नोएडा के नमन ने कर दिखाया कमाल, सिगरेट के कचरे से बना रहे कुशन-ऊन, कमा रहे मोटी कमाई
नोएडा के युवा उद्यमी नमन गुप्ता सिगरेट के कचरे (बट्स) को रिसाइकिल कर टेडी बियरकुशन और ऊन जैसे इको फ्रेंडली उत्पाद बनाकर दे रहे रोजगार.

Published : March 1, 2026 at 8:02 PM IST
संजीव उपाध्याय की रिपोर्ट
नई दिल्ली/नोएडा : कचरा भी सोना बन सकता है, बशर्ते उसे देखने वाले की नज़र पारखी हो, जी हां नोएडा के एक युवा उद्यमी नमन गुप्ता ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. नमन ने सिगरेट के कचरे (बट्स) से होने वाले नुकसान का आकलन कर उसका कायाकल्प ही कर दिया. नमन गुप्ता ने सिगरेट के कचरे (butts) को रिसाइकिल कर टेडी बियरकुशन और ऊन जैसे उत्पाद बनाकर एक अपना 'साम्राज्य' Code Effort Pvt Ltd खड़ा किया है. जहां हर रोज सिगरेट बट्स को पुनर्चक्रित कर स्टार्टअप क् जरिए जहरीले कचरे को उपयोगी सामान में बदलता है. जिससे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है. नमन गुप्ता ने अपने काम को लेकर ईटीवी भारत से ख़ास बातचीत की.
नमन ने बनाया बिजनेस मॉडल
नमन गुप्ता ने अपने भाई के साथ मिलकर 2018 में 'कोड एफर्ट प्राइवेट लिमिटेड' (Code Effort) की स्थापना की जो सिगरेट के टुकड़ों से हानिकारक रसायनों को हटाकर उन्हें रिसाइकिल करती है.इसके जरिए ना केवल प्रदूषण कम कर रहे हैं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
रिसाइकिलिंग प्रक्रिया से शुरू होता है प्रोसेस
सिगरेट के फिल्टर से फाइबर को अलग किया जाता है.जिसे 24 घंटे की प्रक्रिया के बाद सुरक्षित सामग्री में बदल दिया जाता है. नमन गुप्ता बताते है कि उनकी कंपनी सिगरेट के कागज, तंबाकू और रेशे (फाइबर) को पूरी तरह रीसायकल करती है.

रिसाइकिलिंग प्रक्रिया के बाद उत्पाद होता है तैयार
इस सिगरेट के कचरे से कपड़ा और कागज, बच्चों के खिलौने और आरामदायक कुशन बनाए जाते हैं. जिनकी मार्केट में काफी डिमांड में है. इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल गिफ्ट आइटम्स भी बनाये जाते है. रिसाइकिल किए गए फाइबर से टेडी बियर कुशन स्टेशनरी पेपर और ऊन (yarn) जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं .

नमन गुप्ता के काम से कई महिलाएं हुई आत्म निर्भर
नोएडा के युवा उद्यमी नमन गुप्ता ने अपनी कंपनी 'कोड एफर्ट' (Code Effort) के जरिए ना केवल कचरे से उपयोगी सामान बना रहे हैं बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.यही नहीं ये हजारों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.नमन की कंपनी ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देती है जो इन सॉफ्ट टॉयज को बनाने का काम करती हैं.

नमन की पहल प्रदूषण कम करने के साथ सस्टेनेबल बिजनेस भी
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चिंताजनक स्थिति से सभी वाकिफ है. ऐसे में दिल्ली एनसीआर में रहनेवाले हर शख्स का प्रयास इस प्रदूषण को कम करने के लिए बहुत जरूरी है. नमन का यह काम अब जहां 100 करोड़ रुपये के व्यापार के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है.नमन गुप्ता ने (waste to wealth) का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है जिससे ना केवल प्रदूषण कम हो रहा है बल्कि एक सफल सस्टेनेबल बिजनेस भी है.

रोजाना 1.5 से 2 टन सिगरेट बट्स की प्रोसेसिंग
अपने सफर की शुरुआत के बारे में बताते हुए कहते है कि इसकी शुरुआत: 2018 में हुई उस समय मै बीकॉम की पढ़ाई करता उसी दौरान सिगरेट के बट्स देख इस रिसाईकिल का आइडिया आया और 10-12 लाख रुपये के निवेश से काम शुरू किया. आज भारत के 250 जिलों में कलेक्शन सेंटर हैं और रोजाना 1.5 से 2 टन सिगरेट बट्स की प्रोसेसिंग नोएडा में हो रही है. 2030 तक इसे बढ़ाकर 10 टन प्रतिदिन करने का लक्ष्य है.

रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी दुनिया के 5 अन्य देशों को भी प्रदान किया
नमन यह काम अकेले नहीं कर रहे हैं, उनके साथ उनके भाई विपुल गुप्ता और 2500 से ज्यादा लोग जुड़े हैं. यह तकनीक केवल भारत तक सीमित नहीं है. नमन ने अपनी रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी दुनिया के 5 अन्य देशों को भी प्रदान की है, जो भारत के लिए गर्व की बात है.

सिगरेट को लेकर नमन का साफ संदेश
नमन का संदेश साफ है, सिगरेट छोड़ दें तो सबसे बेहतर, लेकिन अगर पीते हैं तो उसका कचरा पर्यावरण में न फेकें सरकार नीतियां बना सकती है, जुर्माना लगा सकती है, लेकिन असली बदलाव नागरिक व्यवहार से आएगा.


