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हिजाब विवाद: क्या नुसरत ज्वाइन करेंगी सरकारी नौकरी? जानें कब-कब विवादों में घिरे नीतीश कुमार

कई बार नीतीश कुमार का बर्ताव विवादों से घिर जाता है. अब एक नया विवाद हिजाब खींचने को लेकर शुरू हो गया है.

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फिर विवादों में घिरे नीतीश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 18, 2025 at 7:45 PM IST

11 Min Read
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पटना : तारीख 15 दिसंबर 2025, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों स्वास्थ्य विभाग के नवनियुक्त डॉक्टर को नियुक्ति पत्र दी जा रही थी. उस समय कतार में खड़ी कोलकाता से आई डॉ नुसरत परवीन को यह महसूस नहीं हुआ होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके साथ कुछ ऐसा कर देंगे कि पूरे देश में वह वायरल हो जाएंगी. कई समाचार पत्रों के अनुसार अब नुसरत सरकारी नौकरी ज्वॉइन नहीं करना चाहती हैं. वहीं सूत्रों के अनुसार सीएम आवास में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में नुसरत को नौकरी ज्वॉइन कराने के जिम्मा दिया गया है.

मुस्लिम महिला का नीतीश ने खींचा हिजाब : दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियुक्ति पत्र देने के साथ ही डॉक्टर नुसरत परवीन के चेहरे से हिजाब हटाने की कोशिश की. इस मामले में राजनीति खूब हो रही है, लोगों ने बवाल मचाया है और अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, लेकिन किसी भी धार्मिक संगठन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

JDU ने क्या कहा?: नीतीश कुमार पिछले साल से लेकर अब तक इस तरह की कई घटनाएं कर चुके हैं. हालांकि जनता दल यूनाइटेड की तरफ से डॉक्टर नुसरत परवीन के मामले को एक आदर्श मामला बताया जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया जा रहा है. जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कड़े शब्दों में इस बात को दोहराया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छोटी सी घटना से नीतीश कुमार के किए गए कार्यों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है.

"मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुस्लिम महिलाओं के तालीम, सुरक्षा और सम्मान की पूरी व्यवस्था बिहार में की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को काम से आंका जाना चाहिए ना की कोई भी छिटपुट घटना से उनके पूरे व्यक्तित्व और उनके पूरे कार्यकाल को देखा जाना चाहिए."- नीरज कुमार, मुख्य प्रवक्ता, जेडीयू

जमा खान ने किया बचाव: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान भी सीएम नीतीश के बचाव में उतर आए हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री संभवतः उस युवती के पिता से भी अधिक उम्र के हैं. मेरी भी एक बेटी है और मैं यह महसूस कर सकता हूं कि मुख्यमंत्री ने किस पितृतुल्य स्नेह के भाव से ऐसा किया.

"सीएम केवल यह दिखाना चाहते थे कि अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियां भी बिहार में आगे बढ़ रही है. कीचड़ उछालने वाले लोग उस लड़की को भी शर्मिंदगी का शिकार बना रहे हैं."- जमा खान, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, बिहार

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि "एक्सीडेंटली ऐसा हुआ होगा. बेटी समझकर उन्होंने ऐसी चीज की होगी कि काम करने जा रहे हो तो हिजाब लगाने की क्या जरूरत है. उनका इरादा खराब नहीं था. इसे धर्म के चश्मे से नहीं देखना चाहिए."

नुसरत परवीन की ज्वॉइनिंग पर सस्पेंस : 15 दिसंबर को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान, नीतीश कुमार ने कथित तौर पर एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब बिना सहमति के खींच दिया. स्थानीय समाचार पत्रों के अनुसार अब नुसरत परवीन ने सरकारी नौकरी ज्वॉइन नहीं करने का मन बना लिया है.

स्वास्थ्य विभाग को नुसरत की ज्वॉइनिंग का जिम्मा- सूत्र: जानकारी के अनुसार महिला चिकित्सक नुसरत अपने परिवार के पास कोलकाता चली गई है और जो खबर आ रही है कि महिला चिकित्सक ने घटना के बाद नौकरी ज्वाइन नहीं करने की बात कही है. वहीं सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, मुख्यमंत्री आवास में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया था. महिला आयुष चिकित्सक को नौकरी ज्वाइन कराने की जिम्मेदारी देने की खबर आ रही है.

बढ़ायी गई सीएम की सुरक्षा: दूसरी तरफ बिहार के डीजीपी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर समीक्षा भी की है. ऐसे तो मुख्यमंत्री की सुरक्षा पहले से ही काफी सख्त है. एसएसजी के ट्रेंड जवान आधुनिक हथियारों के साथ मुख्यमंत्री की सुरक्षा में 24 घंटे लगे रहते हैं. मुख्यमंत्री के पास चुनिंदा लोग ही जाते हैं, अब हिजाब मामले के बाद जिस प्रकार से विरोध जताया जा रहा है, धमकी दी जा रही है मुख्यमंत्री की सुरक्षा और सख्त करने का निर्देश दिया गया है.

दूसरे राज्यों में छिड़ी बड़ी बहस: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस घटना को लेकर दूसरे दूसरे राज्यों में बड़ी प्रतिक्रियाएं चल रही हैं. कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र तक के नेता इस कांड पर अपनी राय दे रहें है. हालांकि बिहार में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा है. जो भी दूसरी पार्टियां हैं वह सधे शब्दों में ही अपने बयान को दे रही हैं.

पाकिस्तान से नीतीश को धमकी: राजद ने नीतीश कुमार के स्वास्थ्य का हवाला दिया है तो, वहीं भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास के कार्यों को गिना रही है. उनके 20 साल के मुख्यमंत्री काल को स्वर्णिम काल बता रही है. उधर, इस घटना को लेकर पाकिस्तान के एक शख्स ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धमकी दी थी.

अब सिर्फ तीन नियुक्ति पत्र बांटेंगे सीएम: पाकिस्तान से मिली धमकी के खिलाफ बिहार के आर्थिक अपराध इकाई में मामला दर्ज किया गया है. इधर, बिहार सरकार ने तय किया है कि अब जब भी कभी नियुक्ति पत्र बांटी जाएगी तो, मुख्यमंत्री महज सिंबॉलिक तीन ही लोगों को नियुक्ति पत्र देंगे, बाकी नियुक्ति पत्र अधिकारी बांटेगे.

राजनीतिक जानकार का क्या मानना है?: राजनीतिक जानकार कुमार राघवेंद्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का व्यक्तित्व बहुत ही सादा और सधा हुआ रहा है. राजनीति में पूरे सिद्धांत के साथ रहे हैं. पिछले 45 सालों की राजनीति को देखा जाए तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस तरह के कोई भी आरोप नहीं लगे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उम्र 70 साल से ऊपर की हो गई है.

"वह (नीतीश कुमार) यदि किसी डॉक्टर से अपने चेहरे को दिखाने की बात कहते हैं तो, इसे गंभीरता से नहीं लेनी चाहिए. चुकी बवाल इस बात पर मचा है कि उन्होंने उस हिसाब को खींच दिया था. हालांकि एक डॉक्टर के लिए जो नौकरी करने की तैयारी कर रही है, उसे अपना चेहरा खोलकर ही जाना चाहिए. यह एक प्रक्रिया भी होती है. अधिकारियों को ही इस पर ध्यान देना चाहिए था."- कुमार राघवेंद्र, राजनीतिक जानकार

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इन बड़े विवादों में घिरे नीतीश: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2025 में भी अजीबोगरीब घटनाएं की हैं, जो सुर्खियों में बना रहा. 19 मार्च, 2025 को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की ओर इशारा करते हुए पूछा कि उन्होंने दाढ़ी क्यों नहीं बनाई है? 5 जून, 2025 को दरभंगा एक कार्यक्रम के दौरान, नीतीश कुमार ने मंच से जिला मजिस्ट्रेट कौशल किशोर को ढूंढने के लिए अपना भाषण रोक दिया, इस हावभाव से दर्शकों में हंसी की लहर दौड़ गई.

राष्ट्रगान के अपमान का लग चुका है आरोप: 26 मई, 2025 को पटना के ललित नारायण मिश्रा संस्थान में नियुक्ति पत्र वितरित करते समय, नीतीश ने अटपटे हावभाव दिखाए और समय से पहले ही कुछ अलग एक्टिविटी कर दीं. 20 मार्च 2025 को सेपक टकरा विश्व कप के दौरान नीतीश कुमार राष्ट्रगान से ठीक पहले अचानक मंच छोड़कर चले गए, जिससे उपस्थित लोग आश्चर्यचकित रह गए. विपक्षी नेताओं ने उन पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया.

रमा निषाद को पहनाया था माला: 21 अगस्त 2025 में बिहार मदरसा शिक्षा बोर्ड के शताब्दी समारोह में जब उन्हें पारंपरिक टोपी भेंट की गई तो उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया और अंततः उसे अपने एक सहकर्मी के सिर पर रख दिया. 2 अक्टूबर 2025 को मुजफ्फरपुर चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार ने भाजपा उम्मीदवार रमा निषाद को माला पहनाने का प्रयास किया. सांसद संजय झा ने उन्हें बीच में ही रोक दिया, लेकिन नीतीश फिर भी आगे बढ़े.

5 अक्टूबर, 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान नीतीश कुमार लगभग 38 सेकंड तक लगातार "नमस्ते" का इशारा करते हुए दिखाई दे रहे हैं. 13 दिसंबर 2025 को बिहार विधानसभा अध्यक्ष चुनाव के समय नए अध्यक्ष प्रेम कुमार को बधाई देने के बाद, नीतीश ने तेजस्वी यादव से मजाकिया अंदाज में कहा, "अरे, खड़े हो जाओ भाई!" जिसके बाद सभी विधायक खड़े हो गए.

गिरिराज सिंह ने क्या कहा?: वहीं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक मुस्लिम महिला का हिजाब हटाने की कोशिश करने वाले वायरल वीडियो पर कहा," नीतीश कुमार ने कुछ भी गलत नहीं किया है. अगर वे नियुक्ति पत्र बांट रहे थे, तो क्या कोई हिजाब पहनकर नियुक्ति पत्र लेगा?.आजकल हर चीज को इस्लाम से जोड़ने की नई परंपरा हो गई है."

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि संजय निषाद ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है, वह बहुत ही गलत है. गिरिराज सिंह और संजय निषाद को माफी मांगनी चाहिए. मैं समझता हूं कि नीतीश कुमार का इरादा गलत नहीं था. पहले ही ये प्रकरण खत्म हो चुका था.

"इसके बाद संजय निषाद जिस तरह की बात कर रहे हैं, क्या उनके घर में मां-बेटी नहीं है? या उन्हें लोक लाज नहीं है?. उन्होंने (नीतीश कुमार) जो किया वह उस समुदाय के लिए सही नहीं है लेकिन उनका इरादा गलत नहीं था."- पप्पू यादव, पूर्णिया सांसद

संजय निषाद ने क्या कहा था?: निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने एक निजी चैनल में कहा था कि बुर्का उतरने पर इतना बवाल क्यों हो रहा है, अगर कहीं और छू देते तो क्या होता. वह (नीतीश कुमार) भी तो आदमी है न.

नीतीश और संजय निषाद के खिलाफ परिवाद दायर: बिहार प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महासचिव मोहम्मद राजू नैयर ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) के न्यायालय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री संजय निषाद के विरुद्ध परिवाद दायर किया है. यह परिवाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 76, 79, 299, 302 एवं 352 के तहत दाखिल किया गया है.

"इस कथित घटना से महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं और वे स्वयं को अपमानित महसूस कर रही हैं. मुख्यमंत्री के इस कृत्य का समर्थन उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने अपने बयान के माध्यम से किया, जिससे आहत होकर मैंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है."- मोहम्मद राजू नैयर,परिवादी

"परिवाद सीजेएम कोर्ट में स्वीकार कर लिया गया है और न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जनवरी की तिथि निर्धारित की है."- सूरज कुमार, परिवादी के अधिवक्ता

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