प्रियंका गांधी से गुपचुप मुलाकात और प्रशांत किशोर का नया मिशन, जानें इनसाइड स्टोरी
चुनाव बीतने के एक महीने बाद प्रियंका गांधी से पीके का मिलना कोई छोटी-मोटी बात नहीं. इसके मकसद और सीक्रेट रखने पर हलचल तेज है.

Published : December 20, 2025 at 7:15 PM IST
रिपोर्ट: रंजीत कुमार
पटना: जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर की राजनीति अन्य नेताओं से अलग मानी जाती है. वह घिसी पिटी राजनीति करने से बचते हैं और उनके एक्शन में हमेशा कुछ नयापन देखने को मिलता है. ऐसे में पीके का कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मिलना कोई सामान्य घटना नहीं मानी जा रही है. हालांकि इस मुलाकात को लेकर अबतक कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष ने दोनों नेताओं के बीच मीटिंग होने की बात को स्वीकार किया है.
सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीके बिहार में कांग्रेस के साथ किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं या बंगाल समेत दूसरे राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की मदद कर सकते हैं? गुपचुप तरीके से की गई इस मुलाकात को लेकर सवालों की फेहरिस्त काफी लंबी है.
प्रशांत किशोर के सवाल पर प्रियंका गांधी ने क्या कहा? : संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होने जब प्रियंका गांधी पहुंची तो उनसे प्रशांत किशोर से मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया. इस सवाल पर प्रियंका गांधी ने कहा कि, ''यह भी कोई सवाल है? आप यह क्यों नहीं पूछते कि सरकार सदन की कार्यवाही चलने क्यों नहीं दे रही, बार-बार कार्यवाही बाधित क्यों कर रही है?"
प्रियंका से ही क्यों मिले PK?: सवाल ये भी उठ रहे हैं कि पीके ने आखिर प्रियंका गांधी से ही मुलाकात क्यों की? दरअसल प्रशांत किशोर कई बार कह चुके हैं कि प्रियंका गांधी प्रतिभाशाली हैं. बात करने के लिए कांग्रेस में तीन बड़े नेता हैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी. सोनिया गांधी अब पार्टी में मेंटोर की भूमिका में हैं. राहुल गांधी के मुकाबले प्रियंका गांधी के साथ पीके अधिक सहज हैं.
इंडिया ब्लॉक के नेताओं PK की मुलाकात: प्रशांत किशोर की मुलाकात कांग्रेस नेत्री प्रियंका के साथ हुई है, इसके अलावा ममता बनर्जी से भी उनके राजनीतिक रिश्ते हैं और ममता बनर्जी से भी प्रशांत किशोर की मुलाकात हुई है. प्रशांत किशोर इंडिया ब्लॉक के नेताओं से लगातार मिल रहे हैं और भविष्य की सियासत को लेकर मंथन कर रहे हैं.

क्या कांग्रेस खोलेगी PK के लिए पार्टी का दरवाजा?: जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान कहा कि प्रशांत किशोर ने प्रियंका गांधी या ममता बनर्जी से मुलाकात की है, उसके राजनीतिक निहितार्थ यही है कि हम भाजपा के खिलाफ लड़ाई को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं.
"जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हालात उत्पन्न किये थे, वैसे हालात दूसरे राज्यों में ना हो इसके लिए हमारे नेता प्रशांत किशोर, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी या फिर दूसरे राज्यों में नेताओं से मिल रहे हैं."- मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष, जन सुराज पार्टी
किसी बड़े प्रोजेक्ट पर कर रहे काम?: बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति भी बहुत खराब रही 19 सीट से सीधे 6 सीट पर आ गई. ऐसे में कयास लग रहे हैं कि कांग्रेस और पीके किसी बड़े रणनीति को तैयार करने में लगे हैं, जिसका आगे खुलासा किया जा सकता है.पीके की कंपनी राजनीतिक दलों को सेवाएं देती है और उसमें काफी सफल रही है. उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी और अखिलेश यादव साथ आकर भी कुछ नहीं पाए. वहीं बिहार में पीके सफल नहीं हुए. ऐसे में प्रियंका और प्रशांत की बैठक के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं.

2022 में कांग्रेस से नजदीकी : दरअसल पीके ने 2021 में पंजा को फिर से संगठित करने का प्रस्ताव पेश किया था. इस दौरान प्रशांत किशोर और कांग्रेस नेताओं के बीच मुलाकात का सिलसिला भी जारी था. 2022 अप्रैल में पीके ने सोनिया गांधी के सामने इस प्लान का खाका रखा था. इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे.
फिर हुआ मनमुटाव: मीटिंग के बाद सोनिया गांधी ने पैनल गठित करने का निर्णय लिया था. उस समय प्रशांत किशोर भी कांग्रेस का हिस्सा बनना चाहते थे. हालांकि, बाद में इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था, जिसके बाद कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच मनमुटाव की खबरें सामने आने लगी थीं.
जन सुराज का स्टैंड क्लियर नहीं: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 243 सीटों में से पीके ने 238 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा. अब पीके दूसरे राज्यों के चुनाव पर फोकस कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल राज्य में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है और राजनीतिक दल तैयारी में जुट गए हैं. प्रशांत किशोर भी दूसरे राज्यों में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं. फिलहाल जन सुराज पार्टी ने स्टैंड क्लियर नहीं किया है.
किसी भी दल से गठबंधन का निर्णय नहीं: आपको बता दें कि अब तक प्रशांत किशोर की रणनीति सिर्फ बिहार में सियासत को धरातल पर लाने की है. प्रशांत किशोर एकला चलो की राह पर हैं और अब तक उन्होंने किसी भी दल से गठबंधन करने का निर्णय नहीं लिया है.

क्या बिहार से बाहर होगा पार्टी का विस्तार?: जनसुराज पार्टी के अंदर इस बात को लेकर विमर्श चल रहा है कि क्या पार्टी का विस्तार दूसरे राज्यों में किया जाए. 15 जनवरी के पहले पार्टी के स्तर पर या फैसला ले लिया जाएगा कि क्या पार्टी को बिहार के बाहर भी विस्तार करना चाहिए.
खरमास बाद अभियान की शुरुआत: फिलहाल प्रशांत किशोर पटना पहुंच चुके हैं और नेताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. मिल रही जानकारी के मुताबिक प्रशांत किशोर की सक्रियता एक बार फिर बढ़ाने वाली है.
चुनाव के नतीजे के बाद प्रशांत ने एक ब्रेक लिया था और वह ब्रेक के बाद वापस लौट चुके हैं, आगामी 15 जनवरी के बाद प्रशांत किशोर फिर से पदयात्रा पर निकलने की तैयारी कर रहे हैं और हर प्रखंड में प्रशांत किशोर पहुंचने के लिए तैयार हैं.

बिहार के बाहर चुनाव लड़ने को लेकर मंथन: ईटीवी भारत से खास बातचीत के दौरान जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने भावी रणनीतियों को साझा किया. दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर मनोज भारती ने कहा कि हमारी प्राथमिकता बिहार थी और हम बिहार के लोगों को यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि बिहार में बदलाव क्यों जरूरी है.
समय आने पर होगा फैसला: उन्होंने कहा कि हमने बिहार को ही अपना मिशन बनाया है. अभी हमारी योजना बिहार से बाहर चुनाव लड़ने की नहीं है और कोई जल्दबाजी में भी हम नहीं है. लेकिन कुछ राज्यों से यह मांग जरूर उठ रही है,कि जनसुराज ने जो कुछ बिहार में किया वह दूसरे राज्यों में भी किया जाना चाहिए. समय आने पर हम बिहार से बाहर भी विस्तार करेंगे.
बिहार में हार का कारण: मनोज भारती ने कहा कि हमने इस बात का मंथन भी किया है कि पार्टी की निराशाजनक प्रदर्शन किस वजह से हुई. हमने अपने उम्मीदवार लेट से घोषित किये, ढाई महीने पहले अगर उम्मीदवार घोषित हुए होते तो स्थिति अलग होती थी. पंचायत स्तर पर हमारे संगठन नहीं बन पाए थे. प्रखंड स्तर पर तो हमारा संगठन तैयार था.

"जनता में यह भ्रम फैलाया गया कि आपने अगर आपने अगर दूसरे किसी को वोट दिया तो फिर से जंगलराज आ जाएगा. जनता के अंदर एक डर बैठ गया कि दूसरे किसी दल को वोट देने से राष्ट्रीय जनता दल की वापसी हो सकती है. इसका नुकसान भी जन सुराज पार्टी को हुआ. जनता को जन सुराज पर भरोसा होना चाहिए था लेकिन उन्होंने भरोसा नहीं किया."- मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष, जन सुराज पार्टी
दस हजार देने के मामले पर कोर्ट जाने की तैयारी: सरकार ने जिस तरीके से अंतिम समय में लोगों के अकाउंट में दस-दस हजार रुपया डालने का काम किया, वह पूरे तौर पर अनैतिक है. सरकार ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था. चुनाव आयोग भी इस मसले पर मौन रही.
"आचार संहिता उल्लंघन को लेकर हम कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं. हमारे लोग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने जा रहे हैं और इसकी तैयारी भी हो चुकी है."-मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष, जन सुराज पार्टी

बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2025: पीके की लाख कोशिशों के बावजूद बिहार की जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया. एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली. महागठबंधन के खाते में 35 सीटें गईं और जन सुराज एक भी सीट नहीं निकाल सकी थी. वहीं अन्य के खाते में 6 सीट गई. बिहार में बहुमत का आंकड़ा 122 है.
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