'सिंबल पता नहीं लेकिन एक लाख वोट पड़ गए', प्रशांत किशोर ने जताई गड़बड़ी की आशंका
प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव परिणाम को लेकर 'गड़बड़ी' की आशंका जताई है. उन्होंने मधुबनी सीट का उदाहरण देते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं. पढ़ें..

Published : November 18, 2025 at 2:47 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद आज प्रशांत किशोर मीडिया के सामने आए. उन्होंने साफ कर दिया कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और अगले 5 वर्षों तक जनहित के मुद्दों को लेकर लोगों के बीच रहेंगे. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने अपनी हार और एनडीए की जीत की कई वजहें बताईं. पीके ने इस दौरान मधुबनी सीट का उदाहरण देते हुए गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए पूछा कि लोगों को जिस पार्टी का चुनाव चिह्न तक नहीं पता, उसे एक लाख से अधिक वोट कैसे मिल गए?
मधुबनी सीट का दिया हवाला: प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं आपको एक उदाहरण देता है. मधुबनी विधानसभा क्षेत्र है. जहां से उपेंद्र कुशवाहा जी की पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं. मैं दावा कर रहा हूं आज हो 5 महीने बाद हो, आप मधुबनी विधानसभा क्षेत्र जाइये. वहां पर एनडीए के प्रत्याशी को 1 लाख से ज्यादा वोट आया है. एनडीए को वोट मिला, 10 हजार रुपये के लिए मिला है, नहीं मिला है, छोड़िये. हम इस बात से दंग हैं कि मधुबनी में कितने लोग ऐसे हैं वोटर जोकि उपेंद्र कुशवाहा जी की पार्टी के सिंबल को जानते हैं?
सिंबल नहीं पता तो वोट कैसे?: उन्होंने कहा कि वोट तो उनकी (उपेंद्र कुशवाहा) पार्टी के सिंबल पर पड़ा है ना, अलायंस का कोई सिंबल नहीं होता है. आखिर रातों-रात पूरे मधुबनी क्षेत्र में, क्या हुआ मैं नहीं कह रहा हूं. मैं आपको और आपके जरिए पूरे देश को बताना चाहता हूं कि आप सैंपल के तौर पर कोई 5 कांस्टीट्यूएंसी उठा लीजिए और जहां पर भाजपा और जदयू के उम्मीदवार नहीं लड़ रहे थे. वो दल लड़ रहे थे, जिनका कोई सिंबल भी नहीं जानता, नाम भी नहीं जानता. उसको एक लाख-सवा लाख वोट कैसे आया?
कैसे आए इतने वोट?: प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके पास कोई प्रमाण नहीं है कि वो वोट कैसे आए? लेकिन राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में जुड़े होने के नाते ये आश्चर्य का विषय है कि जिस मधुबनी क्षेत्र में लोग ये नहीं जानते हैं कि कौन सा पार्टी लड़ रही है, कौन सा प्रत्याशी लड़ रहा है. उस पार्टी का सिंबल क्या है, उसको सवा लाख वोट आया है और जो लोग वहां जीवनभर राजनीति कर रहे हैं, उनको वोट नहीं आया है. संभव है कि उनको उतना समर्थन है.

एक लाख वोट लाना साधारण बात नहीं: मेरा आपसे अनुरोध है कि मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं लेकिन मधुबनी जैसी 5 सीटों का हवाला देना चाहता हूं, जहां पर चुनाव के 12-15 दिन पहले तय हुआ कि कौन पार्टी चुनाव लड़ेगी. उस पार्टी का नाम कोई नहीं जानता है, उसका सिंबल कोई नहीं जानता है और एक लाख 20 हजार वोट किसी विधानसभा में आ रहा है तो इसका मतलब है कि हर घर से 2 से 3 वोट आया है. आपको आंधी दिखनी चाहिए वहां पर. विधानसभा स्तर पर एक लाख 20 हजार वोट लाना साधारण बात नहीं है.
10 हजार का कमाल या कुछ और?: प्रशांत किशोर ने कहा कि एक लाख 20 हजार वोट कैसे आया है? इसकी दो ही वजह हो सकती है. या तो 60 हजार लोगों को आपने 10-10 हजार रुपये दिया और उनलोगों ने ये जिम्मेवारी ली कि हमको 10 हजार रुपये मिला है. हम हैं और अपने घर के लोगों को वोट दिलवाऊंगा या दिलवाऊंगी. या फिर कोई ऐसी बात है, अदृश्य शक्ति है जो हमारे समझ से बाहर है कि कैसे ये संभव है?
30% लोग नहीं जानते सिंबल: प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वहां वोट कैसे पड़ा. मैं आपको खुली चुनौती दे रहा हूं कि वहां चलिए मधुबनी. मैं तीन दिन से प्रेस इसलिए नहीं कर रहा हूं, क्योंकि मैंने अपने लोगों को वहां भेजा है. मधुबनी में मैंने कहा कि पूछो तो कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल क्या है. 30 प्रतिशत लोगों को नहीं पता कि उनका सिंबल क्या है और उनको एक लाख से ज्यादा वोट आया है.

ये कौन सी विधा है?: पीके ने कहा कि मुझे उपेंद्र कुशवाहा जी से कोई लड़ाई नहीं है, उनके प्रत्याशी से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि मेरा सिर्फ ये कहना है कि ऐसी कौन सी विधा है कि हमलोग 3-3 तीन एक विधानसभा में घूम रहे हैं और लोगों को ये नहीं मालूम है कि जन सुराज का चुनाव चिह्न क्या है लेकिन ये लोग चुनाव से 10 दिन पहले आए, उस पार्टी का नाम मधुबनी शहर में लोग नहीं जानते हैं, उस पार्टी का सिंबल घर-घर पहुंच गया और उसको एक लाख 20 हजार लोगों ने वोट दे दिया. ऐसे में ये वाकई बहुत बड़ी विधा है.
"हमने ईमानदार प्रयास किया है और उसमें बिल्कुल सफलता नहीं मिली. इसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है. व्यवस्था परिवर्तन की बात छोड़िए, हम सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके लेकिन बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका जरूर बनी है. मैं मधुबनी विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देना चाहता हूं, जहां लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल तक नहीं पता. उसके बावजूद एक लाख से अधिक वोट मिल गए. आखिर ये कौन सी विधा है?"- प्रशांत किशोर, सूत्रधार, जन सुराज पार्टी

कौन-कौन थे उम्मीदवार?: मधुबनी विधानसभा सीट से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कैंडिडेट माधव आनंद को जीत मिली है. उन्होंने आरजेडी के समीर कुमार महासेठ को 20552 मतों से शिकस्त दी है. माधव को 97,956 और समीर को 77404 वोट मिले हैं. एआईएमआईएम के राशिद खलील को 12971 और जन सुराज पार्टी के अनिल कुमार मिश्र को 8453 मत हासिल हुए हैं.
जन सुराज की करारी हार: जन सुराज पार्टी के 238 उम्मीदवार मैदान में थे. जिनमें से 236 की जमानत जब्त हो गई. पार्टी को महज 3.5 फीसदी वोट मिले. वहीं 35 सीटों पर जीतने और हारने वाले कैंडिडेट के मार्जिन के बराबर जन सुराज के प्रत्याशियों को मत हासिल हुए.
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