खरमास के बाद नीतीश मंत्रिमंडल में इन नए चेहरों को किया जाएगा शामिल! रेस में सबसे आगे ये विधायक
खरमास के बाद नीतीश मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा. बीजेपी के 4 और जेडीयू से 6 विधायकों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है.

Published : December 29, 2025 at 7:59 PM IST
रिपोर्ट: अविनाश कुमार
पटना: बिहार में अशुभ महीने के तौर पर खरमास माना जाता है. इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है. राजनीतिक दल इस महीने को काफी अहम मानते हैं और अपने सारे महत्वपूर्ण निर्णयों को खरमास के बाद ही मूर्त रूप देते हैं. 16 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ खरमास 14 जनवरी 2026 तक है. यानी कि 15 जनवरी से खरमास खत्म होने के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत होगी. ऐसे में 15 जनवरी के बाद बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है.
खरमास के बाद होगा नीतीश कैबिनेट का विस्तार!: बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार के अलावा 26 मंत्री बनाए गए थे, लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का भी इस्तीफा हो गया है. ऐसे में अब 25 मंत्री ही रह गये हैं.
JUD से 6 और BJP से 4 विधायकों को मिल सकती है जगह: बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं. ऐसे में अभी 10 मंत्री और नीतीश कुमार बना सकते हैं, जिसमें जदयू कोटे से 6 और भाजपा कोटे से चार मंत्री होंगे. चर्चाओं के अनुसार खरमास के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होगा.
पुराने मंत्रियों और नए चेहरों को मौका: दिल्ली दौरे में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी इस संबंध में बातचीत की है. जदयू- बीजेपी अपने कुछ पुराने मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में फिर से जगह दे सकता है तो वहीं कुछ नए चेहरे देखने को भी मिलेंगे नीतीश कुमार की नजर दूसरे दलों पर भी है तो मंत्रिमंडल में कुछ नया देखने को भी मिल सकता है.

10 और विधायकों को मिलेगा मौका: बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं तो वहीं विधान परिषद में भी 75 सदस्य हैं, जिसमें से चार सदस्यों का स्थान रिक्त पड़ा है. विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली है. विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से बिहार में 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं.
9 मंत्रियों का स्थान पहले से रिक्त: नीतीश कुमार जब 2024 में पाला बदलकर एनडीए में शामिल हुए थे. मंत्रिमंडल गठन और फिर जब विस्तार हुआ तब पहली बार मुख्यमंत्री सहित 36 मंत्री मंत्रिमंडल में थे. लेकिन इस बार एनडीए को मिली जबरदस्त जीत के बाद जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो मुख्यमंत्री सहित 27 मंत्री बनाए गए. 9 मंत्रियों का स्थान रिक्त रखा गया था.
नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली पदों की संख्या हुई 10: मुख्यमंत्री ने खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की बात कही थी. इस बीच बीजेपी ने नितिन नबीन को बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया. उसके बाद नितिन नबीन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. अब 10 मंत्री पद बिहार में खाली हो गए हैं.
पार्टीवार मंत्रियों की संख्या: पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिल चुके हैं. अभी जदयू के मुख्यमंत्री सहित 9 मंत्री हैं. वहीं भाजपा के 13 मंत्री हैं, जबकि लोजपा के दो और हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक-एक मंत्री बनाए गए हैं.

मंत्रिमंडल में जातीय और सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा गया है. सबसे अधिक ओबीसी वर्ग से आठ, सवर्ण से 8, कुर्मी कुशवाहा से 6 और दलित वर्ग से पांच मंत्री बनाए गए हैं. यदि जातीय हिसाब से देखें तो दलित से 5, राजपूत से 4, कुशवाहा से 3, कुर्मी से 2, वैश्य से 2, यादव से 2, मल्लाह से 2, भूमिहार से 2, ब्राह्मण ,कायस्थ, चंद्रवंशी और मुस्लिम से 1-1 विधायक को स्थान दिया गया है.
JDU के इन विधायकों के नाम पर चर्चा : जदयू ने पिछली बार के जिन मंत्रियों को मंत्री परिषद में शामिल नहीं किया है, उसमें से जयंत राज, रत्नेश सदा, महेश्वर हजारी, विजय मंडल, शीला कुमारी हैं, जो फिर से मंत्री बनने का सपना देख रहे हैं. फिलहाल मंत्री पद को लेकर कुछ भी बोलने से सभी बच रहे हैं. सबका यही कहना है कि नेता ही फैसला लेंगे. इनमें से कुछ को मौका जब मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो मिल सकता है. महेश्वर हजारी दावेदारों में सबसे आगे हैं. महिला में शीला कुमारी को भी जगह मिल सकती है.
BJP के इन विधायकों के नाम पर चर्चा: वहीं भाजपा ने जिन मंत्रियों को इस बार मंत्री परिषद में नहीं लिया है, उसमें नीतीश मिश्रा, रेणु देवी, जनक राम, संतोष सिंह, नीरज कुमार सिंह, केदार प्रसाद गुप्ता, हरि सहनी, राजू कुमार सिंह, मोतीलाल प्रसाद, कृष्ण कुमार मंटू, जीवेश कुमार और संजय सरागवी शामिल हैं.

संजय सरावगी को बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. मिथिलांचल से नीतीश मिश्रा की चर्चा सबसे अधिक है कि उन्हें मौका मिल सकता है. जदयू के साथ बीजेपी के जिन मंत्रियों को मंत्रिमंडल में इस बार जगह नहीं मिली उनमें से भी कई मंत्री बनने का सपना देख रहे हैं.
वर्तमान में नीतीश मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या: जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ था, उस समय 27 मंत्री बनाए गए थे, लेकिन नितिन नबीन के इस्तीफा के बाद अब 26 मंत्री हो गये हैं, जिसमें बीजेपी से 14 मंत्री बने थे, लेकिन नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद संख्या 13 हो गई है.
जिनको मंत्री बनाया गया है, उनमें कुशवाहा समाज से आने वाले मुंगेर जिले के तारापुर विधासभा क्षेत्र से सम्राट चौधरी, लखीसराय से भूमिहार वर्ग से आने वाले विजय सिन्हा, किशनगंज से वैश्य वर्ग के दिलीप जायसवाल, सिवान से ब्राह्मण समाज के मंगल पांडे के नाम शामिल हैं.
इसके साथ ही पटना से कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नवीन भी थे, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. कुशवाहा समाज के सुरेंद्र मेहता, राजपूत समाज से आने वाले संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह, सुढ़ी वर्ग के अरुण शंकर प्रसाद, यादव समाज के राम कृपाल यादव, पासवान के लखेंद्र पासवान, मल्लाह समाज के रमा निषाद और अति पिछड़ा वर्ग के नारायण शाह के नाम शामिल हैं.

JUD से बने 9 मंत्री: जेडीयू कोटे के कुल 9 मंत्री बने हैं. कुर्मी समाज से आने वाले नीतीश कुमार और श्रवण कुमार, यादव वर्ग के बिजेंद्र यादव, भूमिहार समजा के विजय चौधरी, मल्लाह के मदन सहनी, दलितों के नेता अशोक चौधरी और सुनील कुमार, राजपूत वर्गे से लेसी सिंह और मुस्लिन नेता जमा खान के नाम शामिल हैं.
एलजेपी (आर) को 2 पद: राजपूत वर्ग के संजय सिंह और पासवान समाज के संजय पासवान को मंत्री बनाया गया. वहीं हम को एक पद मिला. जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को मंत्री बनाया गया. आरएलएम को एक पद मिला. उपेंद्र कुशावाहा के बेटे को किसी सदन का सदस्य न रहने पर भी मंत्री बनाया गया.

प्रमंडल के हिसाब से मंत्रिमंडल में संख्या बढ़ सकती है: राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर प्रमोद कुमार का कहना है बिहार में खरमास के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार संभावित है. अभी 10 मंत्री पद खाली है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में प्रधानमंत्री से भी मिले हैं. ऐसे में खरमास के बाद जब मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तब जातीय सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा जाएगा.

"नीतीश कुमार प्रमंडल के हिसाब से प्रतिनिधित्व देते रहे हैं, जिन प्रमंडल से मंत्रियों की संख्या कम होगी तो वहां से खाली पदों पर भरने की कोशिश की जाएगी. इसके साथ ही जिन इलाकों से एनडीए को अधिक समर्थन मिलता रहा है तो वहां से भी प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है. मिथिलांचल में जबरदस्त समर्थन मिलता रहा है तो वहां से प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है."- प्रोफेसर प्रमोद कुमार, राजनीतिक विशेषज्ञ

प्रोफेसर प्रमोद कुमार बताते हैं, सारण और शाहाबाद के इलाके से भी प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा नीतीश कुमार सोशल इंजीनियरिंग के मास्टर माने जाते हैं. अमित शाह भी हैं तो बीजेपी भी समीकरण के हिसाब से मंत्री में जगह तय करेगी. मंत्रिमंडल में दलित वर्ग से मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इसके अलावा नितिन नबीन कायस्थ जाति से आते थे तो कायस्थ को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है.

अति पिछड़ा वर्ग को तवज्जो: साथ ही अति पिछड़ा वर्ग से भी मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. जदयू के मंत्रिमंडल में संख्या कम है तो उनका प्रतिनिधित्व बढ़ेगा. नितिन नबीन के इस्तीफा के बाद भाजपा के मंत्रियों की संख्या भी बढ़ेगी. चर्चा है विपक्षी दलों से भी कई विधायक सरकार में आना चाहते हैं तो विपक्षी दल के विधायकों की संख्या के हिसाब से उन्हें प्रतिनिधित्व मिल सकता है तो उसमें समीकरण बदल भी सकता है.
कई मंत्रियों पर अधिक बोझ: राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे का कहना है, कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं और चुनाव से पहले एनडीए ने जो लक्ष्य तय किया है उसे प्राप्त करने के लिए मंत्री परिषद का विस्तार जरूरी है. क्योंकि विजय कुमार सिन्हा, बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, दिलीप कुमार जायसवाल के पास एक से अधिक विभाग हैं और सभी बड़े विभाग हैं.

"बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास ऊर्जा विभाग, योजना विकास विभाग और वित्त विभाग जैसे बड़े विभाग हैं. दिलीप जायसवाल के पास उद्योग विभाग और पथ निर्माण विभाग जैसे बड़े विभाग हैं. ऐसे में खरमास के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार तय है. नितिन नबीन के इस्तीफा के बाद 10 मंत्री और बनाये जा सकते हैं. बीजेपी से चार और जदयू से 6 मंत्री और बनाए जाएंगे."- सुनील पांडेय, राजनीतिक विशेषज्ञ
विपक्ष पर भी है नजर: ऐसे तो बिहार में एनडीए के पास बहुमत से कहीं ज्यादा विधायक है, लेकिन इसके बावजूद सत्ता पक्ष की नजर विपक्षी दलों पर है. विपक्षी दलों में बड़े टूट के दावे भी होने लगे हैं. विपक्ष में विधायकों की संख्या सभी दलों को जोड़ दें तो केवल 41 है. इसमें राजद के 25, कांग्रेस के 6, एआईएमआईएम के 5, वाम दलों के तीन, बसपा के एक और एक आईआईपी के हैं.
इन विपक्ष के दलों पर सत्ता पक्ष की नजर है. चर्चा यह भी होती रही है कि नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल में जगह इसलिए रखा है कि दूसरे दलों को तोड़कर उन्हें अपने साथ मंत्री पद का प्रलोभन देकर ला सकते हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि चूड़ा दही भोज के बाद बिहार में बड़ा उलट फेर हो सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार भविष्य के चुनाव को ध्यान में रखकर भी किया जा सकता है.
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