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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ग्लोबल डेस्टिनेशन तैयार करने का प्लान, अल्ट्रा मैराथन से वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर चमकेगी नीती घाटी

सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चमोली जिले की नीती घाटी को पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन के रूप में देखा जा रहा है.

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चमकेगी नीती घाटी (Uttarakhand Tourism Department)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 27, 2026 at 2:57 PM IST

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Updated : February 27, 2026 at 3:11 PM IST

7 Min Read
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नवीन उनियाल

देहरादून: भारत-चीन सीमा के करीब मौजूद नीती घाटी को वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर चमकने का बड़ा मौका मिलने जा रहा है. यहां भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों को अल्ट्रा मैराथन में आने का मौका मिलने जा रहा है, जिसके लिए उत्तराखंड का पर्यटन विभाग विशेष प्रयास में जुटा है. खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इस हिमालयी क्षेत्र में इस बार विदेशी पर्यटकों को लाने पर फोकस किया जा रहा है, जिसके लिए भारत सरकार से भी नियमों में कुछ शिथिलता की उम्मीद लगाई जा रही है.

वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन: सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चमोली जिले की नीती घाटी अब सिर्फ सीमांत क्षेत्र नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन के रूप में देखी जा रही है. लगभग 4000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर फैली यह घाटी अपनी बर्फीली चोटियों, हरित बुग्यालों और शांत वादियों के लिए जानी जाती है. भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित होने के कारण यहां सुरक्षा के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन अब उत्तराखंड पर्यटन विभाग इस क्षेत्र की प्राकृतिक भव्यता को दुनिया के सामने लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ग्लोबल डेस्टिनेशन तैयार करने का प्लान (ETV Bharat और Uttarakhand Tourism Department)

अल्ट्रा मैराथन का आयोजन प्रस्तावित: दरअसल, आदि कैलाश की तर्ज पर नीती घाटी में भी अल्ट्रा मैराथन का आयोजन प्रस्तावित है. कार्यक्रम के अनुसार 31 मई को इस हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन किया जाएगा. आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

विदेशियों ने भी जताई इच्छा: दिलचस्प बात यह है कि देशी प्रतिभागियों के साथ-साथ विदेशी रनर्स ने भी इसमें भाग लेने की इच्छा जताई है. 75 किलोमीटर की चुनौती, 4500 मीटर की ऊंचाईयह अल्ट्रा मैराथन रिमखिम से मलारी और उससे आगे तक आयोजित की जाएगी. कुल मिलाकर प्रतिभागियों को लगभग 75 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी.

चुनौतीपूर्ण दौड़: ऊंचाई 4000 से 4500 मीटर के बीच होने के कारण यह दौड़ शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण होगी. ऑक्सीजन की कमी, कठिन भूगोल और बदलता मौसम इसे सामान्य मैराथन से अलग और विशेष बनाते हैं.

पर्यटन विभाग का मानना है कि यदि इस आयोजन में विदेशी प्रतिभागियों की संख्या अधिक रहती है, तो नीती घाटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी. विभाग की रणनीति स्पष्ट है कि खेल और साहसिक गतिविधियों के जरिए सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करना.

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भारत सरकार सीमावर्ती गांवों को पुनर्जीवित करने का प्रयास. (Uttarakhand Tourism Department)

विदेशी प्रतिभागियों के लिए नियमों में शिथिलता की मांग: विदेशी पर्यटकों की भागीदारी बढ़ाने के रास्ते में कुछ कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें भी हैं. नीती घाटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक है, इसलिए यहां आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य है.

मौजूदा नियमों के तहत परमिट प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो सकती है. इसी स्थिति को देखते हुए पर्यटन विभाग केंद्र सरकार से विशेष अनुरोध करने जा रहा है. प्रस्ताव है कि जिस तरह पर्वतारोहियों को सीमित अवधि के लिए इनर लाइन परमिट जारी किए जाते हैं, उसी प्रकार अल्ट्रा मैराथन में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिभागियों के लिए भी एक सप्ताह की विशेष अनुमति में शिथिलता दी जाए. यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो विदेशी रनर्स के लिए भागीदारी आसान हो जाएगी और आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिलेगा.

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लगभग 4000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर फैली है नीती घाटी. (Uttarakhand Tourism Department)

सेना और ITBP का सहयोग: पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार आयोजन को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए भारत तिब्बत सीमा पुलिस और भारतीय सेना का सहयोग लिया जा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रशासनिक स्तर पर मेडिकल सपोर्ट, रेस्क्यू टीम और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है.

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अल्ट्रा मैराथन से वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर चमकेगी नीती घाटी (Uttarakhand Tourism Department)

साहसिक खेलों से जुड़े मंजुल रावत का मानना है कि उत्तराखंड में अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजनों की निरंतरता प्रदेश की पर्यटन इंडस्ट्री को नई ऊर्जा दे सकती है. उनके अनुसार राज्य में कई ऐसी घाटियां हैं, जो अभी तक पर्यटन की मुख्यधारा से दूर हैं. यदि वहां इस तरह के आयोजन किए जाएं, तो वे क्षेत्र भी नई पहचान प्राप्त कर सकते हैं.

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नीती घाटी की सुंदरता (Uttarakhand Tourism Department)

पलायन की चुनौती और रिवर्स माइग्रेशन की उम्मीद: नीती घाटी की एक बड़ी समस्या पलायन है. सीमांत गांवों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और सुविधाओं के अभाव में मैदानी क्षेत्रों की ओर जा चुके हैं. ऐसे में आयोजन के दौरान प्रतिभागियों और पर्यटकों के लिए ठहरने और भोजन की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग स्थानीय लोगों से रिवर्स माइग्रेशन का आह्वान कर रहा है.

विभाग का प्रयास है कि आयोजन के दौरान स्थानीय परिवार अपने गांव लौटें और होमस्टे, भोजनालय तथा अन्य सेवाओं के जरिए आय अर्जित करें. इससे न केवल आयोजन सफल होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा.

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नीती घाटी को पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन के रूप में देखा जा रहा है. (Uttarakhand Tourism Department)

वाइब्रेंट विलेज योजना को मिलेगा बल: भारत सरकार सीमावर्ती गांवों को पुनर्जीवित करने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम चला रही है. इस योजना के तहत खाली हो रहे गांवों में आधारभूत सुविधाएं विकसित कर उन्हें फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है. नीती घाटी में अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजन इस योजना को भी मजबूती देंगे, क्योंकि इससे सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों का पलायन रुक सकता है.

पर्यटन और सामरिक संतुलन: नीती घाटी का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है. ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देते समय सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता. यही कारण है कि आयोजन को लेकर प्रशासन, सेना और सीमा सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है.

यदि यह अल्ट्रा मैराथन सफल रहती है, तो नीती घाटी को एक ग्लोबल एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह पहला बड़ा कदम होगा. खेल, प्रकृति और स्थानीय संस्कृति के संगम के जरिए इस क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है.

नई पहचान की ओर सीमांत घाटी: नीती घाटी अब सीमाओं के साए से निकलकर संभावनाओं की नई रोशनी में कदम रख रही है. 31 मई को होने वाली अल्ट्रा मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल है. यदि केंद्र से नियमों में शिथिलता मिलती है और स्थानीय समुदाय का सहयोग प्राप्त होता है, तो यह घाटी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के साहसिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है.

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Last Updated : February 27, 2026 at 3:11 PM IST