जींद के निहाल सिंह की मॉल्डोवा में मौत, ताबूत में घर लौटा शव, बहन ने दी मुखाग्नि
हरियाणा के जींद के रहने वाले निहाल सिंह की मॉल्डोवा में नदी में डूबने से मौत हो गई है.

Published : August 16, 2026 at 10:30 PM IST
जींद : हरियाणा के जींद जिले के गांव चांदपुर के 22 वर्षीय निहाल सिंह की मॉल्डोवा में नदी में डूबने से मौत हो गई. करीब 9 महीने पहले वो स्टडी वीजा पर विदेश गया था. परिवार को उम्मीद थी कि होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के साथ वो वहां नौकरी कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा. निहाल पढ़ाई के साथ चिशिनाउ सिटी के एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम भी करता था. 31 जुलाई को वो दोस्तों के साथ घूमने गया था. इसी दौरान निस्दू रिवर में हादसा हो गया और वो पानी में डूब गया. हादसे के बाद परिवार को उसके शव के भारत आने का इंतजार रहा. 17 दिन बाद रविवार को शव गांव पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया. दोपहर करीब 2 बजे बड़ी बहन ने अपने इकलौते भाई को मुखाग्नि दी.
15 लाख रुपये खर्च कर भेजा था विदेश : निहाल के चचेरे भाई प्रवीन कुमार ने बताया कि परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ करीब 15 लाख रुपये खर्च कर निहाल को विदेश भेजा था. मां सुनीता देवी के पास इतनी रकम नहीं थी. ऐसे में रिश्तेदारों और जानकारों से पैसे उधार लेकर बेटे को स्टडी वीजा पर मॉल्डोवा भेजा गया. परिवार को भरोसा था कि निहाल पढ़ाई के साथ नौकरी करेगा और धीरे-धीरे परिवार का कर्ज उतारने में मदद करेगा. विदेश जाने के बाद वो पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करने लगा था. वह परिवार से लगातार संपर्क में रहता था और सभी को उसके भविष्य को लेकर काफी उम्मीदें थीं. अब नियति ने परिवार को ऐसा सदमा दिया है, जिससे उबरना उनके लिए बेहद मुश्किल है. निहाल के शव को भारत लाने में भी परिवार को करीब 10 लाख रुपये खर्च करने पड़े. इतनी बड़ी रकम जुटाना परिवार के लिए आसान नहीं था. परिवार और रिश्तेदारों के साथ भाईचारे के लोगों ने भी मदद की. 17 दिन के इंतजार के बाद जब शव गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी. मां अपने जवान बेटे का चेहरा देखकर बेसुध हो गई. जिस बेटे को बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजा था, उसी बेटे की अर्थी घर लौटने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई.
सात साल पहले पिता का साया उठा : निहाल के पिता कृष्ण कुमार की करीब सात साल पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. पिता के निधन के बाद मां सुनीता देवी ने दोनों बच्चों की जिम्मेदारी संभाली. घर के पास करियाना की दुकान चलाकर उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया. निहाल परिवार का इकलौता बेटा था और मां को उससे बहुत उम्मीदें थीं. परिवार चाहता था कि बेटा विदेश में पढ़ाई पूरी कर अच्छी नौकरी हासिल करे और मां व बहन का सहारा बने. निहाल की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट के साथ भावनात्मक दुख भी टूट पड़ा है. रिश्तेदारों के मुताबिक, निहाल अपने परिवार की स्थिति बदलने का सपना देखता था. मां ने लोगों से उधार लेकर उसे विदेश भेजा था, लेकिन बेटा वापस सफलता लेकर लौटने के बजाय ताबूत में गांव पहुंचा. रविवार को गांव में गमगीन माहौल के बीच निहाल का अंतिम संस्कार किया गया. बड़ी बहन ने भाई को मुखाग्नि दी. इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. जिस मां ने बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश भेजा था, आज उसी मां के सामने उसके सपनों और उम्मीदों की अर्थी उठ गई.
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