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'परिवार से नाता तोड़ रही हूं..', लालू की बेटी रोहिणी ने राजनीति छोड़ी

रोहिणी आचार्य ने लालू यादव परिवार से अपना नाता तोड़ लिया है. इसकी घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से की.

राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के साथ रोहिणी आचार्य
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के साथ रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya Social Media)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : November 15, 2025 at 3:43 PM IST

6 Min Read
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पटना: बिहार की राजनीति में लालू यादव के परिवार से बड़ी खबर है. लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने लालू परिवार से रिश्ता तोड़ लिया है. इसके साथ ही उन्होंने राजनीति से भी सन्यास ले लिया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी.

सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट: रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखा..कहा कि 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं. संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं.

परिवार में बिखराव: बिहार चुनाव के बाद रोहिणी आचार्य का फैसला चौंकाने वाला है. उन्होंने न सिर्फ राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की है, बल्कि अपने परिवार से भी सार्वजनिक रूप से नाता तोड़ लिया है. यह फैसला एक ऐसे राजनीतिक परिवार में गहरे संकट का संकेत देता है जो लगातार बिखराव का सामना कर रहा है.

खुद ली जिम्मेदारी: रोहिणी आचार्य के सोशल मीडिया पोस्ट से इस संक्षिप्त संदेश ने साफ कर दिया कि परिवार और पार्टी के भीतर उन पर दबाव बनाया जा रहा था और उन्होंने इसकी सारी जिम्मेदारी खुद लेते हुए पीछे हटने का फैसला किया.

कौन हैं संजय यादव और रमीज?: रोहिणी के ट्वीट में संजय यादव और रमीज़ के नाम का उल्लेख है. ये दोनों व्यक्ति आरजेडी की आंतरिक राजनीति में काफी प्रभावशाली माने जाते रहे हैं. संजय यादव राज्यसभा सांसद भी हैं. पार्टी के भीतर पहले भी इन दोनों पर परिवार और पार्टी के मामलों में अत्यधिक दखल देने के आरोप लगते रहे हैं. रोहिणी द्वारा सीधे तौर पर इनके नाम लेकर आरोप लगाना यह साबित करता है कि पार्टी के भीतर गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप गंभीर है.

पिता की जान बचाने वाली बेटी का दर्द: रोहिणी आचार्य वही बेटी हैं, जिन्होंने कुछ साल पहले अपने पिता लालू प्रसाद यादव की जान बचाने के लिए किडनी दान की थी. उस समय पूरे देश ने एक बेटी के इस अविश्वसनीय त्याग और साहस की सराहना की थी. ऐसी बेटी का आज अपने ही परिवार से रिश्ता तोड़ने का फैसला यह साबित करता है कि पारिवारिक रिश्तों में आई दरारें अब इतनी गहरी हो गई हैं कि एक बड़ा त्याग करने वाला सदस्य भी मजबूर है.

पिता के साथ रोहिणी आचार्य
पिता के साथ रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya Social Media)

तेज प्रताप के बाद दूसरी बड़ी टूट: इससे पहले बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी परिवार और पार्टी से अलग हो चुके हैं. मई 2025 में लालू प्रसाद यादव ने तेज प्रताप को 'गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार' और पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था.

तेज प्रताप को चुनाव में हार: इसके बाद तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी बना ली. इस बार वह अपने दल से महुआ सीट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. इन सभी स्थिति के बीच अब रोहिणी का अलग होना साबित करता है कि परिवार में मनमुटाव की समस्या लगातार बढ़ रही है.

चुनावी हार बनी तोड़ने वाली घटना: बिहार चुनाव 2025 के नतीजे आरजेडी और महागठबंधन के लिए बेहद निराशाजनक रहे. एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीता. महागठबंधन महज 35 सीटों तक सिमट गया. आरजेडी की सीटें घटकर 25 रह गईं.

परिवार के साथ रोहिणी आचार्य
परिवार के साथ रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya Social Media)

इसलिए परिवार से अलग हुईं: माना जा रहा है कि इस चुनावी हार के बाद पार्टी और परिवार के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ. रोहिणी आचार्य को इस हार के लिए जिम्मेदार ठहराया गया. इस तनाव के चलते ही उन्होंने यह कठोर फैसला लिया.

पारिवारिक कलह आया सामने: रोहिणी के पोस्ट पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजद एक पारिवारिक पार्टी है. परिवार का कलह उभर कर आया है. लेकिन महत्वपूर्ण विषय है कि जिस बेटी रोहिणी ने अपने पिता की प्राण रक्षा की हो और उस बेटी के मुंह से कराह निकल रहा हो. भाई की कलाई में राखी बांधी और आज उस परिवार को भी और पार्टी को भी अलविदा कह रही है.

"लालू जी राजनीति के धृतराष्ट्र हो गए हैं. सब कुछ जानते हुए खामोश क्यों है? लालू यादव आप घर के मुख्य न्यायाधीश हैं. मुख्य न्यायाधीश की भूमिका आप अदा नहीं करेंगे तो रोहिणी के द्वारा जो कृत्य आपके प्राण रक्षा के लिए किया गया वह भी आपके अपराध की श्रेणी में आ जाएगा." -नीरज कुमार, मुख्य प्रवक्ता, जदयू

जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार (ETV Bharat)

'बाहरी लोगों पर भरोसा बंद करें': नीरज कुमार ने कहा कि बेटी की कराह बहुत भारी पड़ेगा. पार्टी का कुनबा बिखर गया है और परिवार का भी कुनबा बिखर जाएगा. इसलिए ज्ञान चक्षुक खोलिए और बिहार के बाहर के लोगों पर भरोसा करना बंद कीजिए.

आरजेडी के भविष्य पर सवाल: वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी का कहना है कि रोहिणी आचार्य का राजनीति छोड़ना आरजेडी के लिए एक बड़ा झटका है. वह पार्टी के एक पढ़े-लिखे, साहसी और सशक्त महिला चेहरे के रूप में जानी जाती थीं. सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ और समर्थकों के बीच उनकी सकारात्मक छवि पार्टी के लिए एक बड़ी संपत्ति थी.

"उनके जाने से पार्टी के भीतर मौजूद गुटीय संघर्ष और आंतरिक मतभेद और भी स्पष्ट हो गए हैं. चुनावी हार के बाद पार्टी पहले से ही कमजोर है और ऐसे में परिवार के एक और सदस्य का इस तरह से मुंह मोड़ लेना आरजेडी के पुनर्निर्माण की राह और कठिन बना देगा." -प्रवीण बागी, वरिष्ठ पत्रकार

परिवार के साथ रोहिणी आचार्य
परिवार के साथ रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya Social Media)

एक राजनीतिक विरासत का संकट: प्रवीण बागी का कहना है कि रोहिणी आचार्य का राजनीति और परिवार, दोनों को अलविदा कह देना, सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं रह गया है. यह बिहार की राजनीति में 'लालू फैक्टर' के लगातार कमजोर पड़ने और एक राजनीतिक विरासत के बिखराव की कहानी है.

अब आगे क्या होगा?: प्रवीण बागी कहते हैं कि एक के बाद एक, परिवार के सदस्यों का अलग होना साफ दिखाता है कि जिस राजनीतिक विरासत ने दशकों तक बिहार की राजनीति को प्रभावित किया, आज वह खुद अपने ही घर में सिमटती और टूटती नजर आ रही है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह टूट और गहरी होती है या फिर कोई नया सुलह का रास्ता निकलता है.

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