नीतीश कैबिनेट में राजपूतों का दबदबा! दलित और महिलाओं की बढ़ी भागीदारी, जानें किस जाति से कितने मंत्री?
बिहार की नीतीश कैबिनेट में जाति और क्षेत्र का ख्याल रखा गया है. आगे रिपोर्ट में पढ़ें कि किस वर्ग से कितने मंत्री बने हैं.

Published : November 20, 2025 at 5:42 PM IST
रिपोर्ट: अविनाश कुमार
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचंड जीत के बाद भव्य तरीके से पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली. उनके साथ 26 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली. मंत्रिमंडल में जाति समीकरण के साथ सामाजिक समीकरण का भी पूरा ख्याल रखा है. पिछड़ा-अति पिछड़ा, सवर्ण और अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है.
सभी वर्ग को साधने की कोशिश: नीतीश मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा ओबीसी और ईबीसी समाज से मंत्री बनाए गए हैं. नीतीश कुमार के साथ कुल 14 मंत्री पिछड़े-अति पिछड़े समाज से आते हैं. बीजेपी ने 8, जेडीयू ने 3 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एक मंत्री बनाया है. नीतीश मंत्रिमंडल में 5 दलित मंत्रियों को भी जगह दी गई है. इनमें जेडीयू से 2, बीजेपी-एलजेपीआर और हम पार्टी से एक-एक मंत्री शामिल हैं.

राजपूत समाज का दबदबा: वहीं, अपर कास्ट की बात करें तो 8 मंत्री इस वर्ग से बनाए गए हैं. सबसे अधिक राजपूत जाति के मंत्री बने हैं. चार राजपूत जाति से आने वाले को मंत्री बनाया गया है. भूमिहार से 2, ब्राह्मण और कायस्थ से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं. वहीं, मुस्लिम समाज से भी एक मंत्री बनाए गए हैं. जेडीयू के टिकट पर चैनपुर से विधायक जमा खान को फिर से मंत्री बनाया गया है.
क्षेत्रों को भी साधने की कोशिश: मंत्रिमंडल में मिथिलांचल से 3 और सीमांचल से 2 बनाए गए हैं. मुंगेर प्रमंडल से दोनों उपमुख्यमंत्री और एक मंत्री बनाए गए हैं. शाहाबाद और भोजपुर इलाके से भी नुमाइंदगी है. आरा से बीजेपी विधायक संजय टाइगर को इस बार मौका मिला है. पटना प्रमंडल से सबसे अधिक मंत्री बनाए गए हैं. पटना जिले से 2 और नालंदा जिले से एक मंत्री बने हैं. वहीं, कोसी प्रमंडल से बिजेंद्र यादव और मगध क्षेत्र से संतोष सुमन को मौका दिया गया है. मंत्रिमंडल में तिरहुत प्रमंडल से से भी कई मंत्रियों को जगह दी गई है.

संतुलित है नीतीश मंत्रिमंडल: राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि नीतीश कुमार सोशल इंजीनियरिंग के मास्टर माने जाते हैं और अमित शाह तो बीजेपी के चाणक्य हैं, इसलिए सभी वर्गों को मंत्रिमंडल में जगह देने की कोशिश की गई है. जिस वर्ग से सबसे अधिक विधायक हैं, उन्हें उसी हिसाब से मौका दिया गया है. वे कहते हैं कि कोई ऐसा वर्ग नहीं है, जिसको छोड़ा गया है. अति पिछड़ा और पिछड़ा पर ज्यादा फोकस दिया गया है. सबसे बड़ी बात कि मंत्रिमंडल में तीन महिला मंत्रियों को भी जगह मिली है.

"सबको खुश नहीं किया जा सकता है लेकिन संतुलन बनाने की कोशिश जरूर की गई है. राजपूत और दलित को सबसे अधिक जगह मंत्रिमंडल में दी गई है. वहीं नीतीश कुमार के लव-कुश समीकरण का भी ध्यान रखा गया है. इस वर्ग से पांच मंत्री बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो खुद कुर्मी समाज से आते हैं. यादव वर्ग से भी दो मंत्री बनाए गए हैं. मुस्लिम से एकमात्र विधायक को मौका मिला है."- प्रिय रंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ
#WATCH पटना, बिहार: नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य NDA नेताओं की मौजूदगी में गांधी मैदान में 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 20, 2025
(सोर्स: DD न्यूज़) pic.twitter.com/J2kwIZvNBj
सबको साथ लेकर चलने का प्रयास: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे का कहना है कि बीजेपी तो एक चुनाव खत्म होता है, दूसरी की तैयारी में लग जाती है. इसी का परिणाम है कि केंद्र के साथ-साथ आज देश के अधिकांश राज्यों में बीजेपी की सरकार है. बिहार मंत्रिमंडल में भी सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है. कुछ पुराने मंत्रियों को हटाया गया है तो उनमें नाराजगी भी हो सकती है तो कुछ नए चेहरे को जगा दिया गया है, उनमें खुशी भी देखने को मिलेगी. पुराने और नए चेहरों को साथ लेकर चलने की बीजेपी ने कोशिश की है.

नीतीश को पुरानी टीम पर विश्वास: वहीं, नीतीश कुमार की अपनी सोशल इंजीनियरिंग है. वह बहुत ज्यादा प्रयोग नहीं करते हैं. इस बार भी मंत्रिमंडल में उनकी तरफ से जो पुराने प्रयोग किए हुए लोग हैं, उन्हीं को जगह दी है. इनमें से अधिकांश नीतीश कुमार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले लोग हैं. सुनील पांडे ने कहा कि अपर कास्ट की बात करें तो कायस्थ वर्ग से बीजेपी ने मंत्रिमंडल में फिर से नितिन नबीन को जगह दी गई है. अपर कास्ट में ब्राह्मण की आबादी सबसे अधिक है, उस हिसाब से देखें तो एक मात्र मंत्री पद दिया गया है, जबकि यह वर्ग एनडीए और बीजेपी को वोट करता है. अपर कास्ट में मंत्रिमंडल में राजपूत जाति का दबदबा है.

परिवारवाद पर जवाब देना होगा मुश्किल: सुनील पांडे कहते हैं कि जिस प्रकार से उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनाया है, वैसे में परिवारवाद पर बीजेपी के लिए भी जवाब देना मुश्किल होगा. वे कहते हैं कि जिस प्रकार से नीतीश कुमार और बीजेपी के नेता लालू प्रसाद यादव पर हमला करते हैं, ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को मंत्रिमंडल में जगह देकर नीतीश कुमार, बीजेपी और खुद उपेंद्र कुशवाहा के लिए जवाब देना मुश्किल होगा. वहीं प्रधानमंत्री ने नए 'एमवाई' समीकरण की बात की है. उसके तहत महिला और युवा को भी जगह दी गई है.

"टिकट बंटवारे से लेकर मंत्रिमंडल गठन तक बीजेपी की यही खासियत है. अपने साथी दलों के साथ जातीय और सामाजिक समीकरण को साधने के लिए रणनीति तैयार करती है. इस बार भी जातीय सामाजिक क्षेत्रीय और संस्कृतिक समीकरण को साधने की कोशिश की गई है. मंत्रिमंडल में एमवाई समीकरण को भी ध्यान में रखा गया है. पिछड़ा-अति पिछड़ा दलित और अपर कास्ट को भी."- सुनील पांडे, वरिष्ठ पत्रकार

फिलहाल 9 मंत्री पद खाली: बिहार विधानसभा में 243 सीट है. ऐसे में अधिकतम 36 मंत्री बनाये जा सकते हैं. अभी नीतीश कुमार और सभी मंत्रियों को जोड़ लें तो 27 मंत्री ही बनाए गए हैं. लिहाजा 9 और मंत्री बनाए जा सकते हैं. ऐसे में आने वाले समय में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और जिनको कम जगह दी गई है, उनको मौका दिया जा सकता है.
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