मुफलिसी में भी नहीं छोड़ा 'शिक्षा' का साथ, सफलता ऐसी मिली कि पीएम ने दी शाबाशी, पूनम - पुष्पा की प्रेरणादायक कहानी
गिरिडीह जिले की पूनम और पुष्पा ने मुफलिसी में भी शिक्षा का हाथ थामे रखा. अमरनाथ सिन्हा की रिपोर्ट

Published : July 8, 2026 at 9:09 PM IST
गिरिडीह: जिले के बिरनी प्रखंड की रहने वाली पूनम और पुष्पा की चारों ओर चर्चा है. चर्चा इनकी लगन, मेहनत और कामयाबी को लेकर है. चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दोनों युवती को शाबाशी देने के बाद और भी बढ़ गई है.
दरअसल, पूनम कुमारी एवं पुष्पा कुमारी भारत के पहले कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप निर्माण कंपनी (गुजरात के साणंद में स्थित सीजी सेमीकॉन) से जुड़ी हैं. दोनों लड़कियां गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड की रहने वाली हैं और वंचित समाज से आती हैं.
गरीबी में भी पूनम ने जारी रखी पढ़ाई
पूनम, बलगो की रहने वाली हैं. पूनम की मां का नाम वैजन्ती देवी हैं. मामा दीपक कुमार दास हैं. पूनम की मामी कुसुम देवी यहां की मुखिया हैं. पीएम नरेंद्र मोदी से जब पूनम ने मुलाकात की तो उनके घरवालों के साथ-साथ पूरा इलाका खुश है. पूनम के घरवालों से ईटीवी भारत संवाददाता ने मुलाकात की. बलगो में पूनम की मां नहीं मिली. वह इन दिनों कोलकाता में हैं. उनके मामा दीपक कुमार दास के अलावा दोनों मामी और मौसी मिले. सभी ने खुशी जाहिर की और पूनम का हौसला बढ़ाने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया किया.
बताया गया कि काफी गरीबी के बाद भी पूनम को पढ़ाने में उसकी मां पीछे नहीं रही. मध्य विद्यालय खुरजियो से लेकर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय तक पढ़ाई हो या फिर आईटीआई की पढ़ाई, सब जगह पूरा सपोर्ट पूनम को किया गया. आज पूनम ने इलाके का नाम रौशन किया है. पूनम के ननिहाल के लोग कहते हैं कि उनकी इच्छा है कि हर व्यक्ति अपनी बेटी को पढ़ाए.
स्कूल में भी खुशी का माहौल
पूनम ने अरम्भिक पढ़ाई यूएमएस दतलगा से की है. यहां के बाद कक्षा पांच तक उसने उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुरजियो से पढ़ाई की. कक्षा छह में उसका नामांकन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बिरनी में हुआ. पूनम अब कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप निर्माण कंपनी से जुड़ गई है तो खुरजियो स्कूल में भी खुशी है. यहां के शिक्षक देवव्रत कुमार कहते हैं, पीएम के साथ देखकर खुशी का ठिकाना नहीं है.
मां करती रही दिहाड़ी लेकिन पुष्पा की बंद नहीं की पढ़ाई
इसी तरह कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप निर्माण कंपनी से जुड़ने वाली पुष्पा बिरनी प्रखंड के चितखारो गांव की हैं. जिस गांव में पुष्पा रहती हैं, वहां तक जाने वाली सड़क कच्ची है. जगह जगह गड्ढे हैं और इसी बदहाल सड़क से चलकर पुष्पा पढ़ाई करने जाती थी.

ईटीवी भारत की टीम पुष्पा के घर पर पहुंची. यहां उसकी मां मोसोमात सीता से मिली. सीता ने बताया कि किस तरह से वह ईंट ढोती रही, मजदूरी करती रही लेकिन पुष्पा की पढ़ाई को बंद नहीं किया. बताया कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी से मुलाकात के साथ बात की, यह देखकर बहुत ही सकून मिला है. पुष्पा के पिता नहीं हैं लेकिन आज जहां होंगे, यह देखकर खुश होंगे.
भावुक हो गईं वार्डन
यहां के बाद ईटीवी भारत की टीम पीएमश्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहुंची. यहां पर वार्डन डॉ. वीणा वर्णवाल एवं पूर्व वार्डन काजल पांडेय से मुलाकात की. दोनों ने पूनम और पुष्पा की पढ़ाई की जानकारी शेयर की. उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा दोनों के अभिभावक को कैसे यह समझाया जाता रहा कि दोनों को पढ़ने दें. आज शिक्षा और अनुशासन का परिणाम है कि दोनों बेटियों ने स्कूल के साथ-साथ यहां शिक्षकों, अभिभावकों और पूरे जिला का नाम रोशन किया है, बात करते-करते दोनों भावुक हो गई.
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