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28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र में आपकी भूमिका बेहद अहम

ओम बिरला ने कहा कि कॉन्फ्रेंस में साझा संसदीय मूल्यों, डेमोक्रेटिक गवर्नेंस और इंस्टीट्यूशनल सहयोग पर चर्चा हुई.

COMMONWEALTH SPEAKERS CONFERENCE
पीएम मोदी ने 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया. (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 15, 2026 at 10:46 AM IST

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में कॉमनवेल्थ के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के 28वें कॉन्फ्रेंस (CSPOC) को संबोधित किया. बता दें, यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक चलेगा. इस सम्मेलन में अभितक के सबसे ज्यादा स्पीकर्स भाग ले रहे हैं और इतिहास में सबसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस सम्मेलन के अध्यक्ष हैं.

यह आयोजन राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है, जहां संसदीय लोकतंत्र, संस्थागत सहयोग और आधुनिक चुनौतियों पर चर्चा होती है. विपक्ष की बात करें तो 9 दलों के नेताओं ने शिरकत की. वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी देशों से आए डेलीगेट्स का स्वागत किया और भारतीय संवैधानिक व्यवस्था की खूबियां बताते हुए भारत में संवैधानिक संस्थाओं की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला.

अनामिका रत्ना (ETV Bharat)

28वें CSPOC को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में आपकी भूमिका स्पीकर की होती है. दिलचस्प बात यह है कि स्पीकर को ज्यादा बोलने का मौका नहीं मिलता. उनका काम दूसरों को बोलते हुए सुनना है. पीएम ने आगे कहा कि आप सब जिस जगह पर बैठे हैं, वह बहुत अहम जगह है. गुलामी के आखिरी सालों में, जब भारत की आजादी तय हो चुकी थी, तो इसी सेंट्रल हॉल में संविधान की ड्राफ्टिंग के लिए कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली की मीटिंग होती थीं. 75 सालों तक इसी बिल्डिंग ने भारत की पार्लियामेंट का काम किया, और इसी हॉल में हमारे भविष्य से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए, और कई चर्चाएं हुईं. भारत ने डेमोक्रेसी को समर्पित इस जगह का नाम कॉन्स्टिट्यूशन हाउस रखा है. अभी थोड़ी देर पहले ही संविधान लागू होने की 75वीं सालगिरह थी. कॉन्स्टिट्यूशन हाउस में मेरी मौजूदगी, और सभी बड़े लोगों की मौजूदगी, हमारी डेमोक्रेसी के लिए बहुत खास है.

इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कर रहे हैं और इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर और पीठासीन अधिकारी, साथ ही चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जो इस कार्यक्रम के अंतरराष्ट्रीय लेवल और महत्व को दिखाता है. CSPOC डेमोक्रेटिक संस्थाओं और मॉडर्न लेजिस्लेटिव तरीकों को मजबूत करने के लिए आज के संसदीय मुद्दों पर बातचीत करेगा. मुख्य विषयों में स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों की बदलती भूमिका, संसदीय कामकाज में टेक्नोलॉजी में बदलाव, और डेमोक्रेटिक प्रक्रियाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय विविधता को लेकर कई संदेह जताए गए थे, लेकिन भारत ने विविधता को अपनी ताकत में बदल दिया. आज भारत मजबूत लोकतंत्र के साथ सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है. पीएम ने जोर दिया कि लोकतंत्र का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए.

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रमंडल देशों के प्रेसिडिंग ऑफीसर्स कॉन्फ्रेंस में इस बार 42 राष्ट्रमंडल देशों से 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स शामिल हो रहे हैं. इसके साथ ही चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा CSPOC सम्मेलन है.

इस बीच, नामीबिया के डिप्टी स्पीकर और मोंटसेराट डेलीगेशन भी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं. चर्चा के लिए तय मुख्य विषयों में "संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेस: इनोवेशन को बैलेंस करना, निरीक्षण और अनुकूलन' शामिल हैं, जिसे मलेशिया लीड करेगा; "सोशल मीडिया और सांसदों पर इसका असर" जिसे श्रीलंका प्रेजेंट करेगा; और "वोटिंग से आगे बढ़कर संसद और नागरिक भागीदारी के बारे में जनता की समझ बढ़ाने के लिए नई रणनीति' जिसमें नाइजीरिया और साउथ अफ्रीका का योगदान होगा.

वहीं, दूसरे सत्र में सांसदों और पार्लियामेंट्री स्टाफ की सिक्योरिटी, स्वास्थ्य और अच्छाई पर फोकस किया जाएगा. इसके साथ ही मजबूत डेमोक्रेटिक संस्थाओं को बनाए रखने में स्पीकर और प्रेसाइडिंग ऑफिसर की भूमिका पर एक खास प्लेनरी डिस्कशन भी होगा. इससे पहले बुधवार को बिरला ने 28वें CSPOC से पहले स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग की अध्यक्षता की. CSPOC को 14 से 16 जनवरी तक भारत की संसद आयोजित कर रही है, और यह भागीदारी के मामले में सबसे बड़ा होगा.

इससे पहले सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि कॉन्फ्रेंस में साझा संसदीय मूल्यों, डेमोक्रेटिक गवर्नेंस और इंस्टीट्यूशनल सहयोग पर चर्चा होगी. बिड़ला ने आगे कहा कि भारत द्वारा आयोजित किए जा रहे कॉमनवेल्थ के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के कॉन्फ्रेंस में सबसे ज्यादा लोग हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस से जुड़ा काम ऑनलाइन किया गया है और इसमें किसी भी तरह के कागज का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इसमें हिस्सा नहीं लेगा और बांग्लादेश में अभी स्पीकर नहीं है, और अगले महीने आम चुनाव होने हैं. CSPOC का 27वां सत्र जनवरी 2024 में युगांडा ने होस्ट किया था, और उस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश और IPD के लीडर ने युगांडा से CSPOC के 28वें एडिशन के होस्ट का काम संभाला था, जो 2026 में भारत में होगा.