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हिमाचल के बागवान नॉर्थ ईस्ट के मशहूर फूल सिंबिडियम ऑर्किड उगाकर बटोर रहे सुर्खियां, 25-30 लाख आय की उम्मीद

सिंबिडियम ऑर्किड लॉन्ग लाइफ और अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है.

Northeast Famous Flowers in Palampur
हिमाचल में नॉर्थईस्ट के मशहूर फूल सिंबिडियम ऑर्किड (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 9, 2026 at 9:02 PM IST

6 Min Read
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धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की वादियों में बागवानी मात्र फलों के उत्पादन तक सीमित होकर नहीं रह गई है, बल्कि फूलों की खुशबू भी यहां के लोगों के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोल रही है. प्रदेश सरकार उद्यान विभाग की पुष्प क्रांति सहित विभिन्न योजनाएं यहां बागवानों के सपनों को पंख दे रही है. बागवानी विभाग के तकनीकी सहयोग और सब्सिडी ने प्रदेश के लोग पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर 'फ्लोरीकल्चर' (पुष्प की खेती) में अपनी खास पहचान बना रहे हैं. इन्हीं बागवानों में से एक हैं डॉ. नरेंद्र पाठक. इनकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी हो रही है.

ऊना जिले के कुटलैहड़ के रहने वाले डॉ. नरेंद्र पाठक ने फ्लोरीकल्चर में पीएचडी की डिग्री हासिल की है. डॉ. नरेंद्र की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने मिट्टी से जुड़कर कुछ नया करने की ठानी. अपने जुनून को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने पालमपुर के राख क्षेत्र में जमीन लीज पर लेकर पॉलीहाउस स्थापित कर पूर्वोत्तर की मशहूर सिंबिडियम ऑर्किड फूल की खेती शुरू की है. डॉ. नरेंद्र ने काफी मेहनत करने के बाद सिंबिडियम ऑर्किड जैसे फूलों को हिमाचल की आबोहवा में ढालने सफलता हासिल की है, जो मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत की पहचान हैं.

Northeast Famous Flowers in Palampur
अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर सिंबिडियम ऑर्किड (ETV Bharat)

लॉन्ग लाइफ और अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर सिंबिडियम ऑर्किड

सिंबिडियम ऑर्किड को अपनी खूबसूरती और लंबे जीवन काल के लिए जाना जाता है. एक बार गमले से तोड़ने के बाद फूल 5 से 7 सप्ताह तक तरोताजा रहता है. शादी सहित अन्य समारोहों और होटल इंडस्ट्री में इन फूलों की अच्छी खासी डिमांड है. वैसे तो यह हिमालयी क्षेत्र का फूल है, लेकिन अमूमन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ही फलता-फूलता और उगाया जाता है.

डॉ. नरेंद्र इस चुनौती को स्वीकार करते हुए और इसके कंद (बीज) नॉर्थ-ईस्ट से लेकर आए. आज पालमपुर के राख में उनके तीन मॉडर्न पॉलीहाउस में सिंबिडियम के फूलों की 50 से ज्यादा रंग-बिरंगी प्रजातियां लहलहा रही हैं. लगभग 1000 स्क्वायर फीट में फैली यह खेती न केवल डॉ. नरेंद्र की मेहनत का परिणाम है, बल्कि उत्तर भारत में विविधतापूर्ण बागवानी का एक नया और अनूठा मॉडल भी है.

Northeast Famous Flowers in Palampur
फूलों की खेती से 25 से 30 लाख तक सालाना आय की उम्मीद (ETV Bharat)

उद्यान विभाग से 18.50 लाख की सब्सिडी

किसी भी बड़े सपने को धरातल पर उतारने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है. डॉ. नरेंद्र के इस प्रोजेक्ट में हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग ने काफी मदद की है. बागवानी विभाग ने उन्हें पुष्प क्रांति योजना और अन्य योजनाओं की विभिन्न मदों में लगभग 18.50 लाख रुपए की सब्सिडी प्रदान की है. डॉ. नरेंद्र ने इस सफलता के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और बागवानी विभाग के अधिकारियों का आभार जताया है, जिनके सहयोग से उनकी राह आसान हुई है. डॉ. नरेंद्र अब स्वयं इसका कंद (बीज) तैयार कर रहे हैं.

Northeast Famous Flowers in Palampur
नॉर्थईस्ट के मशहूर फूल सिंबिडियम ऑर्किड (ETV Bharat GFX)

पहले 2-3 साल तक आय का मुकाबले इन्वेस्टमेंट अधिक

प्रगतिशील बागवान डॉ. नरेंद्र पाठक बताते हैं, "सिंबिडियम ऑर्किड फूल की खेती धैर्य का काम है. इसे लगाने के करीब तीन साल बाद यह पौधा रिटर्न देना शुरू करता है. 5 से 6 साल में यह आय का एक बेहतरीन और स्थिर जरिया बन जाता है. एक बार पौधा परिपक्व हो जाए, तो अगले कई वर्षों तक यह वार्षिक आय सुनिश्चित करता है. 1 हजार वर्ग फीट से 3-4 साल बाद 8 लाख रुपए की आय सुनिश्चित हो जाती है. 1 हजार वर्गफीट से आने वाले समय में 25 से 30 लाख सालाना आय की उम्मीद है."

प्रगतिशील बागवान डॉ. नरेंद्र के अनुसार, वर्तमान में बाजार में इसकी भारी मांग को देखते हुए सिंबिडियम की एक स्टिक करीब 500 रुपए तक बिकती है, जबकि पूरा गमला 1500 से 2000 रुपए तक की कीमत प्राप्त करता है. मुख्य रूप से दिल्ली जैसे मेट्रोपॉलिटन शहरों में इन फूलों की भारी मांग है.

Progressive Horticulturist Narendra Pathak
प्रगतिशील बागवान डॉ. नरेंद्र पाठक (ETV Bharat)

भविष्य की राह और अन्य बागवानों के लिए संदेश

फ्लोरीकल्चर एवं प्रगतिशील बागवान डॉ. नरेंद्र केवल खुद की प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहते. वे प्रदेश के अन्य युवाओं और बागवानों को भी सिंबिडियम की खेती के गुर सिखाने के लिए तैयार हैं. प्रगतिशील बागवान का कहना है कि यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए, तो हिमाचल का हर युवा आत्मनिर्भर बन सकता है.

Northeast Famous Flowers in Palampur
सिंबिडियम ऑर्किड फूल हिमाचल में उगाकर पेश बागवान ने पेश की मिसाल (ETV Bharat)

सिंबिडियम ऑर्किंड की खेती के लिए 18.5 लाख की सब्सिडी

द्यान विभाग पालमपुर में विषय विशेषज्ञ डॉ. सरिता शर्मा का कहना है, "सिंबिडियम ऑर्किंड की खेती स्वरोजगार के द्वार खोलती है और यदि कोई बागवान इस आधुनिक खेती को शुरू करना चाहता है, तो वह कांगड़ा जिले के बागवानी विभाग में संपर्क कर सकता है. प्रगतिशील बागवान डॉ. नरेंद्र पाठक को भी सिंबिडियम ऑर्किंड की खेती के लिए करीब 18.5 लाख की सब्सिडी प्रदान की गई है."

Northeast Famous Flowers in Palampur
पूर्वोत्तर की पहचान सिंबिडियम ऑर्किड फूल (ETV Bharat)

वहीं, जिला कांगड़ा उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. अलक्ष पठानिया ने कहा कि, "बागवानी विभाग की पुष्प क्रांति और अन्य योजनाएं बागवानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है. बागवानी विभाग पुष्पखेती के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत बागवानों की सहायता के लिए तत्पर है. डॉ. नरेंद्र पाठक ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है."

Northeast Famous Flowers in Palampur
फूलों की खेती से 25 से 30 लाख तक सालाना आय की उम्मीद (ETV Bharat)

"जिला कांगड़ा के विकास खंड रैत, धर्मशाला, बैजनाथ और भवारना के ठंडे ऊंचाई वाले क्षेत्र इस फूल की खेती के लिए उपयुक्त हैं. इसलिए बेरोजगार युवा सिंबिडयम की खेती को स्वरोजगार के तौर पर अपना सकते हैं." - डॉ. कमलशील नेगी, संयुक्त निदेशक बागवानी विभाग धर्मशाला

कैसे करें सिम्बिडियम ऑर्किड की देखभाल?

उद्यान विभाग पालमपुर विषय विशेषज्ञ डॉ. सरिता शर्मा कहती हैं, सिम्बिडियम ऑर्किड को पूरे साल अच्छी रोशनी की जरूरत होती है, विशेषकर सर्दियों के मौसम में, लेकिन गर्मियों की तेज धूप से इन्हें बचाकर रखना जरूरी है. सिम्बिडियम को कम से कम 50 प्रतिशत प्रकाश की जरूरत होती है. ये यूकेलिप्टस जैसे पेड़ों के नीचे जहां छनी हुई रोशनी से लेकर मध्यम छाया मिलती है, वैसे जगह के लिए अनुकूल है. ऑर्किड को घनी छाया में या ऐसी दीवारों के पास बिल्कुल भी न रखें जो रोशनी रोकती हों. लंबे डंठलों पर सिम्बिडियम ऑर्किड के 10 से 25 फूल खिलते हैं, इन फूलों की चौड़ाई 2.5 इंच से 6 इंच तक होती है. इन फूलों की विशेषता यह है कि ये एक से तीन महीने तक खिले रह सकते हैं.

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