'देख रहे हो विनोद..जीते-जी 3 साल से वृद्धा पेंशन बंद' 93 साल की महिला को फाइलों में मार डाला
93 साल की बुजुर्ग महिला को सरकारी फाइलों में जिंदा ही मार डाला गया. प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ परिवार गुहार लगा रहा है-

Published : January 8, 2026 at 4:55 PM IST
शिवहर : पंचायत वेब सीरीज का एक फेमस डॉयलॉग है- 'देख रहे हो विनोद..?' इसमें पंचायत के कामकाज पर करारा प्रहार किया गया है. लेकिन शिवहर में भी एक ऐसी ही पंचायत है जिसका नाम 'बाखर चंडीहा पंचायत' है. आरोप है कि यहां रियल पंचायत सचिव ने एक बुजुर्ग महिला को जीते-जी ही अपनी फाइलों में मार डाला और उसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी. नतीजा ये हुआ कि सरकारी पेंशन रुक गई और अन्य लाभ भी मिलना बंद हो गए.
जिंदा साबित करने की जद्दोजहद : बावजूद इसके बाखर चंडीहा पंचायत की संकरी गलियों में एक झुकी हुई काया आज भी सांस लेती है. आंखें धुंधली हो चुकी हैं, आवाज टूट चुकी है, लेकिन दर्द आज भी ज़िंदा है. इनका नाम बबुनी देवी है जिनकी उम्र लगभग 93 साल है. फिलहाल वो सरकारी कागजों में मर चुकी हैं. लेकिन हकीकत में वो हर दिन भूख-प्यास, अपमान और सरकारी ऑफिसों के धक्के झेलकर बेबसी के साथ जी रही हैं.
'सरकारी फाइलों में मार डाला' : कभी हर महीने मिलने वाली वृद्धा पेंशन उनके लिए दवा थी, सहारा थी और उनका आत्मसम्मान था, लेकिन 2022 के बाद एक दिन अचानक सब कुछ बंद हो गया. सरकारी बाबुओं की एक गलत जांच रिपोर्ट ने काली स्याही की ऐसी लकीर खींची की जिंदा इंसान को कागजों में मार दिया गया.
जिंदा महिला को किया मृत घोषित : मामला शिवहर के पुरनहिया प्रखंड की बाखर चंडीहा पंचायत के वार्ड संख्या 11 का है. जहां गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है. पंचायत सचिव की कथित गलत जांच रिपोर्ट के कारण बाखर चंडीहा निवासी बबुनी देवी (पति– राम विनोद सिंह, उम्र लगभग 93 वर्ष) को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित हैं. इसके परिणामस्वरूप उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई, जिससे बुजुर्ग महिला के सामने संकट खड़ा हो गया.

3 साल से बंद है वृद्धा पेंशन : जानकारी के अनुसार, बबुनी देवी वर्ष 2022 तक वृद्धा पेंशन का लाभ ले रही थीं, लेकिन उसके बाद पेंशन अचानक बंद कर दी गई. अब लगभग तीन वर्षों से अधिक समय से उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है. बबुनी देवी ने बताया कि उम्र और कमजोरी के कारण वे ठीक से बोल भी नहीं पातीं. नम आंखों से उन्होंने इशारों और टूटे शब्दों में बताया कि पहले पेंशन मिलती थी, लेकिन अब बंद हो गई है. उन्होंने रोते हुए कहा कि लंबे समय से दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही.
दर-दर भटकने को मजबूर हैं परिजन : उनकी बहू जनकदुलारी देवी ने बताया कि तीन साल नहीं बल्कि पाँच–छह वर्षों से पेंशन के लिए भटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि कागजों में बबुनी देवी को मृत घोषित कर दिया गया है. इसके बाद उनका बेटा मुखिया सहित कई जगहों पर गया, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. आवेदन लिखकर कार्यालय जाने पर भी आवेदन जमा नहीं लिया गया.

पंचायत सचिव पर आरोप : परिवार ने पंचायत सचिव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पेंशन चालू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. जबकि महिला पूरी तरह जीवित है, फिर भी सरकारी कागजों में उन्हें मृत दिखा दिया गया है.
'पंचायत सचिव को दादी से साक्षात मिलवाया' : जनकदुलारी देवी ने बताया कि उनके बेटे ने पंचायत सचिव को घर लाकर दादी को दिखाया, फिर भी पेंशन चालू नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि दो-दो बार आवेदन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई और जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया.

लाभार्थी को नहीं मिल रहा सरकारी लाभ : परिवार के सदस्य, पेंशन संबंधी कागजात लेकर दौड़ने वाले पोते सोमेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में दादी की वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई. जब पेंशन की स्थिति की जांच कराई गई तो सत्यापन रिपोर्ट में लाभार्थी को मृत बताया गया, जबकि वे जीवित थीं. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जांच पंचायत सचिव और जनप्रतिनिधियों द्वारा ही की जाती है.
''मैं कई बार मुखिया और पंचायत सचिव के पास गुहार लगा चुका हूं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला. पंचायत सचिव को दिए गए आवेदन की रसीद भी नहीं दी गई, हालांकि आवेदन की फोटो कॉपी मेरे पास सुरक्षित है.'' - सोमेश कुमार, बुजुर्ग बबुनी देवी के परिजन

डीएम ने दिए जांच के आदेश : इस मामले में जब डीएम प्रतिभा रानी से पूछा गया तो उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने जांच के आदेश देते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर या लापरवाही में गलत रिपोर्टिंग की गई है, तो संबंधित पंचायत सचिव या अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
"इस तरह की लापरवाही कत्तई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जांच करने का आदेश दिया गया है. अगर जांच में जानबूझकर कर्मचारियों द्वारा कोई लापरवाही या गलत रिपोर्ट लगाई गई होगी तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर नियम के अनुसार सख्त कार्रवाई करेंगे."- प्रतिभा रानी, जिलाधिकारी, शिवहर

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