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लगातार दो हार के बाद MLA, फिर CM बने तो 7 दिनों में इस्तीफा.. 10वीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार

नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के सीएम बने हैं. मुन्ना से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर बहुत दिलचस्प है. पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट..

Nitish Kumar
मुन्ना से नीतीश कुमार बनने की कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : November 20, 2025 at 2:51 PM IST

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Updated : November 20, 2025 at 4:09 PM IST

11 Min Read
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रिपोर्ट: अविनाश कुमार

पटना: बिहार के नालंदा जिले के नीतीश कुमार उर्फ मुन्ना ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. हालांकि कई राज्यों के सीएम उनसे अधिक समय तक सीएम की कुर्सी पर काबिज रहे लेकिन किसी ने भी 6 बार से अधिक मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ली. उनके शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट के कई मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य मौजूद रहे.

10वीं बार शपथ लेने का बनाया रिकॉर्ड: बिहार में अब तक 23 मुख्यमंत्री हो चुके हैं. इनमें से से सिर्फ 4 मुख्यमंत्री ने ही अपना कार्यकाल पूरा किया है. इसमें से दो मुख्यमंत्री एक ही परिवार के लालू यादव और राबड़ी देवी हैं. बाकी दो में प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और खुद नीतीश कुमार हैं. वहीं, बिहार में सबसे अधिक 10 बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम दर्ज हो गया है.

नीतीश कुमार के अलावा बिहार में जगन्नाथ मिश्रा तीन बार मुख्यमंत्री रहे तो भोला पासवान शास्त्री भी तीन बार मुख्यमंत्री रहे. राबड़ी देवी भी तीन बार मुख्यमंत्री रही हैं, जबकि लालू प्रसाद यादव और कर्पूरी ठाकुर दो-दो बार मुख्यमंत्री बने हैं. जगन्नाथ मिश्रा और भोला पासवान शास्त्री तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बाद भी अपना कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर सके. वहीं कर्पूरी ठाकुर भी दो बार मुख्यमंत्री रहने के बाद भी कभी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके.

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10वीं बार सीएम पद की शपथ ली (ETV Bharat)

नीतीश ने कब-कब ली शपथ: नीतीश कुमार सबसे पहले 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री बने लेकिन 7 दिनों के अंदर ही इस्तीफा देना पड़ा. दूसरी बार 24 नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री बने और 5 साल का कार्यकाल पूरा किया. तीसरी बार 26 नवंबर 2010 को सीएम पद की शपथ ली. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद 17 मई 2014 को इस्तीफा दे दिया और अपनी जगह जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया. हालांकि 22 फरवरी 2015 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता पर काबिज हो गए. उसके बाद से नीतीश कुमार लगातार मुख्यमंत्री बने हुए हैं लेकिन पाला बदलने के कारण कई बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी पड़ी है.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

विधानसभा चुनाव 2015 में जीत के बाद जब महागठबंधन की सरकार बनी तो 20 नवंबर 2015 को उन्होंने पांचवीं बार सीएम पद की शपथ ली. 27 जुलाई 2017 को एनडीए के सीएम के तौर पर छठी बार शपथ ली. 2020 में जीत के बाद 16 नवंबर 2020 को सातवीं बार सीएम बने. 2022 में फिर से महागठबंधन में चले गए और 10 अगस्त को आठवीं बार सीएम पद की शपथ ली. वहीं लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए में लौट गए और 28 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 10वीं आज यानी 20 नवंबर 2025 को बिहार के सीएम पद की शपथ ली.

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नीतीश कुमार (ETV Bharat)

किस सीएम ने कितनी बार शपथ ली?: नीतीश कुमार देश के एक मात्र मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड 10 बार सीएम पद की शपथ ली है. इसके बाद हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह 6 बार, तमिलनाडु में जयललिता 6 बार, सिक्किम में पवन कुमार चामलिंग 5 बार, ओडिशा में नवीन पटनायक 5 बार, पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु 5 बार और ओडिशा में गेगोंग अपांग ने 5 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था. उनके पिता कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे. पिता के साथ वह भी दवा की पुड़िया बनाने में मदद किया करते थे. उनके बचपन का नाम मुन्ना था. स्कूली शिक्षा बख्तियारपुर से ही पूरा करने के बाद पटना में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1972 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. विद्युत इंजीनियरी में डिग्री मिलने के बाद बिहार राज्य बिजली बोर्ड में नौकरी भी की लेकिन बहुत ज्यादा दिनों तक नौकरी नहीं की.

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इसी बीच इंजीनियरिंग की पढ़ाई समाप्त करने ही नीतीश कुमार की 1973 में शादी हो गई. उनकी पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा पटना के स्कूल में अध्यापिका थी. उनकी पत्नी का निधन 2007 में हो चुका है. उनका एक बेटा निशांत कुमार हैं, जो इंजीनियर हैं. वह राजनीति से दूर ही रहते हैं.

जेपी आंदोलन की उपज हैं नीतीश: 1974 के छात्र आंदोलन से नीतीश कुमार की राजनीतिक पारी की शुरुआत हुई थी. जेपी आंदोलन में आपातकाल के दौरान वह जेल भी गए. नीतीश कुमार हरनौत से 1977 और 1980 में विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली. लगातार दो विधानसभा चुनाव होने के बाद 1985 में पहली बार हरनौत से ही विधायक चुने गए. 1987 में युवा लोक दल के अध्यक्ष बने. 1989 में बिहार जनता दल के सचिव बने और 1989 में ही पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए.

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पत्नी मंजू सिन्हा के साथ नीतीश कुमार (File Photo)

नीतीश कुमार 1990 में कृषि राज्य मंत्री के रूप में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए. 1991 में फिर से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल हुई. जनता दल का राष्ट्रीय सचिव भी बने और संसद में जनता दल के उप नेता बने. लालू प्रसाद यादव से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडीज के साथ 1994 में समता पार्टी का गठन किया. 1999 केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री भी रहे. 1999 में हुई रेल घटना के बाद उन्होंने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया.

2000 में पहली बार बने सीएम: 2000 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार 7 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने. बहुमत साबित नहीं कर पाए तो इस्तीफा देना पड़ा. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री बने. 2001 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री रहे. 2003 में शरद यादव के जनता दल में समता पार्टी का विलय कर जनता दल यूनाइटेड का गठन किया. 2004 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ और नालंदा दोनों जगह से चुनाव लड़े. हालांकि बाढ़ से चुनाव हार गए और नालंदा से विजयी रहे.

नवंबर 2005 में जब एनडीए की सरकार बनी तो नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने. 2014-15 के कुछ महीनों को छोड़ दें (जब जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री थे) तो वे ही पिछले 20 साल से बिहार की सत्ता के सिरमौर हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि 2004 के बाद से नीतीश कुमार ने न तो लोकसभा का और नहीं विधानसभा का चुनाव लड़ा है. वह लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं.

कभी मोदी विरोध में छोड़ा था एनडीए: आज भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी जुगलबंदी नजर आती हों लेकिन कभी इसी मोदी के पीएम बनने की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश की थी. नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज होकर नीतीश ने गठबंधन तोड़ लिया था और 2014 में अकेले ही लोकसभा का चुनाव लड़ा. हालांकि महज 2 सीटों पर जीत मिली.

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लालू यादव और शरद यादव के साथ नीतीश कुमार (File Photo)

पुराने दोस्त लालू से जा मिले: बीजेपी से अलग होने और लोकसभा चुनाव में असफलता के बाद लालू प्रसाद यादव से उनकी नजदीकियां बढ़ी और 2015 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन के साथ लड़े. प्रचंड बहुमत से साथ सरकार भी बनाई लेकिन 2017 में फिर से पाला बदल लिया और एनडीए के साथ सरकार बना ली. 2022 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदलकर महागठबंधन के साथ सरकार बना ली लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में लौट आए.

बेदाग रही है राजनीतिक पारी: लगभग 20 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी नीतीश कुमार पर ना तो परिवारवाद का आरोप लगा है और ना ही किसी तरह के भ्रष्टाचार का. विरोधी भी नीतीश कुमार के बेदाग छवि को लेकर तारीफ करते हैं. जहां एक तरफ लालू यादव, रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा सहित तमाम दिग्गज नेताओं ने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में आगे बढ़ाया, वहीं नीतीश ने बेटे निशांत को राजनीति से दूर रखा. नीतीश कुमार को बेहतर काम के लिए कई संस्थानों की तरफ से पुरस्कार भी मिले हैं.

नीतीश कुमार के कई 'उपनाम': नीतीश कुमार कई नाम से चर्चा में रहे हैं. बचपन में घर के लोग मुन्ना कहकर बुलाते थे. मुख्यमंत्री बने तो अपने कार्यों की बदौलत 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर हो गए. बाढ़ के समय बाढ़ ग्रस्त इलाके के लोगों को जिस प्रकार से मदद पहुंचाया, 'क्विटल्या बाबा' के नाम से प्रसिद्ध हुए. बार-बार पलटी मारने के कारण 'पलटू राम' भी कहा गया.

बयानों से पलटने के लिए भी मशहूर: नीतीश कुमार जब बीजेपी से अलग हुए तो विधानसभा में कहा था, 'मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन अब बीजेपी में नहीं जाएंगे'. हालांकि कुछ ही महीनों बाद 2017 में बीजेपी के साथ फिर से सरकार बना ली. इसी तरह महागठबंधन में भी कभी नहीं जाने की बात करने वाले नीतीश कुमार 2022 में महागठबंधन के साथ चले गए. 2015 चुनाव में नीतीश कुमार के पलटी मारने पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके 'राजनीतिक डीएनए' पर सवाल उठाया था. उस बयान पर उस समय काफी बवाल भी हुआ था.

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बेटे निशांत के साथ नीतीश कुमार (ETV Bharat)

नीतीश ने कई यात्राएं भी कीं: बिहार में नीतीश कुमार ने 'न्याय यात्रा' से लेकर 'विकास यात्रा' और 'धन्यवाद यात्रा' जैसे अलग-अलग नाम से एक दर्जन से अधिक यात्रा कर रिकॉर्ड बनाया है. उन यात्रा के माध्यम से मिले फीडबैक के आधार पर विकास की कई योजना की शुरुआत की. साइकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति योजना उन्हीं में से प्रमुख योजनाओं में है. 5 घंटे में सुदूर इलाकों से पटना पहुंचने के लिए रोड कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और हर घर बिजली, हर घर नल जल, सात निश्चय योजना, पूर्ण शराबबंदी और महिला आरक्षण उनके महत्वपूर्ण फैसले रहे हैं.

नीतीश पर भरोसा कायम: पिछले कुछ सालों से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठता रहा है. विपक्षी दल के नेता नीतीश कुमार को मानसिक रूप से 'बीमार' बताते रहे हैं लेकिन उसके बावजूद नीतीश कुमार जनता के सबसे भरोसेमंद चेहरे के रूप में एक बार फिर से उभर कर सामने आए हैं. 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 202 सीटों पर एनडीए की जीत नीतीश कुमार के बहतर नेतृत्व और लोकप्रियता को बताने के लिए काफी है.

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नीतीश के नेतृत्व में एनडीए को 202 सीटों पर जीत (ETV Bharat)

2025 चुनाव का नतीजा: 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत हासिल की है. इनमें भारतीय जनता पार्टी को 89, जनता दल यूनाइटेड को 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटों पर जीत मिली है. उधर महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया, जिनमें आरजेडी 25, कांग्रेस 6, सीपीआई माले 2, सीपीएम और आईआईपी एक-एक सीट पर विजयी रहे. इसके अलावे एआईएमआईएम को 5 और बहुजन समाज पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली है.

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Last Updated : November 20, 2025 at 4:09 PM IST