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समापन की ओर चारधाम यात्रा, श्रद्धालुओं की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड, मौत के आंकड़ों ने भी चौंकाया

उत्तराखंड में चारधाम समापन को लेकर काउंडाउन शुरू, 22 अक्टूबर से कपाट बंद होने का सिलसिला होगा शुरू, श्रद्धालुओं की संख्या तोड़ रही रिकॉर्ड

UTTARAKHAND CHARDHAM YATRA
उत्तराखंड चारधाम यात्रा (फोटो सोर्स- Information Department)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : October 14, 2025 at 8:49 PM IST

5 Min Read
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किरनकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा अब अपने समापन की ओर बढ़ रही है. हिमालय की गोद में बसे चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इस बार की यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है. आपदा के बाद यह पहला मौका है, जब यात्रा में आने वाले भक्तों की भीड़ ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस अपार आस्था और भीड़ के बीच एक बार फिर दुखद पहलू भी सामने आया है.

इस साल भी चारधाम यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं ने अपनी जान भी गंवाई हैं. ज्यादातर मौतें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों हृदयाघात और ऊंचाई से जुड़ी दिक्कतों के चलते हुई हैं. हालांकि, राहत की बात ये है कि पिछले साल यानी 2024 में जहां कुल 246 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई थी. वहीं, इस साल यह संख्या घटकर लगभग 189 पर आ गई.

Gangotri Dham
गंगोत्री धाम में श्रद्धालु (फोटो सोर्स- Priest of Gangotri)

केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा मौतें: चारधाम यात्रा के दौरान इस साल भी सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं. करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 18 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है. कई श्रद्धालु बिना स्वास्थ्य जांच के इस चढ़ाई पर निकल पड़ते हैं, जिसके चलते उन्हें ऊंचाई पर सांस लेने में तकलीफ, हृदय की धड़कन तेज होने और थकावट जैसी समस्याएं घेर लेती हैं.

स्वास्थ्य सचिव आर राजेश कुमार भी मानते हैं कि ज्यादा समस्या केदारनाथ में हृदय गति रुकने की वजह से होती है. उम्रदराज लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. ज्यादातर मौत के कारणों में हृदयाघात, लो ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन की कमी और स्ट्रोक आदि शामिल हैं. जो इन ऊंचे इलाकों में बहुत आम हैं. कई बार श्रद्धालु तीर्थ यात्रा को केवल धार्मिक आस्था का विषय मानकर शरीर की सीमाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो घातक साबित होता है.

Kedarnath Dham
केदारनाथ में देव डोलियां (फोटो सोर्स- Priest of Kedarnath)

चारधाम यात्रा में मौत के आंकड़े-

  • केदारनाथ धाम में अब तक 89 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है.
  • बदरीनाथ धाम में 46 लोगों ने दम तोड़ा.
  • यमुनोत्री में 29 लोगों की मौत हुई.
  • गंगोत्री धाम में 23 श्रद्धालुओं की जान गई.

यह आंकड़े आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक हैं. ये सभी मौतें मुख्य रूप से स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुई हैं. जबकि, भूस्खलन, सड़क हादसे और आपदा जनित कारणों से होने वाली मौतें अलग हैं. अगर इन अन्य घटनाओं को भी शामिल किया जाए तो चारधाम यात्रा के दौरान कुल मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो जाता है.

Badrinath Dham
बदरीनाथ धाम (फोटो सोर्स- Information Department)

पिछले साल की तुलना में कम मौतें, लेकिन चिंता अब भी बरकरार: साल 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान कुल 246 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी. जिनमें सबसे ज्यादा करीब 120 मौतें केदारनाथ में दर्ज की गई थी. उस साल भी ज्यादातर मौतें स्वास्थ्य कारणों से हुई थीं. इस बार आंकड़ा घटकर करीब 190 तक पहुंचा है, जो कुछ राहत भरा जरूर है, लेकिन अभी भी चिंता का विषय है.

"चारधाम यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती ऊंचाई और मौसम की अनिश्चितता है. केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे धामों तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल मार्ग तय करना पड़ता है. कई बार श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता का गलत अनुमान लगा लेते हैं. कुछ लोग बिना चिकित्सकीय जांच कराए यात्रा पर निकल पड़ते हैं. जिसके चलते ऊंचाई पर उनका शरीर अचानक प्रतिक्रिया देता है."- विनोद कुमार सुमन, आपदा प्रबंधन सचिव, उत्तराखंड

श्रद्धालुओं की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड: चारधाम यात्रा 2025 में श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है. अब तक लगभग 49 लाख श्रद्धालु चारधाम पहुंच चुके हैं. यह संख्या 2013 की आपदा के बाद सबसे ज्यादा है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार केदारनाथ धाम में इस बार 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे. जबकि, बदरीनाथ में यह संख्या 14 लाख से ज्यादा पहुंच चुकी है.

Yamunotri Dham
यमुनोत्री धाम (फोटो सोर्स- Priest of Yamunotri)

वहीं, भारी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने इस बार ऑनलाइन पंजीकरण को अनिवार्य किया था. इसके अलावा यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और चिकित्सीय इंतजामों को भी मजबूत किया गया था. हालांकि, कुछ स्थानों पर यात्रियों की अत्यधिक भीड़ के चलते व्यवस्था चरमरा गई.

चारधाम यात्रा के साथ अब कपाट बंद होने का समय भी आ गया है. परंपरा के अनुसार धामों के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधान से बंद किए जाएंगे. ऐसे में एक नजर चारधाम के कपाट बंद होने की तिथियों पर डालते हैं.

चारधाम के कपाट बंद की तिथियां-

  1. गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को सुबह 11:36 बजे बंद होंगे.
  2. केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे बंद किए जाएंगे.
  3. यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन यानी 23 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे.
  4. बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे.

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