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अंगदान में पुरुषों से बहुत आगे हैं महिलाएं; बचा रहीं हजारों जिंदगियां; खुद की जरूरत पर नहीं मिलते डोनर

भारत में 4 गुना बढ़ा ऑर्गन डोनेशन फिर भी समय पर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाने से हर साल होती हैं 5 लाख मौतें.

ऑर्गन डोनेशन में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा.
ऑर्गन डोनेशन में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा. (Photo Credit; Getty)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 3, 2026 at 1:14 PM IST

16 Min Read
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हैदराबाद : शरीर का कोई अंग खराब हो जाए तो जान बचाने के लिए अंगदान ही एक मात्र विकल्प बचता है. देश ने ऑर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. साल दर साल ऑर्गन डोनरों की संख्या में इजाफा भी हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद अंग न मिलने से लाखों लोगों की मौत हो रही है. जीते जी अंगदान करने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है. जबकि पुरुषों की कम है. यानी जिंदगी बचाने में पुरुषों की तुलना में आधी आबादी का वर्चस्व है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की साल 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में जीवित रहते अंगदान करने वालों की कुल संख्या 15436 थी. इनमें महिलाओं की तादाद 9784 थी. जबकि पुरुष 5651 थे. यानी महिलाएं 63.38% जबकि पुरुष 36.60% थे. रिपोर्ट में एक अहम बात ये भी सामने आई है कि अंगदान में बड़ी भागीदारी के बावजूद महिलाओं को खुद की जरूरत पर उन्हें काफी कम डोनर मिलते हैं.

12 साल में देश में अंगदान 4 गुना बढ़ा है. donatelife.org.in के अनुसार समय पर अंग न मिलने से देश में हर साल करीब 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है. हर समय 3 लाख लोग किडनी-लिवर आदि अंगों के डोनर का इंतजार कर रहे होते हैं. देश में हर साल 1.75 से 2 लाख किडनी की जरूरत होती है, लेकिन 2024 में सिर्फ 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट हुए. पीएम मोदी ने हाल ही में मन की बात में अंगदान पर अपनी बात रखी थी.

8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. इस संदर्भ में हम ईटीवी भारत के इस Explainer में अंगदान में महिलाओं के रोल को आंकड़ों के जरिए समझने की कोशिश करेंगे, यह भी जानेंगे कि अंगदान में देश-दुनिया की स्थिति क्या है?, कितनी संख्या में कौन से अंग ट्रांसप्लांट किए जाते हैं?, खर्च कितना आता है?. देश में हर साल किस अंग की कितनी संख्या में जरूरत होती है?, उसके सापेक्ष कितने डोनर मिल पाते हैं?.

सबसे पहले बात आधी आबादी की : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार साल 2023 में कुल 4491 लिवर ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) किए गए. इनमें 3643 लिवर जिंदा जबकि 840 मर चुके लोगों से मिले थे. जिन लोगों को ये लिवर लगाए गए उनमें महिलाओं की संख्या 1367, यानी 30% थी जबकि पुरुषों की संख्या 3124 यानी 70% थी. इसी तरह 13426 किडनियां भी ट्रांसप्लांट की गईं. इनमें बतौर डोनर जिंदा लोगों से 11791 किडनी मिली जबकि मर चुके लोगों से 1635.

ये किडनी जिन लोगों को लगाई गई उनमें महिलाओं की संख्या 4939 यानी 37% थी जबकि पुरुषों की संख्या 8486 यानी 63% थी. इन आंकड़ों से साफ है कि महिलाओं को सबसे कम अंग मिले. यानी उनके लिए अंगदान करने वालों की संख्या कम रही. जबकि इसकी तुलना में पुरुषों की संख्या ज्यादा रही.

देश में अंगदान करने वाले लोगों की दर बढ़ रही है.
देश में अंगदान करने वाले लोगों की दर बढ़ रही है. (Graphics Credit; ETV Bharat)

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दुनिया के अन्य देशों का क्या है हाल? : भारत के ही जैसा दुनिया के कई अन्य देशों का भी हाल है. यानी वहां भी महिलाएं अंगदान करती हैं, लेकिन जब उन्हें जरूरत पड़ती है तो उन्हें प्राथमिकता नहीं दी जाती है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने कुछ साल पहले इसे लेकर डेटा भी जारी किया था. उस दौरान अमेरिका में 10 किडनी डोनर में से 6 महिलाएं थीं. वहीं जिन लोगों में ये अंग ट्रांसप्लांट किए गए, उनमें 6 पुरुष थे. अंगदान के मामले में स्पेन में हर कोई डोनर ही माना जाता है. जब तक कि वह खुद इसके लिए मना न कर दे.

नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क में सभी को हेल्थ बीमा मिलता है. इसकी वजह से इन देशों में अंग पाने में महिलाओं और पुरुषों का औसत लगभग बराबर है. वहीं ईरान में किडनी बेचना वैध माना जाता है. इस देश में गरीब लोग सबसे ज्यादा अंगदान करते हैं. यहां ऑगर्न ट्रांसप्लांटेशन में महिलाओं का प्रतिशत ज्यादा है.

अंगदान में क्यों आगे रहती हैं महिलाएं? : अंगदान में महिलाओं के आगे रहने जबकि रिसीवर में पीछे रहने के कई कारण हैं. अभी भी बहुत से परिवार में पुरुषों की कमाई से ही घर का खर्च चलता है. परिजनों की दलील होती है कि अंगदान से उनकी सेहत पर फर्क पड़ सकता है. उन्हें कुछ हुआ तो घर की आर्थिक हालत डगमगा सकती है. ऐसे हालात में परिवार के लोग उन्हें अंगदान से रोक देते हैं. भावनात्मक रूप से जुड़ाव ज्यादा होने पर फेमिली को इस स्थिति से उबारने के लिए महिलाएं अंगदान के लिए राजी हो जाती हैं.

जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती है यदि वहां किसी महिला को अंग ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत हो तो जोखिम ज्यादा रहता है. भारी खर्च आने के कारण परिवार के लोग अंग प्राप्तकर्ता की सूची में उनका नामांकन ही नहीं कराते हैं. आगे चलकर इसके बड़े दुखद परिणाम सामने आते हैं.

4.8 लाख से अधिक लोगों ने अंगदान के लिए कराया पंजीकरण : प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो (PIB) के मुताबिक 17 सितंबर 2023 से अब तक 4.8 लाख से अधिक लोगों ने अंगदान में दिलचस्पी दिखाई है. इन लोगों ने आधार बेस्ड वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए मौत के बाद अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है. वहीं साल 2025 में 1200 से ज्यादा लोगों ने परिवार में किसी की मौत के बाद जरूरतमंदों की मदद के लिए उनके अंगों को दान करने की पहल की. इससे हजारों लोगों की जिंदगी बची. मौत के करीब पहुंच चुके काफी लोगों के परिवार में फिर से खुशियां लौट आईं.

किस अंग के ट्रांसप्लांट में सबसे आगे है अपना देश? : PIB के मुताबिक अंगों के प्रत्यारोपण के मामले में देश ने काफी तरक्की कर ली है. यही वजह है कि बड़े पैमाने पर देश में हार्ट, लंग्स और पैंक्रियास जैसे अंग ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं. दूसरे देशों के लोग भी यहां आते हैं. वहीं हाथों के ट्रांसप्लांट में भारत दुनिया में सबसे आगे हैं. किसी भी अन्य देश के मुकाबले भारत में सबसे ज्यादा हाथ ट्रांसप्लांट किए जाते हैं. अंग प्रत्यारोपण के मामले में देश का विश्व में तीसरा स्थान है. भारत इस मामले में केवल अमेरिका और चीन से पीछे है.

NOTTO (National Organ and Tissue Transplant Organisation) के अनुसार साल 2013 में देश में कुल 5 हजार से भी कम अंग ट्रांसप्लांट किए गए थे. साल 2025 में इनकी संख्या करीब 20 हजार हो गई है. यानी तब से लेकर अब तक करीब 4 गुना बढ़ोतरी हुई है. मौजूदा समय करीब 18% प्रत्यारोपण मर चुके लोगों से मिले अंगों के जरिए किया जा रहा है.

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साल 2024 में सबसे ज्यादा ऑर्गन ट्रांसप्लांट : वैसे तो भारत में हर साल हजारों की संख्या में अंग प्रत्यारोपित किए जाते हैं, लेकिन साल 2024 में इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई. इस साल 18,900 से ज्यादा ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए. यह किसी एक साल में अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. नहीं NOTTO के मुताबिक तमिलनाडु और दिल्ली में सबसे ज्यादा हार्ट, किडनी, लंग और लिवर ट्रांसप्लांट किए गए. लोग अंगदान में भागीदारी कर रहे हैं. आगामी समय में काफी लोगों ने अंगदान का वादा भी किया है.

देश में किडनी का प्रत्यारोपण सबसे अधिक : पीआईबी और NOTTO के अनुसार साल 2020–2024 तक किडनी, लिवर, दिल, फेफड़े, पैंक्रियास और छोटी आंत समेत कई अंग ट्रांसप्लांट किए गए. इन 5 वर्षों के दौरान कुल 53,198 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए. यह दूसरे अंगों से ज्यादा है. साल 2024 में 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट की गई. यह साल में सबसे ज्यादा थी. जबकि 4,901 लिवर, 253 दिल, 228 फेफड़े, 44 पैंक्रियास और 9 छोटी आंत ट्रांसप्लांट की गईं थीं. इससे पहले साल 2021 में 9105 किडनी, लिवर 2847, 151 दिल, 133 फेफड़े, पैंक्रियास 19 और 4 छोटी आंत ट्रांसप्लांट की गई थीं.

भारत में हर साल बढ़ रहा ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन का आंकड़ा.
भारत में हर साल बढ़ रहा ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन का आंकड़ा. (Graphics Credit; ETV Bharat)

दुनियाभर में भाई-बहन सबसे ज्यादा करते हैं अंगदान : www.gov.wales, unos.org, copilot.com और www.kidney.org के अनुसार दुनियाभर में भाई-बहन सबसे आम और ज्यादा किडनी डोनर हैं. यानी इन रिश्तों में सबसे अच्छा टिशू मैच होने के कारण ये एक-दूसरे के लिए खुलकर किडनी दान देते हैं. दोनों के जेनिटक मार्कर अंग ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को आसान बना देते हैं. माता-पिता भी अपने बच्चों के लिए किडनी या पार्शियल लिवर देते हैं. वहीं बड़े बच्चे भी अपने माता-पिता के लिए अंगदान करते हैं, हालांकि भाई-बहन की तुलना में यह कम रहता है.

यूएस और यूरोप जैसे देशों में भावनात्मक जुड़ाव के कारण पति/पत्नी भी महत्वपूर्ण डोनर होते हैं. यूनाइटेड स्टेट्स में लगभग आधे जीवित किडनी डोनर भाई-बहन, माता-पिता या बच्चे होते हैं, जबकि बाकी आधे पति-पत्नी या दोस्त होते हैं. नेशनल किडनी फेडरेशन (UK) के अनुसार परिवार से किडनी ट्रांसप्लांट आमतौर पर बहुत सफल होते हैं. इनमें दूसरे डोनर की तुलना में रिस्क रेट भी कम रहता है.

भारत में पारिवारिक करीबियों को अंगदान ज्यादा : भारत में जीवित अंगदान कानूनी तौर पर माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे, पति/पत्नी तक ही सीमित है. यानी जीवित अंगदान की कैटेगरी में इन्हीं रिश्तों से अंगदान किया जाता है. परिवार में किसी को अंग की जरूरत होने पर उसकी जान बचाने के लिए इन्हीं रिश्तों में से कोई एक अंगदान के लिए आगे आता है. ज्यादातर अंगदान करने वाले पारिवारिक सदस्य ही होते हैं. यानी अंगदान के लिए मजबूत इच्छा शक्ति और एक-दूसरे से भावनात्मक जुड़ाव काफी काम आता है.

किडनी खराब होने से हर साल एक लाख लोगों की मौत : www.donatelife.org.in के अनुसार अपने देश में किडनी की काफी डिमांड रहती है. हर साल किडनी खराब होने से एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है. किडनी की डिमांड का केवल 2% ही पूरा हो पाता है. ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए लंबी वेटिंग रहती है. दिसंबर 2025 तक करीब 82 हजार से अधिक मरीज विभिन्न अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे थे. इनमें किडनी के 60590 जबकि लिवर के 18724 मरीज थे. देश में ऑगर्न डोनेशन रेट काफी कम है. हर 10 लाख की आबादी पर करीब एक व्यक्ति ही अंगदान करता है.

देश में सबसे ज्यादा लोगों को किडनी की जरूरत पड़ती है.
देश में सबसे ज्यादा लोगों को किडनी की जरूरत पड़ती है. (Graphics Credit; ETV Bharat)

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अंगदान में राज्यों की स्थिति पर एक नजर : नोटो की साल 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में दिल्ली एनसीआर में 2012 लोगों ने अंगदान किया था. इसी तरह साल 2019 में 2136, साल 2020 में भी 1205, साल 2021 में 1750, साल 2022 में 3795, 2023 में 4341, 2024 में 4397 लोगों ने अंगदान किया था. इसी तरह तमिलनाडु में वर्ष 2018 में 1545, 2019 में 1414, 2020 में 776, 2021 में 1479, 2022 में 1846, 2023 में 2011, 2024 में 2255 लोगों ने अंगदान किया था. इसी तरह महाराष्ट्र में इन्हीं वर्षों के दौरान क्रमश: 802, 1249, 587, 1146, 1327, 1641, 1779 लोगों ने ऑर्गन डोनेट किए थे.

केरल में साल 2018 में कोई भी अंगदान का मामला सामने नहीं आया था. साल 2019 में यहां 928, 2020 में 744, 2021 में 1004, 2022 में 1437, 2023 में 1395, 2024 में 1482 लोगों ने अंगदान किया था. गुजरात में 2018 से लेकर 2023 तक किसी ने अंगदान नहीं किया. साल 2024 में यहां 1024 लोगों ने अंगदान किया. इसी तरह पश्चिम बंगाल में साल 2018 में 761, 2019 में 838 लोगों ने ऑर्गन डोनेट किए. साल 2020 और 2021 में यहां किसी ने अंगदान नहीं किया. इसके बाद साल 2022 में यहां 1073 लोगों ने अंग दिए. जबकि 2023 में 1037 लोगों ने ऑर्गन डोनेट किए. जबकि साल 2024 में यहां संख्या शून्य रही.

हरियाणा में साल 2018 से 2024 के दौरान केवल 2020 में 562 और 2021 में 898 लोगों ने अंगदान किया. वहीं उत्तर प्रदेश में इन वर्षों के दौरान केवल 2018 में 1015 लोगों ने अंगदान किया था. इन आंकड़ों के हिसाब से राज्यों की स्थिति देखें तो इन वर्षों के दौरान दिल्ली एनसीआर पहले, जबकि तमिलनाडु दूसरे स्थान पर रहा. महाराष्ट्र 2018, 2020, 2022 में चौथे स्थान पर रहा. जबकि अन्य वर्षों (2024, 2023, 2021, 2019) में तीसरे स्थान पर रहा. केरल साल 2019, 2021, 2023, 2024 में देश में चौथे, जबकि साल 2022 और 2020 में तीसरे स्थान पर रहा.

गुजरात साल 2024 में पांचवें स्थान पर रहा. पश्चिम बंगाल और हरियाणा पांचवें स्थान पर रहे. उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर रहा. वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना भी अंगदान के मामले में देश में दूसरे पायदान पर है.

ऑर्गन डोनेशन में अन्य देशों की स्थिति : भारत के अलावा अमेरिका, स्पेन, फ्रांस, तुर्की, इटली, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, चीन, कनाडा, पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि देश भी अंगदान में आगे हैं. केंद्र सरकार ने अंगदान की पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए NOTTO का गठन किया है. देश में कहीं भी, किसी भी अस्पताल में अगर कोई अंग लिया या दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में उस संस्थान का NOTTO से जुड़ा होना जरूरी है. ऐसा न होने पर अंगदान अवैध माना जा सकता है.

अंगों की तस्करी को रोकने के लिए ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एक्ट्स 1994 भी है. इस कानून के अनुसार कुछ चुनिंदा अंगों को ही दान किया जा सकता है. इसकी खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है.

अंगदान में अमेरिका सबसे आगे है.
अंगदान में अमेरिका सबसे आगे है. (Graphics Credit; ETV Bharat)

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किस अंग के ट्रांसप्लांट में कितना आता है खर्च? : www.orfonline.org के अनुसार सरकारी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट पर 1.5 से 3.5 लाख, लिवर ट्रांसप्लांट पर 8 से 15 लाख तक खर्च आ सकता है. भारत में सरकारी अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी पर काफी सब्सिडी मिलती है. कई बार यह मुफ्त भी हो सकती है. सब्सिडी वाले केस में एक से 5 लाख तक का खर्च आ सकता है. वहीं आमतौर पर यह खर्च 15 से 25 लाख तक भी हो सकता है. CGHS (Central Government Health Scheme) ने विभिन्न अंगों के ट्रांसप्लांटेशन के अलग-अलग रेट बताए हैं.

CGHS के अनुसार हार्ट ट्रांसप्लांट में लगभग 15 लाख, लंग ट्रांसप्लांट में करीब 25 लाख, कंबाइंड हार्ट+लंग के प्रत्यारोपण में लगभग 35 लाख, यदि डोनर करीबी हो तो ऐसी स्थिति में किडनी ट्रांसप्लांट पर करीब 2 लाख जबकि डोनर परिवार से बाहर का होने पर करीब 3 लाख रुपये या इससे कुछ ज्यादा रुपये खर्च हो सकते हैं. हालांकि कुछ बड़े सरकारी संस्थानों में कभी-कभी बहुत ज्यादा जरूरतमंद लोगों के लिए 3 से 5 लाख के खर्च में ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट कर दिए जाते हैं.

वहीं निजी अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण पर 5 से 15 लाख जबकि मुश्किल केसों में 25 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं. इसी तरह लिवर ट्रांसप्लांट में 18 से 35 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. गंभीर मामलों में यह खर्च 40 लाख रुपये तक भी जा सकता है. प्राइवेट अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट पर 20 से 35 लाख, लिवर और किडनी एक साथ ट्रांसप्लांट कराने पर 30 से 55 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं. ये खर्च एक अनुमान है. अलग-अलग अस्पतालों में इनके रेट अलग-अलग हो सकते हैं.

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