हवा में उगते आलू, बिना मिट्टी के 10 गुना ज्यादा हो रहा प्रोडक्शन, करनाल में आई नई क्रांति
हरियाणा के करनाल में एरोपोनिक्स तकनीक से बिना मिट्टी के आलू उगाए जा रहे हैं. इससे आलू का उत्पादन 10 गुना बढ़ जाता है.

Published : December 18, 2025 at 7:04 PM IST
करनाल : हरियाणा के करनाल जिले के गांव शामगढ़ में आलू प्रौद्योगिकी संस्थान आलू की खेती में एक नई क्रांति ला रहा है क्योंकि संस्थान ने यहां पर उत्तर भारत की सबसे पहली एरोपोनिक आलू प्रयोगशाला स्थापित की है, जिसके अब अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं. करीब 4 साल पहले इसकी शुरुआत हुई थी.
बिना मिट्टी के उगाए जा रहे आलू : आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ के इंचार्ज डॉ. मनोज भानुकर ने बताया कि एरोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल यहां पर कई साल पहले शुरू किया गया था. इस तकनीक में बिना मिट्टी के आलू की खेती की जा रही है. अक्सर हम देखते हैं कि खेत में ही आलू की खेती की जाती है, लेकिन यहां पर हवा में आलू की खेती हो रही है. यहां फसल को पानी भी डायरेक्ट नहीं दिया जाता बल्कि वाष्प के जरिए पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे कम समय में पौधों की अच्छी खासी ग्रोथ होती है.
आलू की तीन वैरायटी से की थी शुरुआत : उन्होंने बताया कि जब संस्थान ने इस तकनीक को यहां पर लगाया था, उस समय केवल दो से तीन वैरायटी पर ही यहां पर परीक्षण शुरू किया गया था. लेकिन इस तकनीक के काफी अच्छे परिणाम रहे हैं जिसके चलते यहां पर आज करीब आलू की सात वैरायटी पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य है कि जो आलू लगाने वाले किसान हैं, उनको अच्छी गुणवत्ता का बीज तैयार करके दिया जाए, ताकि वे आगे इससे फसल लेकर खुद कभी भी तैयार करें और आर्थिक तौर पर मजबूत हों.

नई वैरायटी पर भी हो रहा काम : आलू प्रौद्योगिकी संस्थान शामगढ़ करनाल में एरोपोनिक तकनीक से कई उन्नत और प्रोसेसिंग किस्म जैसे कुफरी चिप सोना-1, कुफरी फ्राई सोना पर काम हो रहा है. यहां पर कुफरी हिमालिनी, कुफरी उदय, कुफरी पुष्कर जैसी नई किस्मों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. वहीं कुफरी उदय जैसी वैरायटी भी शामिल की गई है.

आलू के मिनी ट्यूबर किए जा रहे तैयार : आलू की सामान्य खेती के दौरान जहां किसान मिट्टी में या अपने खेत में आलू की खेती करने के दौरान उसके बीज और अन्य प्रयोग के लिए काफी बड़े साइज के आलू तैयार करते हैं, वहीं इस तकनीक में उसका बिल्कुल उल्टा है. यहां पर आलू बीज के मिनी ट्यूबर तैयार किए जाते हैं, जिनका साइज बिल्कुल छोटा होता है और ये खेती के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं.

उच्च गुणवत्ता का बीज होता है तैयार : उन्होंने बताया कि इस तकनीक से उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार किया जाता है, जिसको मिनी ट्यूबर कहा जाता है. संस्थान ने जब से इस तकनीक को अपनाया है, तब से अब तक इसमें किसी भी प्रकार की फंगस या बीमारी नहीं देखी गई है जो संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि रही है. यहां पर बीमारियों से मुक्त बीज किसानों को दिए जा रहे हैं जिससे किसानों की आय बढ़ रही है.

बहुत कम दाम में किसानों को मिल रहा बीज : यहां पर जितने भी वैरायटी के बीज तैयार किए जाते हैं, वे किसानों को दिए जाते हैं, जिससे उनको बहुत फायदा हो रहा है. चार रुपए प्रति किलो के हिसाब से किसान को बीज दिया जा रहा है. किसान उसके बाद इसको ले जाकर खुद का बीज तैयार करके 35 से 40 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं जिससे किसानों की आय बढ़ रही है.

10 % से ज्यादा प्रोडक्शन होता है : उन्होंने बताया कि इस तकनीक से 10% से ज्यादा प्रोडक्शन भी होता है. जहां एक पौधे पर बहुत कम आलू लगते हैं, वहीं इस तकनीक से एक पौधे पर 35 मिनी ट्यूबर तक लिए जा रहे हैं. इसलिए प्रोडक्शन के लिहाज से ये काफी अच्छा है.

लाखों किसानों को हो रहा फायदा : उन्होंने कहा कि संस्थान आलू लगाने वाले किसानों के लिए एक क्रांति लेकर आया है, क्योंकि इस तकनीक ने आलू की खेती के मायने बदल दिए हैं जिसमें बहुत ही ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. यहां पर हरियाणा का लगभग हर किसान आलू का बीज लेने के लिए आता है. अगर आंकड़े की बात करें हरियाणा सहित पूरे हरियाणा के लाखों किसान इस तकनीक से फायदा ले रहे हैं और लाखों रुपए कमा रहे हैं.

किसान अपने खेत में लगा सकते हैं एरोपोनिक्स तकनीक : उन्होंने बताया कि पहले संस्थान के द्वारा ये तकनीक एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर लगाई गई थी जो पूरे तरीके से सफल रही और अब आलू की खेती में नई क्रांति आई है. अब हरियाणा सरकार कृषि विभाग के साथ मिलकर इस तकनीक को किसानों तक पहुंचा रहा है. अगर कोई किसान इस तकनीक को लगाना चाहे तो उस पर संस्थान अनुदान भी दे रहा है. किसान इस तकनीक से अच्छी गुणवत्ता के बीज भी तैयार कर सकते हैं.


हरियाणा समेत देश की ताजा ख़बरें पढ़ने के लिए ईटीवी भारत ऐप डाउनलोड करें. यहां आपको मिलेंगी तमाम बड़ी ख़बरें, हर बड़ा अपडेट, वो भी सबसे सटीक और डिटेल एनालिसिस के साथ - Download App
ये भी पढ़ें : हिसार के भाईयों का कमाल, कश्मीर की केसर कमरे में उगाकर हो गए मालामाल
ये भी पढ़ें : मुनाफे का "मोती", नौकरी छोड़ घर में शुरू की खेती, करोड़ों रुपए की कमाई, हैदराबाद से विदेश तक सप्लाई
ये भी पढ़ें : 90 लाख की सैलरी छोड़ी, आज करोड़ों में खेल रहा हरियाणा का "लाल", माइक्रोग्रीन्स के स्टार्टअप से कर डाला कमाल
ये भी पढ़ें : मधुमक्खी के ज़हर से बन सकते हैं करोड़पति!, रातों-रात आप ऐसे हो जाएंगे मालामाल

