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देश में हीटवेव संकट पर NGT सख्त, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों को एक्शन प्लान सौंपने का निर्देश

देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बढ़ रहे भीषण गर्मी के संकट पर NGT ने खुद संज्ञान (suo motu) लिया है. संतू दास की रिपोर्ट.

NGT on Heatwave
बीकानेर में मंगलवार, 26 मई, 2026 को चिलचिलाती गर्मी के बीच महिला मज़दूर अपने काम की जगह की ओर जाती हुई. (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : May 29, 2026 at 3:57 PM IST

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नई दिल्लीः राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बढ़ रहे भीषण गर्मी (हीटवेव) के संकट पर खुद संज्ञान (suo motu) लिया है. इसके साथ ही, एनजीटी ने इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जलवायु अनुकूलन रणनीति बनाने को कहा है. अधिकरण (ट्रिब्यूनल) की प्रिंसिपल बेंच ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर खुद मामला दर्ज करने के बाद संबंधित पक्षों को यह निर्देश जारी किया.

उस मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बढ़ता तापमान लोगों के स्वास्थ्य, पढ़ाई, कार्यक्षमता और साथ ही अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है. इस मामले की सुनवाई अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने की.

हाल ही में हुई इस सुनवाई के दौरान, ट्रिब्यूनल ने माना कि बढ़ता तापमान आम जनता के स्वास्थ्य, खेती-किसानी, पानी की उपलब्धता, कार्यक्षमता, वन्यजीवों और देश की पूरी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

NGT on Heatwave
अमृतसर में मंगलवार, 26 मई, 2026 को गर्मी से बचने के लिए अपना चेहरा धो रहा आदमी. (IANS)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि दिल्ली और कई अन्य इलाके लगातार भीषण लू (हीटवेव) की चपेट में हैं. ट्रिब्यूनल ने इस बात पर जोर दिया कि लू देश की सबसे कम पहचानी जाने वाली पर्यावरणीय आपदाओं में से एक बन गई है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रही है.

बेंच ने नोट किया कि शहरों में घनी कंक्रीट की इमारतों, कम होती हरियाली, वाहनों के धुएं, औद्योगिक गतिविधियों और भारी ऊर्जा खपत के कारण गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों के लोग लंबे समय तक धूप में रहने, ठंडे वातावरण (कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर) की कमी और सरकारी व संस्थागत मदद न मिलने से परेशान हैं.

एनजीटी ने हर क्षेत्र के हिसाब से अलग जलवायु अनुकूलन रणनीतियों, हाई-रिज़ॉल्यूशन थर्मल मैपिंग और रिमोट सेंसिंग, बेहतर शॉर्ट-टर्म व मौसमी मौसम पूर्वानुमान की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया. इसके साथ ही, आम लोगों के लिए सुलभ जलवायु डेटा, स्कूलों और समुदायों के स्तर पर मौसम की निगरानी की पहल और गर्मी के खतरों व पर्यावरण पर इसके प्रभावों पर शोध की आवश्यकता पर भी बल दिया.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ता तापमान, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय चिंताएं पैदा करता है.

NGT on Heatwave
नई दिल्ली में 18 मई, 2026 को तापमान बढ़ने पर चिलचिलाती धूप से बचने के लिए स्कार्फ का इस्तेमाल करते यात्री. (IANS)

इस संबंध में एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को मामले में पक्षकार बनाया है. अदालत ने इन सभी से अपना जवाब और एक्शन प्लान पेश करने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी.

बता दें कि पिछले महीने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी 21 राज्यों और दिल्ली को हीटवेव के दौरान कमजोर आबादी की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने और राहत रणनीतियों को लागू करने का निर्देश दिया था.

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