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मोदी का 9 साल में दूसरा इजरायल दौरा; रक्षा से लेकर इन मुद्दों पर रहेगी दुनिया की नजर

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू मोदी के दौरे से काफी खुश हैं. पीएम मोदी ने भी अपनी यात्रा को लेकर उत्साह जताया है.

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इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात का फाइल फोटो. (Photo Credit; Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 24, 2026 at 11:46 AM IST

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Updated : February 24, 2026 at 3:22 PM IST

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हैदराबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 25 फरवरी 2026 को 2 दिन के लिए यहूदी राष्ट्र इजरायल जा रहे हैं. मोदी की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि दोनों पीएम की मुलाकात के दौरान कई बड़े समझौते हो सकते हैं.

दोनों देशों की ओर से आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यापक भू-राजनीतिक समन्वय पर भी विचार-विमर्श की उम्मीद है. इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू मोदी के दौरे से काफी खुश हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके भारत की जमकर तारीफ की. साथ ही पीएम मोदी को अपना करीबी दोस्त बताया. पीएम मोदी ने भी अपनी यात्रा को लेकर उत्साह जताया है. आईए जानते हैं क्या हैं इस दौरे के मायने? क्या-क्या समझौते हो सकते हैं?

मोदी, भारत के पहले पीएम जो इजरायल का कर रहे दौरा: पीएम नरेंद्र मोदी का यह इजरायल का दूसरा दौरा है. इससे पहले मोदी जुलाई 2017 में इजरायल गए थे. मोदी, भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जो इजरायल गए. अब 9 साल बाद एक बार फिर से जा रहे हैं. पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत की इजरायल के साथ नजदीकियां काफी बढ़ी हैं. समय-समय पर इजरायल के नेता और अधिकारी भारत आते रहे हैं.

भारत के कई विदेश मंत्री कर चुके हैं इजरायल का दौरा: भारत के अधिकारी भी इजरायल का दौरा करते हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में लालकृष्ण आडवाणी ने गृह मंत्री के रूप में इजरायल की यात्रा की थी. जसवंत सिंह और एसएम कृष्णा भी विदेश मंत्रियों के रूप में इजरायल की यात्रा कर चुके हैं. राजनाथ सिंह भी वहां जा चुके हैं.

2003 में भारत आए थे इजरायली पीएम एरियल शेरोन: भारत ने 1992 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थपित किये थे. लेकिन, इस दौरान किसी भारतीय प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ने इजरायल का दौरा नहीं किया. साल 2003 में इजरायली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन भारत की यात्रा पर आने वाले पहले प्रधानमंत्री थे. उन्हें द्विपक्षीय संबंधों को रक्षा और व्यापार सहयोग से आज के रणनीतिक संबंधों तक विस्तार देने का श्रेय दिया जाता है.

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रक्षा और सामरिक साझेदारी पर हो सकती है चर्चा: दोनों देशों के बीच चर्चा में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने की संभावना है. दरअसल, इजरायल भारत को सैन्य उपकरण और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में से एक है. दोनों देशों ने कई रक्षा प्रणालियों पर मिलकर काम किया है.

इस मीटिंग में बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली, निर्देशित ऊर्जा लेजर हथियार, लंबी दूरी की स्टैंड-ऑफ मिसाइलें और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा किए जाने की उम्मीद है. ये योजनाएं भारत के घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों और इजरायल की सैन्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता के अनुरूप हैं. भारत-इजराइल के बीच हथियारों, नई रक्षा तकनीकों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर समझौता होने की संभावना है.

इजरायल का डिफेंस सिस्टम काफी मजबूत: भारत, इजरायल के साथ मिलकर बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, जो मिशन सुदर्शन का मुख्य आधार है. मिशन सुदर्शन भारत को दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से सुरक्षित रखने का एक अहम हथियार है. मिशन सुदर्शन भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का केंद्रबिंदु है.

इजरायल लंबी दूरी की एरो, मध्यम दूरी की डेविड्स स्लिंग और छोटी दूरी की आयरन डोम प्रणाली के साथ बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली के क्षेत्र में सबसे आगे है. उसके पास एक मजबूत डिफेंस सिस्टम है, जिसने पिछले जून में ईरान द्वारा दागी गई 98 प्रतिशत बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया था. इस लिहाज से भारत, इजरायल के साथ रक्षा सहयोग के तहत समझौता करना चाहता है.

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क्या है नेतन्याहू का हेक्सागन एलायंस, इसमें भारत क्यों शामिल हो रहा: इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने हाल ही में हेक्सागन एलायंस की घोषणा की है, जिसमें भारत के साथ अरब, अफ्रीकी, ग्रीस, साइप्रस और एशियाई देश भी शामिल होंगे. इसका उद्देश्य केवल पैसों या बिजनेस का मेल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ग्रुप होगा जो कट्टरपंथी ताकतों (Radical Axes) के खिलाफ एकजुट रहेगा.

यह विजन भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) जैसा ही है, जो कनेक्टिविटी और डेवलपमेंट को बढ़ावा देता है. नेतन्याहू ने इसे दुनिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है. माना जा रहा है कि यह गठबंधन इस्लामिक कट्टरवाद का मुकाबला करेगा.

IMEC पर भी चर्चा की उम्मीद: प्रधानमंत्री मोदी इजरायली पीएम नेतन्याहू के साथ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पर भी चर्चा कर सकते हैं. इस कॉरिडोर के लिए भारत का प्रयास उसकी कनेक्टिविटी संबंधी जरूरत को माना जा रहा है. दरअसल, भारत इसके जरिए खाड़ी देशों के रास्ते यूरोप से जुड़ने का रास्ता निकालना चाहता है. इससे न सिर्फ माल ढुलाई लागत में कमी आएगी, बल्कि समय भी बचेगा. यह कॉरिडोर लंबे समय से लंबित पड़ा है.

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भारत और इजरायल में क्यों बढ़ रहीं नजदीकियां: भारत और इजरायल दोनों ही पड़ोसी देशों के आतंकवाद से पीड़ित हैं. यही सबसे बड़ा कारण है कि दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसके अलावा कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है.

भारत ने कई अहम मौकों पर इजरायल का खुलकर साथ दिया है. खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ होने वाले मतदान में भारत ने तटस्थ रुख अपनाकर उसको राहत दी थी. इसके अलावा मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती ने भी दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने का काम किया है.

AI टेक्नोलॉजी पर भी होगी बात: पीएम मोदी की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ वार्ता के दौरान प्रौद्योगिकी सहयोग, सुरक्षा सहयोग, एआई, कृषि, जल प्रबंधन और व्यापार को कवर करने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. दरअसल, इजरायल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में एक बड़ा सरकारी और निजी क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जो AI में बढ़ते तालमेल को दर्शाता है.

भारत-इजरायल के बीच कैसे रहे हैं संबंध: भारत-इजरायल संबंधों का विकास समय के साथ इस बात की सशक्त कहानी है कि कैसे दोनों देश सतर्क कूटनीति से एक मजबूत और सक्रिय गठबंधन की ओर बढ़े. 1948 में इजराइल की स्थापना और 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले हैं.

  • 1950: भारत ने इजरायल को मान्यता दी, लेकिन गुटनिरपेक्ष नीति और फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के समर्थन के अनुरूप पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने से परहेज किया.
  • 1956: स्वेज संकट के बीच इजरायली विदेश मंत्री मोशे शेरट ने भारत का दौरा किया था. उस समय मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर की ओर से नहर के राष्ट्रीयकरण के बाद इजरायली सशस्त्र बलों ने मिस्र में घुसपैठ की थी. इस मुद्दे पर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और यूगोस्लाविया के साथ मध्यस्थों में से एक था.
  • 1962: प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन के साथ युद्ध के दौरान हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेन गुरियन को पत्र लिखा था. यहीं से दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की नींव पड़ी.
  • 1971: प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मीर से पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के लिए हथियार मांगे. मीर सहमत हो गईं थीं.

नरसिम्हा राव सरकार में पूर्ण राजनयिक संबंधों की स्थापना: नरसिम्हा राव सरकार की ओर से 1992 में भारत और इजरायल के बीच औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए गए. इजरायल ने फरवरी में नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला और मई में भारत ने तेल अवीव में अपना दूतावास खोला.

  • 1993: भारत और इजरायल के बीच कृषि सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. अप्रैल 2025 में इसका नवीनीकरण किया गया.
  • 1996: भारत ने इजरायल से 32 आईएआई सर्चियर मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) खरीदे. इजरायली राष्ट्रपति एजर वेइजमैन 24 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए. वेइजमैन भारत आने वाले पहले इजरायली राष्ट्राध्यक्ष थे.
  • 1999: कारगिल संघर्ष के दौरान इजरायल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा. उसने महत्वपूर्ण निगरानी उपकरण और लेजर-निर्देशित मिसाइलें उपलब्ध कराईं.

2006 में हुआ महत्वपूर्ण समझौता: साल 2006 में हस्ताक्षरित एक व्यापक कार्य योजना के तहत इजरायल के MASHAV (विदेश मंत्रालय में इजरायल की अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी) और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास सहयोग केंद्र के माध्यम से द्विपक्षीय परियोजना को शुरू किया गया. इन योजनाओं के तहत, फूल, सब्जियां, फल (जैसे आम, खट्टे फल, लीची, खजूर, अनार) और मधुमक्खी पालन में 43 उत्कृष्टता केंद्रों (CoE) को मंजूरी दी गई, जिनमें से 35 कार्यरत हैं.

मुंबई आतंकी हमले ने खुफिया संबंध मजबूत किए: साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले में आंशिक रूप से पाकिस्तानी समर्थन शामिल था. इस हमले ने भारत और इजरायल की साझा सुरक्षा चिंताओं को और मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप आतंकवाद विरोधी सहयोग में तीव्रता आई.

भारत और इजरायल के बीच व्यापारिक संबंध: 1992 में राजनयिक संबंधों की शुरुआत के बाद से भारत-इजरायल के व्यापार और आर्थिक संबंध तेजी से विकसित हुए हैं. हालांकि, वित्त वर्ष 2024-2025 में क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और व्यापार में व्यवधान के कारण द्विपक्षीय व्यापार घटकर 3.75 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जिसमें भारत का निर्यात 2.1 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा.

भारत, इजरायल का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार: भारत, इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा एशियाई व्यापारिक साझेदार है, जिसमें हीरे, पेट्रोलियम और रसायन प्रमुख हैं. लेकिन, अब इलेक्ट्रॉनिक्स, उच्च-तकनीकी उत्पाद, संचार और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापार बढ़ रहा है. इजरायल को भारत का विदेशी व्यापार (अप्रैल 2000-अप्रैल 2025) लगभग 443 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें 2022 में अडानी के नेतृत्व में 1.18 अरब अमेरिकी डॉलर में हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण भी शामिल है. भारत में इजरायल का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (अप्रैल 2000-मार्च 2025) 334.26 मिलियन अमेरिकी डॉलर था.

भारत इजरायल को ये कीमती वस्तुएं करता है निर्यात: भारत से इजराइल को निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में मोती और कीमती पत्थर, ऑटोमोबाइल डीजल, रासायनिक और खनिज उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, प्लास्टिक, वस्त्र और परिधान उत्पाद, धातुएं और परिवहन उपकरण, कृषि उत्पाद शामिल हैं.

भारत इन वस्तुओं का इजरायल से करता है आयात: भारत इजरायल से रासायनिक और खनिज/उर्वरक उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, पेट्रोलियम तेल, रक्षा उत्पाद, मशीनरी और परिवहन उपकरण आयात करता है.

इजरायल में रहते हैं 42 हजार भारतीय नागरिक: इजरायल में 42,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें मुख्य रूप से देखभालकर्ता, निर्माण और कृषि क्षेत्र के कर्मचारी, हीरा व्यापारी, आईटी पेशेवर और छात्र शामिल हैं. इजरायल में लगभग 1000 भारतीय छात्र हैं, जो मुख्य रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में डॉक्टरेट और पोस्ट-डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहे हैं. इजरायली विश्वविद्यालयों में भारत से संबंधित कई पाठ्यक्रम भी पढ़ाए जाते हैं.

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Last Updated : February 24, 2026 at 3:22 PM IST