नाइपर जेईई परीक्षा में PU के स्टूडेंट ने हासिल किया एआईआर-1, बोले- 'कामयाबी के लिए पढ़ाई में दिलचस्पी जरूरी'
पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र मानस प्रभु ने NIPER JEE 2026 में ऑल इंडिया रैंक वन (AIR-1) हासिल की है. जानें उन्होंने क्या कहा.

Published : June 20, 2026 at 9:00 PM IST
|Updated : June 20, 2026 at 9:06 PM IST
पंचकूला: जीवन में कामयाबी हासिल करते हुए नाम कमाना हो तो पढ़ाई में दिलचस्पी बने रहना आवश्यक है. कोई भी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा हो, उसमें सफलता के लिए आवश्यक पैटर्न और सही दिशा में आगे बढ़ना जितना जरूरी है, उससे भी जरूरी है कि कभी हताश ना हों. ये कहना है पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र एवं NIPER JEE 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR-1) हासिल करने वाले मानस प्रभु का. मानस प्रभु ने अपनी इस कामयाबी को सबसे पहले ईटीवी भारत के साथ सांझा किया. उन्होंने बताया कि किस तरीके से वो बीते कई वर्षों से पढ़ाई करते रहे हैं और परेशान करने वाले किन विषयों को किस प्रकार उन्होंने अपनी मजबूती बनाया.
नीट और एमबीबीएस नहीं होने पर हताश नहीं: चंडीगढ़ निवासी मानस प्रभु ने बताया कि बारहवीं कक्षा में उन्होंने मेडिकल लेकर नीट की तैयारी की. लेकिन नीट में अच्छा रैंक नहीं मिलने से दाखिला नहीं मिल सका. बताया कि चंडीगढ़ के एमबीबीएस के लिए एकमात्र कॉलेज सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में मैरिट लिस्ट में नाम नहीं आ सका. मानस ने बताया कि इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी के बैचलर ऑफ फार्मेसी PUCETUG की परीक्षा में अच्छा रैंक हासिल करने पर दाखिल ले लिया. उन्होंने बताया अकसर अभ्यर्थी नीट या एमबीबीएस नहीं कर पाने के कारण हताश हो जाते हैं लेकिन उन्हें बैचलर ऑफ फार्मेसी में कभी भी ऐसा एहसास नहीं हुआ. क्योंकि संबंधित कोर्स व डिग्री में पढ़ाई और आगे बढ़ने का काफी बड़ा मौका रहता है. उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे समय गुजरता गया, उनका अपने विषयों से लगाव बढ़ता गया.
रट्टे ना लगाएं, दिलचस्पी बनाएं: मानस प्रभु ने बताया कि किसी भी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा की तैयारी के लिए रट्टा लगाकर काम ना चलाएं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई और संबंधित विषयों में दिलचस्पी होना बहुत जरूरी है. इस चरण पर मानस ने बताया कि उन्होंने कैसे तैयारी की. उन्होंने बताया कि उनकी स्ट्रैटजी थी कि जो विषय पसंद है, उसे जितना समय देना हो दीजिए. जो विषय पसंद न हों, उनके लिए कोशिश रहनी चाहिए कि किसी भी तरीके से अपनी दिलचस्पी बढ़ाना जरूरी है. इसके लिए बार-बार पढ़ने की कोशिश की जा सकती है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में यू-ट्यूटी व एआई का दौर है, नतीजतन अलग-अलग टीचरों की गाइडेंस ली जा सकती है. उन्होंने कहा कि उन्हें जो विषय पसंद है, उसके लिए वह पूरा दिन किसी पुस्तक और टीचर से पढ़ सकते हैं. इस तरीके से दिलचस्पी बढ़ाते हुए उस तरीके को फॉलो करना है. उन्होंने बताया कि वह स्वयं आगे मास्टर ऑफ फार्माकोलॉजी करना चाहते हैं.
मुश्किल विषयों की पढ़ाई का समाधान: मानस प्रभु ने बताया कि उन्हें सबसे अधिक परेशानी केमिस्ट्री के विषय में आती थी, क्योंकि इसके अलग-अलग ब्रांच हैं, जैसे आर्गेनिक केमिस्ट्री, इंस्ट्रमेंटल ऑफ एनालिसिस और इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री. उन्होंने बताया कि इस विषय में परेशानी का कारण, इसमें काफी व्यापक जानकारी याद करनी और साथ ही गहराई तक प्रिंसिपल का याद होना और उसकी समझ आना काफी जरूरी रहता है. मानस ने बताया कि इस परेशानी का समाधान उन्होंने स्टैंडर्ड बुक्स को पढ़कर निकाला, जोकि काफी जरूरी है. बताया कि यदि स्टैंडर्ड बुक्स को फॉलो किया जाए तो उनमें समग्र जानकारी को विस्तृत तरीके से समझाया गया है. इसके अलावा प्रोफेसर की बड़ी भूमिका रही है, जिन्होंने प्रेजेंटेशन के साथ सभी डाउट क्लियर करे, जिससे काफी फायदा मिला. नतीजतन केमिस्ट्री का डर निकल गया और कामयाबी मिली.
कितने घंटे पढ़ाई और परिवार का स्पॉर्ट: मानस ने अपनी कामयाबी में परिवार की स्पॉर्ट को काफी अहम बताया. उन्होंने कहा कि परिवार ने उन्हें आगे बढ़ाने के लिए मजबूत फाउंडेशन के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए. पिता प्रभुनाथ शाही और मां रीमा प्रभु हर कमजोर स्थिति में उनका मजबूत सहारा बने. उन्होंने बताया कि बैचलर ऑफ फार्मेसी प्रोफेशनल कोर्स है, जिसके लिए 75-80 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य रहती है. जबकि कॉलेज का समय सुबह नौ बजे से पांच बजे तक होती है. इतने समय पढ़ाई कर घर लौटने तक काफी थकान हो चुकी होती है. नतीजतन रोजाना कभी उनका फोकस यह नहीं रहा कि उन्हें निर्धारित घंटे पढ़ाई करनी ही करनी है. वह केवल कॉलेज में बताए और समझाए गए सिलेबस/विषयों/प्वाइंटस को दोहराते (ब्रश-अप) करते थे. उन्होंने बताया कि उन्हें फार्माकोलॉजी काफी पसंद रही है, जिस कारण वह कोशिश करते थे कि वह अपने कांसेप्ट पढ़ते रहे. इसके अलावा अवकाश के दिनों में चार-पांच घंटे की पढ़ाई कर अप-टू-डेट रहने का प्रयास रहता था. उन्होंने बताया कि वर्क लाइट बैलेंस के साथ-साथ पढ़ाई के लिए भी संतुलन होना जरूरी है. बताया कि उन्होंने पढ़ाई के अलावा अपने अन्य शौंक भी पूरे किए लेकिन कभी निर्धारित क्लॉक को दिमाग में सेट नहीं की. जितना पढ़ सके, उतना पढ़ा.
परीक्षा से पहले अधिक केंद्रित होना जरूरी: मानस प्रभु ने बताया कि प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा से एक-दो महीने पहले अधिक केंद्रित होकर पढ़ना आवश्यक रहता है. उस दौरान उन्होंने आठ से बारह घंटों तक पढ़ाई की. इसके लिए वह एक घंटे पढ़ाई करने के बाद दस मिनट का आराम लेते थे और इसी तरह बारह घंटों तक पढ़ते थे. लेकिन इससे पहले के समय में अपनी सामान्य जीवनशैली पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ने दिया. मानस से बताया कि उनके पिता प्रकृति प्रेमी हैं, जिन्होंने ट्राईसिटी में खाली जमीन पर कई सुंदर वाटिकाएं तैयार की हैं. इसी कारण फाउंडेशन रजिस्टर कराने से पहले पिता ने उन्हें भी आदत डलवाई कि वह अपने हर जन्मदिवस पर एक पेड़ जरूर लगाना है.

