कोशिशों के बावजूद निवेशकों को आकर्षित नहीं कर रहा बिहार, क्या है कारण?
उद्योग वार्ता से निवेशकों को बिहार की ओर आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन क्या इससे बिहार इंडस्ट्री हब बनेगा, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Published : January 2, 2026 at 9:02 PM IST
रिपोर्ट : अविनाश
पटना: नये साल में नीतीश सरकार के सामने बड़ी चुनौती बिहार को इंडस्ट्री हब बनाना. इसके लिए लक्ष्य के अनुसार 5 साल में 50 लाख करोड़ का निवेश जरूरी है, लेकिन इसको लेकर कई चुनौतियां है, जिसे सरकार अमल में नहीं ला रही है. निवेशकों के लिए मुफ्त जमीन, कई तरह की रियायतों की घोषणा के बावजूद कंपनियां बिहार आने से कतरा रही है. ऐसे में बिहार इंडस्ट्री हब कैसे बनेगा?
क्या कहती है रिपोर्ट?: उद्योग मामले के जानकार अर्थशास्त्री एनके चौधरी 2010 में फिक्की की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि '90% उद्योगपतियों ने कहा कि बिहार के अफसर का एटीट्यूड नेगेटिव है. नौकरशाह के भरोसे बिहार का औद्योगिकरण नहीं हो सकता है. यह तभी सफल होगा जब अधिकारियों की भूमिका को सीमित की जाए.
"बिहार में जब तक अफसर शाही रहेगी, तब तक उद्योगपति नहीं आने वाले हैं. मेरे समझ से सबसे बड़ा कारण बिहार के अधिकारी हैं. उनका एटीट्यूड सही नहीं है. नेगेटिव एटीट्यूड है." -एनके चौधरी, अर्थशास्त्री
'2005 से हो रही कोशिश': अर्थशास्त्री एनके चौधरी कहते हैं कि 2005 में पहली बार बिहार में उद्योग लगाने के लिए माहौल बनाने की कोशिश की गयी. एक के बाद एक कई उद्योग संवाद हुए. शुरू में उद्योगपतियों को लगा कि बिहार बदल रहा है. उस समय देश के उद्योगपति ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आए, लेकिन हकीकत में क्या हुआ है? धरातल पर उद्योग नहीं आए.
कहां कमी है?: एनके चौधरी का कहना है कि इसके लिए बिहार के उद्योगपतियों से मुख्यमंत्री को सीधे वार्ता करनी चाहिए. इनका मानना है कि पहले मुख्यमंत्री ऐसा करते थे. वह पीआर एक्सरसाइज था, लेकिन अब मुख्यमंत्री बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन नहीं जाते. चैंबर ऑफ कॉमर्स के उद्योगपतियों से बात नहीं करते. सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर उद्योगपति क्यों अधिकारियों का चक्कर लगाएंगे.

कैसे आएंगे निवेशक? एनके चौधरी ने कहा कि जमीन का मामला सबसे महत्वपूर्ण है. इसको लेकर फिर से पुनर्विचार करना चाहिए. चौधरी कहते हैं कि हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि जो उद्योगपति कहे उसे सरकार मान ले, लेकिन एक फ्रेंडली माहौल होना चाहिए. छोटी मोटी भूल यदि उद्योगपतियों से होती है तो उसे इग्नोर करना चाहिए. उद्योगपतियों को एक्सपर्ट कमेटी का अध्यक्ष बनना चाहिए. नौकरशाह को उद्योग का ज्ञान नहीं है. उद्योग के प्रति संवेदना भी नहीं है.
"बाहर के उद्योगपतियों का भरोसा जीतने के लिए पहले अपने राज्य के उद्योगपतियों को सम्मान देना होगा, तभी बाहर अच्छा मैसेज जाएगा. उद्योग का बजट भी बढाना होगा. सरकार ने मुफ्त में जमीन देने की बात कही है तो निश्चित रूप से इसका लाभ होगा. जमीन तो सबसे बड़ी समस्या है. इसके इलेक्ट्रिसिटी भी उपलब्ध कराना होगा. जब तक औद्योगिकरण नहीं होगा बिहार का विकास नहीं होगा." -एनके चौधरी, अर्थशास्त्री
एक बार फिर कोशिश: बता दें कि बिहार में निवेशकों को लाने के लिए कई स्तर पर प्रयास हो रहे हैं. 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद से देश-विदेश के उद्योगपतियों को उस समय भी बुलाया गया. आश्वासन भी मिला, लेकिन जमीन पर उद्योग नहीं लगे. बिहार चुनाव 2025 में जीत के बाद प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश के लिए आह्वन किया है. इस बार सरकार ने एक करोड़ नौकरी रोजगार का वादा किया है. सभी जिलों में उद्योग का जाल बिछाने का भी वादा किया है.

उद्योग वार्ता की जा रही: इसलिए इस बार सरकार के तरफ से कई स्तर पर कोशिश हो रही है. मुख्य सचिव के स्तर पर उद्योग वार्ता भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में निवेशक कई क्षेत्रों में निवेश के लिए अपनी रुचि भी दिखाई है, लेकिन बिहार के अर्थशास्त्रीय और उद्योगपति साफ कह रहे हैं कि 'बिहार ऐसे ही देश का नंबर वन निवेशक राज्य नहीं बनेगा. इसके लिए अफरशाही खत्म करना होगा.'
उद्योग वार्ता से माहौल बनाने की कोशिश: बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत उद्योग वार्ता के माध्यम से उद्योगपतियों से संवाद कर बिहार को नया इंडस्ट्रियल हब बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले साल दिसंबर में जब प्रत्यय अमृत ने उद्योग वार्ता की थी तब 32 निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे. 6 प्रमुख सेक्टर में निवेशकों ने रुचि दिखाई थी.
6 प्रमुख सेक्टर कौन-कौन?: 6 प्रमुख सेक्टर में, डेयरी और दूध उत्पादन उद्योग, विहार फिल्म सिटी प्रोजेक्ट में निवेश, इलेक्ट्रिकल उत्पाद निर्माण इकाई, फर्नीचर, शिक्षण संस्थान और हेल्थ केयर सेक्टर, लेदर गुड्स निर्माण और निर्यात इकाई, गन्ना उद्योग के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव भी आए थे.
इलेक्ट्रिक बस निर्माण का प्रस्ताव: अशोक लेलैंड के तरफ से इलेक्ट्रिक बस निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया था. इसी तरह कोका कोला के तरफ से भी पहल की गई थी. नए साल के दूसरे दिन मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने एक बार फिर से उद्योग वार्ता की और 12 उद्यमियों के साथ संवाद किया. उनकी समस्याओं को सुना. मुख्य सचिव उद्योग वार्ता के माध्यम से उद्योगपतियों की समस्याओं को जल्द से जल्द निदान हो इसकी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इतना काफी नहीं है.
इस बार नहीं तो कभी नहीं: बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान का कहना है कि बिहार में माहौल बन रहा है. लोग आ भी रहे हैं. कुछ निवेश हुआ भी है, लेकिन रिजल्ट आने में अभी काफी समय लगेगा. सरकार जो पॉलिसी बनाती है, चाहे पुरानी पालिसी ही क्यों न हो. उसे सही ढंग से जरूर लागू करे. सरकार को अपना वादा भी पूरा करना होगा.
"सरकार ने पिछले 10 साल में बिहार के उद्योगपतियों को अनुदान राशि नहीं उपलब्ध कराई है. ऐसा नहीं है कि यह बहुत बड़ी राशि है. 400 करोड़ के आसपास यह राशि होगी. इसको सरकार को उपलब्ध करा देना चाहिए. इससे अच्छा मैसेज जाएगा. मेरा मानना है, इस बार नहीं तो कभी नहीं." - रामलाल खेतान, अध्यक्ष, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
'सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए': उद्योगपति केपीएस केसरी का कहना जब अधिकारी ही उद्योग चलाएंगे तो उद्योग विभाग क्या करेगा? उद्योग विभाग के मंत्री क्या करेंगे? बिहार के उद्योगपतियों की नाराजगी अधिकारियों को अधिक हस्तक्षेप पर है. सरकार ने 10 साल से अनुदान नहीं दिया है. अब फिर से स्कीम ला रही है. पहले जो वादा किया गया उसे तो पूरा करना चाहिये. बिहार के जो उद्योग विभाग के सचिव में है, उनके ऊपर कई जिम्मेवारियां दे दी गई है.

नीतीश सरकार का दावा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा करते रहे हैं कि 2005 में बिहार में औद्योगिक क्षेत्र की संख्या केवल 46 थी जो अब बढ़कर 94 हो गई है. सरकार हर तरह की सुविधा उद्योगपतियों को देने के लिए तैयार है. वहीं, बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल का कहना है कि बिहार में अब सड़के अच्छी हैं, बिजली की समस्या नहीं है. सस्ता कामगार हैं. सरकार मुफ्त में जमीन तक उपलब्ध करा रही है. प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया है.
"उद्योग में निवेश को लेकर सरकार हर स्तर पर काम कर रही है. इसलिए इस बार स्थिति बदलेगी. बिहार में बड़े पैमाने पर उद्योग लगेंगे. इससे बिहार के युवाओं को रोजगार मिलेगा. उन्हें पलायन नहीं करना पड़ेगा." -दिलीप जायसवाल, उद्योग मंत्री, बिहार
सरकार की तैयारी?: बिहार में अगले 5 साल में 50 लाख करोड़ की निवेश लाने की तैयारी है. 10 औद्योगिक पार्क और स्वच्छ लघु एवं मध्यम उद्यम पार्क विकसित करना है. निवेश के लिए देश के सिर्फ पांच निवेश अनुकूल राज्यों में शामिल करना लक्ष्य है. उद्योग विभाग देश दुनिया के प्रमुख वाणिज्यिक केद्रों में निवेशक सम्मेलन आयोजित करेगा. इससे बड़े उद्योगों को आकर्षित करना आसान होगा. कौशल विश्वविद्यालय के माध्यम से बिहार के युवाओं को ट्रेंड करने की तैयारी है ताकि कंपनियों में उनकी नियुक्ती हो सके.

बिहार में कई पॉलिसी लायी गयी: पूर्व उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा के कार्यकाल में बिहार में कई पॉलिसी लायी गयी. बिहार एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2024, बिहार परचेज प्रेफरेंस पॉलिसी 2024, बिहार टैक्सटाइल एंड लेदर पॉलिसी 2024, बिहार बायो फ्यूल्स प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी 2025, बियाडा एक्जिट पॉलिसी 2025, साथ ही बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पैकेज 2025 भी लाया गया. इसके साथ 1 ब्लॉक 1 प्रोडक्ट स्कीम भी लॉन्च किया गया. 2024 दिसंबर में इन्वेस्टर मीट में 1.8 लाख करोड़ के निवेश के प्रस्ताव भी आए थे.
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