Explainer: असम के 5% वोट पर नीतीश कुमार की नजर, क्या BJP के लिए मुश्किलें बढ़ाएगा JDU?
बीजेपी से गठबंधन नहीं हुआ तो भी जेडीयू असम में विधानसभा चुनाव लड़ेगी. नीतीश कुमार की नजर 5% वोट पर है. पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट..

Published : February 12, 2026 at 8:50 PM IST
- रिपोर्ट: अविनाश कुमार
पटना: इसी साल असम में विधानसभा का चुनाव होना है, वहां 10 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. बिहार की सत्ताधारी दल जेडीयू की तरफ से कोशिश हो रही है कि बीजेपी के साथ गठबंधन हो जाए. 2021 में नीतीश कुमार की पार्टी ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन किसी सीट पर जीत नहीं मिली. असम प्रभारी राजीव रंजन का कहना है कि इस बार बीजेपी अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, इसलिए गठबंधन की संभावना कम है लेकिन हम लोग कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.
असम में जेडीयू का निराशाजनक प्रदर्शन: 2021 में जेडीयू ने असम में कुल 126 विधानसभा सीटों में से 37 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. अधिकांश सीटों पर जेडीयू की जमानत जब्त हो गई थी. जेडीयू के उम्मीदवार 1,000 वोट भी हासिल नहीं कर सके. असम में जेडीयू के प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस सीट पर सबसे ज्यादा उम्मीद थी, उसमें से रूपोहिहाट निर्वाचन क्षेत्र में केवल 478 वोट मिला. ढींग में जेडीयू उम्मीदवार को केवल 767 वोट मिला और बतद्रोबा में केवल 815 वोट मिला.
असम चुनाव के लिए जेडीयू की रणनीति: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2021 में चुनाव प्रचार में नहीं गए थे लेकिन पार्टी के कई मंत्री चुनाव प्रचार में कूदे थे. सबसे नजदीकी मंत्रियों में से एक श्रवण कुमार ने भी कई दिनों तक चुनाव प्रचार किया था. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी असम में कैंप किया था. जेडीयू को बहुत उम्मीद थी कि असम में खाता खुलेगा लेकिन खाता नहीं खुला. 2021 विधानसभा चुनाव से पहले भी जेडीयू की तरफ से कई बार कोशिश की गई लेकिन न तो खाता खुला और न ही वोट प्रतिशत बेहतर हुआ. अब एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में जेडीयू तैयारी कर रहा है. सीटों को लेकर फिलहाल मंथन चल रहा है.
"बड़ी संख्या में बिहार के लोग असम में रहते हैं, रोजी रोजगार कर रहे हैं. जब चुनाव होगा, तब उनकी भूमिका बढ़ेगी. पार्टी के वरिष्ठ नेता बातचीत कर रहे हैं. जैसे ही हम लोगों को जानकारी दी जाएगी, हम लोग असम हो या बंगाल चुनाव प्रचार के लिए निकल जाएंगे."- श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री, बिहार

अकेले या बीजेपी के साथ गठबंधन?: दिल्ली में असम चुनाव को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन कर रहे हैं. अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पाया है. हालांकि बीजेपी के साथ गठबंधन की गुंजाइश बेहद कम है. असम प्रभारी राजीव रंजन कहते हैं कि बीजेपी इस बार अकेले लड़ना चाहती है. लिहाजा हमलोग अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेंगे, इसकी तैयारी चल रही है.

कितनी सीटों पर लड़ेगा जेडीयू?: इस सवाल पर कि पिछली बार जेडीयू 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था, क्या इस बार भी उतनी ही सीटों पर लड़ेंगे? राजीव रंजन ने कहा कि इस बार हम लोग इतनी सीटों पर तो नहीं लड़ेंगे लेकिन महत्वपूर्ण सीटों पर जरूर मजबूती से चुनाव लड़ेंगे.

असम में हम लोग गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं लेकिन गठबंधन होने की संभावना कम है, क्योंकि भाजपा अकेले चुनाव लड़ना चाहती है. पिछली बार से कम लेकिन मजबूत सीटों पर जरूर लड़ेंगे."- राजीव रंजन, जेडीयू प्रभारी, असम
किन मतदाताओं पर फोकस?: जेडीयू प्रभारी राजीव रंजन ने कहा कि असम में भी बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं. ऐसे में हम लोग अभी उन सीटों को लेकर चर्चा कर रहे हैं. फिलहाल उन सीटों के नाम को बताना संभव नहीं है लेकिन जल्द ही हम लोग सारी जानकारी मीडिया के साथ साझा करेंगे.

सहयोगी दल बीजेपी के साथ: बिहार में सत्ता में सहयोगी जेडीयू के अलावे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी है. उपेंद्र कुशवाहा के विधायक माधव आनंद का कहना है कि हम लोग असम में बीजेपी के साथ हैं. संगठन पर भी काम हो रहा है. माधव आनंद के बयान से साफ लग रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी असम में चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है. बीजेपी को ही अपना समर्थन देगी.
5% वोट पर जेडीयू की नजर: असम में 5% के करीब बिहारी और हिंदी भाषी वोटर हैं. इसी वोटर पर नीतीश कुमार और बिहार के प्रमुख दलों की नजर रहती है. असम की तिनसुकिया जिला में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी और उसमें भी बिहारी की संख्या अच्छी खासी है. तिनसुकिया जिले के 1100 गांव में से 300 गांव में बिहार और यूपी के लोगों की बहुलता है. तिनसुकिया से बिहार के भोजपुर के रहने वाले शिव शंभू ओझा कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं. तिनसुकिया को मिनी बिहार के नाम से भी जाना जाता है.

2021 चुनाव में आरजेडी ने भी बिहार के भागलपुर की रहने वाली हीरा देवी को चुनाव मैदान में उतारा था. हालांकि जीत नहीं मिली. तिनसुकिया में बिहार के लोग चुनाव के जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं. हमेशा से बिहार के प्रमुख दलों की इस सीट पर नजर रहती है. जेडीयू की भी इस पर नजर है.
25 सीटों पर हिंदी भाषियों का प्रभाव: असम की 126 विधानसभा सीटों में से 25 सीटें ऐसी हैं, जिस पर हिंदी भाषी हार-जीत तय करते हैं. कोकराझार पूर्वी, गोलाघाट, जोरहट, कलियाबोर, टिओक, लहरियाघाट, बारछला, दुधानी, ढुबरी, गौरीपुर, राहा, मारीगांव, गोलपारा पूर्वी, अभयपुरी उत्तरी, दिगबोई, नाओबईछा, बोंगाईगांव, डलगांव, दिसपुर, गुवाहाटी पूर्व, बिस्वनाथ, लखीपुर, सोनारी, नलबाड़ी और ढींग जैसी विधानसभा सीटों पर हिंदीभाषियों की अहम भूमिका मानी जाती है.

जेडीयू का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा नहीं रहा: जेडीयू ने 2006 में 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारा था. सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. जदयू को कुल 12,337 वोटों के साथ 0.1 % वोट मिले. इसके बाद 2011 में सिर्फ 2 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन दोनो सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और कुल 3,020 वोट मिला. वोट प्रतिशत जीरो रहा. 2016 में 4 उम्मीदवार उतारे थे, चारों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.

राहत की बात ही रही कि बिस्वनाथ और लखीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहे.लखीपुर विधानसभा सीट पर तो जेडीयू उम्मीदवार को 8.3 फीसदी वोट प्रतिशत के साथ 8,923 वोट मिले थे. वहीं सभी 4 विधानसभा सीटों पर जेडीयू को 12,538 वोटों के साथ 0.1 वोट प्रतिशत हासिल हुए थे. वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में जेडीयू ने 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन किसी पर खाता नहीं खुला. अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार को 1000 से भी कम वोट मिला.
क्या कहते हैं जानकार?: राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि जेडीयू का संगठन बिहार के अलावे दूसरे राज्यों में बहुत बेहतर नहीं है. जिन राज्यों में चुनाव होता है, वहां जेडीयू की कोशिश बीजेपी के साथ कुछ सीटों पर गठबंधन की होती है. इससे पहले दिल्ली और झारखंड में कुछ सीटों पर समझौता हुआ था. दिल्ली में एक सीट लड़ी लेकिन सफलता नहीं मिली. वहीं गठबंधन के तहत झारखंड में जेडीयू को बीजेपी ने दो सीट दी थी, इसमें से एक सीट पर जीत मिली. अब जेडीयू की नजर बंगाल के साथ असम पर भी है लेकिन लगता नहीं है कि बीजेपी समझौता करेगी.

"भाजपा उन्ही दलों के साथ तालमेल करती रही है, जहां वह पार्टी मजबूत स्थिति में हो और जदयू का असम में बहुत मजबूत संगठन नहीं है. इसीलिए बीजेपी फिलहाल जदयू के साथ गठबंधन करने से बच रही है लेकिन जदयू के तरफ से अंत अंत तक कोशिश जरूर होगी. नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा रही है जदयू को राष्ट्रीय पार्टी बनाने की. यह सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है. अब असम और बंगाल में चुनाव हो रहा है तो दोनों जगह जदयू की नजर है."- प्रिय रंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ
2021 में बनी बीजेपी की सरकार: 2021 के असम विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी. 126 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी को 60 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि गठबंधन को 68 सीटों पर सफलता मिली. कांग्रेस को 29 सीटों से संतोष करना पड़ा.
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