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पद्म विभूषण तीजन बाई का सफर, बहिष्कार से लेकर पुरस्कार तक, देश ही नहीं विदेश में पंडवानी की बनाई पहचान

पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जानिए उनका सफर और क्या है पंडवानी?

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पद्म विभूषण तीजन बाई का सफर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : July 5, 2026 at 7:23 PM IST

5 Min Read
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दुर्ग: सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है. छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाली तीजन बाई ने 5 जुलाई सुबह लगभग सवा तीन बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली. उनकी आवाज, अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में पहचान मिली है. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पहली और भारत की उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं जिन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण तीनों सम्मान से नवाजा गया है.

पद्म विभूषण तीजन बाई का सफर, बहिष्कार से लेकर पुरस्कार तक (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

राजकीय सम्मान के साथ विदाई

रविवार सुबह 11 बजे तीजन बाई के शव को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बेटे दिलहरण पारधी ने उन्हें मुखाग्नि दी. अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री साय, मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल समेत कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए. इसके अलावा कलेक्टर अभिजीत सिंह, SSP विजय अग्रवाल समेत कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी श्रद्धांजलि देते हुए अंतिम विदाई दी.

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बहिष्कार से लेकर पुरस्कार तक (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

गनियारी स्कूल तीजन बाई के नाम पर करने की घोषणा

अंतिम संस्कार के अवसर पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि गनियारी स्थित शासकीय स्कूल का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष, कला और योगदान से प्रेरणा ले सकें. इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भी डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और केंद्र सरकार से उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग उठाई.

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पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण तीनों सम्मान मिले (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने जताया शोक

प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई जी के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने भी दुख जताया है. राष्ट्रपति ने लिखा कि तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया.

भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रसार करने में उनका अमूल्य योगदान स्मरणीय रहेगा. मैं उनके प्रियजनों और प्रशंसकों के प्रति गहन संवेदनाएं व्यक्त करती हूं- द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति

लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका जाना पूरे कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है. प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

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क्या है पंडवानी? (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

पूर्व CM बघेल ने बचपन की यादें साझा की

अंतिम संस्कार में शामिल होने पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी पहुंचे. उन्होंने भी पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि बचपन से ही उनसे पारिवारिक संबंध था. भूपेश बघेल ने कहा- जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब साइकिल से पंडवानी सुनने जाया करते थे. विधायक बनने के बाद भी उनके साथ संपर्क में रहे और वो जब भी आती थीं तो बैठकर सुख-दुख की बातें होती थीं. एक महान कलाकार आज विदा हो गया.

ये ऐसी क्षति है जो कभी पूरी नहीं हो सकती. मैं कल ही AIIMS उन्हें देखने भी गया था. तब तक अंदाजा नहीं था कि ऐसी दुखद खबर सुनने मिलेगी. मेरी बहुत सारी यादें उनके साथ जुड़ी हैं. एक कार्यक्रम का संचालन मैं कर रहा था और दीदी की प्रस्तुति थी. तब दीदी ने कहा मैं तो बहुत पुरानी हो गई हूं, तो मैंने उनसे कहा था कि आपकी प्रस्तुति ऐसी है की जीवनभर बार-बार देख सकते हैं.उन्होंने ये बताया कि अगर आपकी कला में बात है तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती- अनुज शर्मा, कलाकार

पूरे विश्व के लिए बड़ी क्षति है. ऐसी धरोहर हैं वो कि उनके नाम से छत्तीसगढ़ जाना जाता है. दीदी के नहीं रहने से बहुत बड़ी क्षति हुई है- मोना सेन, कलाकार

तीजन भारत के तीनों पद्म पुरुस्कारों के अलावा विदेश में भी तीजन बाई सम्मानित हो चुकी हैं. ऐसी तीजन बाई का योगदान ना सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे कला जगत में अतुलनीय और अविस्मरणीय रहेगा. उनका निधन देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. आज भले ही तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज, उनकी पंडवानी और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव अमर रहेगी.

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