खाकी छोड़ बने "करोड़पति", करनाल के निर्मल सिंह ने खड़ा किया करोड़ों का हाई-टेक डेयरी फार्म
हरियाणा के करनाल के निर्मल सिंह ने इजरायली तकनीक से करोड़ों का हाई-टेक डेयरी फार्म तैयार कर डाला है.

Published : May 30, 2026 at 7:09 PM IST
करनाल : आज के दौर में जहां युवा सरकारी नौकरी के लिए सालों मेहनत करते हैं, वहीं हरियाणा के करनाल जिले के बराना गांव के एक युवक ने कुछ अलग ही कहानी लिखी है. हरियाणा पुलिस में 10 साल तक देश की सेवा करने वाले निर्मल सिंह ने साल 2016 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके मन में कुछ बड़ा करने और समाज को मिलावट मुक्त शुद्ध दूध पहुंचाने का सपना था. इसी सपने के साथ उन्होंने डेयरी फार्मिंग की शुरुआत की और आज वे आधुनिक तकनीक के दम पर इस क्षेत्र में कामयाबी की नई इबारत लिख रहे हैं.
3 गायों से शुरुआत, आज 150 का कुनबा : निर्मल सिंह के परिवार में पिता, दादा-परदादा के समय से ही पारंपरिक तौर पर 3-4 गायें रखी जाती थीं. नौकरी छोड़ने के बाद निर्मल ने तय किया कि वे पारंपरिक ढर्रे से हटकर बड़े स्तर पर एक हाई-टेक डेयरी फार्म बनाएंगे. आज उनके फार्म पर छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 150 गायें हैं. उनका लक्ष्य साल 2030 तक इस आंकड़े को 400 गायों तक पहुंचाने का है.
फोन पर दिखती है हर गाय की सेहत : निर्मल सिंह के फार्म की सबसे बड़ी खासियत यहां इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक है. उन्होंने अपनी हर गाय के गले में एक विशेष इजरायली स्मार्ट टैग (Cow Collar Tag) लगाया हुआ है. ये टैग गाय के स्वास्थ्य, उसके उठने-बैठने, वो कितना खाना खा रही है, कितना पानी पी रही है, हर एक गतिविधि की सटीक मॉनिटरिंग करता है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा ये है कि निर्मल सिंह अगर देश से बाहर विदेश दौरे पर भी हों, तो भी उनकी गायों की पूरी रिपोर्ट उनके मोबाइल ऐप पर लाइव दिखती है. किसी भी गाय के बीमार होने से पहले ही ऐप पर अलर्ट आ जाता है, जिससे समय रहते उसका इलाज शुरू हो जाता है.

रोज़ाना 1 लाख तक की कमाई : शुरुआत में छोटा दिखने वाला ये बिजनेस आज एक बड़े कॉर्पोरेट मॉडल में बदल चुका है. मौजूदा समय में फार्म पर रोज़ाना करीब 1850 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. फार्म का एक दिन का अधिकतम रिकॉर्ड 2400 लीटर दूध का रहा है जिससे वे एक दिन में 1,15,000 रुपए तक बेच चुके हैं. मौजूदा समय में भी वे 80 से 90 हजार रुपए का दूध 1 दिन में बेच रहे हैं.

बड़ी कंपनियों को सप्लाई : इस शुद्ध दूध की सप्लाई आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ नेस्ले जैसी देश की दिग्गज डेयरी कंपनी को भी की जा रही है. उन्होंने कहा कि उनका दूध पिछले 10 सालों से कुरुक्षेत्र में ग्राहकों को सप्लाई हो रहा है. इतना ही नहीं वे अब दूध का प्रोडक्ट बनाकर भी बाजार में उतर चुके हैं.

'फाइव स्टार' मैनेजमेंट और वीआईपी ट्रीटमेंट : गायों की देखभाल के लिए निर्मल सिंह ने अपने फार्म पर पुख्ता इंतजाम किए हैं. दूध की गुणवत्ता और फैट को बनाए रखने के लिए गायों को विशेष तौर पर तैयार किया गया पौष्टिक पशु आहार(साइलेज) और मिक्सर फीड दिया जाता है. भीषण गर्मी से बचाने के लिए शेड के अंदर बड़े पंखे, ताजे पानी की व्यवस्था और फॉगर्स (फौव्वारे) लगाए गए हैं, ताकि तापमान नियंत्रित रहे. कैटेगरी के हिसाब से दूध देने वाली और बछड़ियों के लिए अलग-अलग शेड बनाए गए हैं. फार्म पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 2 पशु चिकित्सक और देखभाल के लिए 8 कर्मचारी तैनात रहते हैं.

मशीनी मिल्किंग : गायों का दूध दिन में तीन बार निकाला जाता है और ये काम पूरी तरह से आधुनिक मशीनों द्वारा किया जाता है, जिससे स्वच्छता बनी रहती है. मशीन से दूध निकालने में समय कम लगता है और दूध की गुणवत्ता भी बरकरार बनी रहती है.

67 लीटर दूध का रिकॉर्ड : निर्मल सिंह ने अपने फार्म पर मुख्य रूप से एचएफ (Holstein Friesian) नस्ल और मिक्स ब्रीड की गायें रखी हैं. उनके फार्म की अधिकांश गायें प्रतिदिन 40 लीटर से अधिक दूध देने की क्षमता रखती हैं, जबकि एक गाय ने रिकॉर्ड 67 लीटर दूध एक दिन में दिया है. अब निर्मल सिंह सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहते. वे गायों की नस्ल सुधारने पर काम कर रहे हैं. इसके लिए वे कई देशों का दौरा भी कर चुके हैं ताकि दुनिया की सबसे बेहतरीन डेयरी तकनीकों को हरियाणा के इस छोटे से गांव में लाकर भारतीय डेयरी उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा किया जा सके.

सरकारी नौकरी से ज्यादा पैसा : निर्मल सिंह की ये सफलता साबित करती है कि खेती और पशुपालन अब घाटे का सौदा नहीं हैं. अगर इसमें सही विज़न, कड़ा परिश्रम और आधुनिक तकनीक का तड़का लगा दिया जाए, तो ये सरकारी नौकरी से भी कहीं अधिक सम्मान और मुनाफा दे सकती है.



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