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रिटायरमेंट नहीं, राष्ट्रसेवा का विस्तार: वर्दी व तिरंगे के सम्मान से रोजगार तक की प्रेरक पहल

रिटायर्ड आर्मी यूनिफॉर्म को रीसायकल करके ज़रूरतमंद बच्चों के स्कूल बैग में बदलकर यूनिफॉर्म की ड्यूटी को सुनिश्चित किया जा रहा है.

वर्दी व तिरंगे के सम्मान से रोजगार तक की प्रेरक पहल
वर्दी व तिरंगे के सम्मान से रोजगार तक की प्रेरक पहल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : March 2, 2026 at 2:02 PM IST

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Updated : March 2, 2026 at 2:12 PM IST

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By DHANANJAY VERMA

नई दिल्ली: सेना की वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि एक सैनिक की दूसरी त्वचा होती है. जब एक सैनिक सेवानिवृत्त होता है, तो वह वर्दी उतार तो देता है, लेकिन वर्दी का अनुशासन व देशप्रेम उसके भीतर सदा जीवित रहता है. कारगिल युद्ध और 'ऑपरेशन कोकरी' जैसे ऐतिहासिक अभियानों का हिस्सा रहे मेजर जनरल असीम कोहली (सेवानिवृत्त) ने इसी जज्बे को एक नई दिशा दी है. अपने एनजीओ 'सेवाज नीजिम फाउंडेशन' के माध्यम से उन्होंने 'वर्दी का सम्मान' व 'तिरंगे का सम्मान' जैसी अनूठी पहल शुरू की है, जो न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण कर रही है, बल्कि शिक्षा व रोजगार के नए द्वार भी खोल रही है.

ईटीवी भारत से बातचीत में असीम कोहली बताते हैं कि,

पुरानी सैन्य वर्दियों के निपटान का कोई गरिमापूर्ण तरीका मौजूद नहीं था. एक सैनिक 3-4 साल तक जिस वर्दी को पूरी निष्ठा से पहनता है, रिटायरमेंट के बाद उसे कूड़े में फेंकना अथवा असुरक्षित तरीके से छोड़ना उसका अपमान है. इसी विचार से 'वर्दी का सम्मान' अभियान की शुरुआत हुई. इस प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है.

वर्दी व तिरंगे के सम्मान से रोजगार तक की प्रेरक पहल (ETV Bharat)

वर्दी का हो रहा पुनर्जन्म

पहला अपसाइकिलिंग- यदि वर्दी का कपड़ा मजबूत व रंग में अच्छा है, तो उसकी धुलाई कर उसे सीधे स्कूल बैग, लैपटॉप बैग, मोबाइल पाउच व मास्क बनाने में उपयोग किया जाता है. दूसरा रीसाइक्लिंग किया जाता है- यदि कपड़ा पुराना या कमजोर हो चुका है, तो उसे आधुनिक तकनीक से फाइबर में बदला जाता है. इस फाइबर से सफेद रंग का नया धागा व कपड़ा तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने में किया जाता है.

पुरानी सैन्य वर्दियों से बनाए गए बैग
पुरानी सैन्य वर्दियों से बनाए गए बैग (ETV Bharat)

शिक्षा को पंख और शहीदों को नमन: इस पहल का मानवीय पहलू इसका सामाजिक प्रभाव है. मेजर जनरल असीम कोहली ने बताया कि तैयार किए गए उत्पादों के वितरण दो तरीके से किया जाता है. पहला जरूरतमंद बच्चों की मदद- फाउंडेशन द्वारा बनाए गए स्कूल बैग देश के दूर-दराज के इलाकों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर व उत्तर-पूर्व के गरीब बच्चों को मुफ्त दिए जाते हैं. यह पहल न सिर्फ बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करती है, बल्कि उनके मन में सेना के प्रति सम्मान भी जगाती है. बड़ी संख्या में बैग सेना को भी दिए जाते हैं, सेना की भी तरफ से जरूरतमंद बच्चों को वितरित कर दिए जाते हैं. दूसरा वॉर मेमोरियल शॉप्स में इन बैग्स व अन्य सामानों को बेच दिया जाता है, इस तरीके से जो इनकम होती है. उससे संस्था में सिलाई व अन्य काम कर रहे लोगों को वेतन दिया जाता है. नेशनल वॉर मेमोरियल (दिल्ली) व कारगिल वॉर मेमोरियल (द्रास) जैसे स्थानों पर बिक्री के लिए दुकानों पर सामान रखा जाता है. यहाँ आने वाले पर्यटक स्मृति चिह्न के रूप में इन्हें खरीदते हैं.

रिटायर्ड आर्मी यूनिफॉर्म के प्रमुख उत्पाद
रिटायर्ड आर्मी यूनिफॉर्म के प्रमुख उत्पाद (ETV Bharat)

तिरंगे का सम्मान: IIT दिल्ली के साथ एक ऐतिहासिक कदम: आजादी के अमृत महोत्सव के बाद देश में करोड़ों की संख्या में राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए गए थे, लेकिन सवाल वही था कि इन ध्वजों का सम्मानजनक निपटान कैसे हो? असीम कोहली ने बताया कि आईआई दिल्ली और टेक्सटाइल मंत्रालय के सहयोग से 'तिरंगे का सम्मान' कार्यक्रम शुरू किया गया है. राष्ट्रीय ध्वज को जलाना या डंपयार्ड में फेंकना प्रदूषणकारी व अपमानजनक है. पानीपत स्थित 'अटल सेंटर फॉर रीसायकल एंड सस्टेनेबिलिटी' में तकनीक का उपयोग कर पुराने ध्वजों को रीसायकल कर नए तिरंगे व अन्य उत्पाद बनाने की शुरुआत की गई है. यह दुनिया की अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जहां राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों को वैज्ञानिक व सम्मानजनक तरीके से पुनर्जीवित किया जा रहा है.

तिरंगे का सम्मान: IIT दिल्ली के साथ एक ऐतिहासिक कदमः
तिरंगे का सम्मान: IIT दिल्ली के साथ एक ऐतिहासिक कदमः (ETV Bharat)

चुनौतियां के साथ रोजगार का सृजन: किसी भी नए विचार की तरह मेजर जनरल असीम कोहली की राह भी आसान नहीं थी. शुरुआत में लोग उनके इस काम पर हंसते थे, लेकिन आज उनकी मेहनत रंग ला रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने बेटी की सलाह पर अपनी वर्दी से मास्क बनाकर बांटे थे. इसके बाद इस सेवा के काम को विस्तार देने की योजना पर काम करना शुरू किया. वह इसे बिजनेस नहीं बनाना चाहते हैं. उनका कहना है कि कई बड़े ब्रांड्स ने कमर्शियल ऑफर दिए, लेकिन हमारा लक्ष्य इसे एक शुद्ध सामाजिक मिशन बनाए रखना है. आज सेवा भाव से ही 8 से 10 लोग सीधे तौर और दर्जनों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहे हैं.

ऑपरेशन कोकरी
ऑपरेशन कोकरी (ETV Bharat)

मेजर जनरल असीम कोहली का ये मिशन सिखाता है कि रिटायरमेंट सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं. वह कहते हैं अगर हम अपनी सोसाइटी व मोहल्ले में छोटी-छोटी पहल करें, तो एक सुंदर राष्ट्र का निर्माण हो सकता है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे उनकी वेबसाइट के माध्यम से बच्चों को स्कूल बैग गिफ्ट करके या वर्दी के सम्मान की इस मुहिम में शामिल होकर अपना योगदान दें. ये पहल शून्य अपशिष्ट व असीम सेवा का एक उत्कृष्ट संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति का एक नया पाठ पढ़ा रही है.

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Last Updated : March 2, 2026 at 2:12 PM IST