसे के दौरान एक वाहन मलबे की चपेट में आ गया, लेकिन राहत की बात ये रही कि चालक बाल-बाल बच गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई.

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