नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारत-नेपाल सीमा के सुस्ता झूला पुल पर दहशत का मंजर
पढ़िए संवाददाता ओंकार शुक्ला की ग्राउंड रिपोर्ट.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 30, 2026 at 10:30 AM IST
|Updated : August 31, 2026 at 5:27 PM IST
महराजगंज: नेपाल की प्राकृतिक आपदा ने सीमावर्ती इलाकों को झकझोर कर रख दिया है. करीब तीन किलोमीटर लंबा सुस्ता झूला पुल, जो कभी दोनों देशों के पर्यटकों से भरा रहता था, आज खौफ के साए में है. घटते जलस्तर के बावजूद नारायणी नदी का रूप इतना खौफनाक है कि लोग किनारे जाने से भी कतरा रहे हैं. क्या है सुस्ता और सीमावर्ती गांवों का ताजा हाल?
सीमावर्ती इलाकों में सन्नाटा: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद सीमा से सटे नवलपरासी जिले में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. प्रसिद्ध सुस्ता झूला पुल पर पर्यटकों की जगह सिर्फ खौफनाक सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. नारायणी-गंडक नदी में बहकर आ रहे सामान और शवों ने लोगों को दहशत में डाल दिया है. लेकिन नागरिकों के दिलों में डर बैठ गया है. महराजगंज में नेपाल सीमा से सटे गांव पथलहवा, मिश्रौलिया, बैठवलिया और डोमा में लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं. हालांकि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और राहत एजेंसियां तैनात हैं. नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं और सुस्ता तटबंध और पुल की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट पर हैं
पानी कुछ कम होने पर पुल से नदी में बहकर आ रहे सामान को देख रहे थे. इसी दौरान नजर तेज धारा में बहते दो शवों पर पड़ी. शवों को देखकर वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और लोग तत्काल पुल से लौटने लगे.- अवधेश, झूलनीपुर निवासी, नेपाल
रोजी-रोटी का संकट: पर्यटकों के नहीं आने से इलाके के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. त्रासदी का असर स्थानीय कारोबार पर भी जबरदस्त पड़ा है. पुल के आसपास चाय-नाश्ता और खानपान की दुकान चलाने वाले दुकानदारों की बिक्री लगभग ठप हो गई है. दोनों देशों के पर्यटकों से गुलजार रहने वाला इलाका अब वीरान नजर आ रहा है.

नेपाली पहचान और जीवन रेखा: नारायणी नदी पर बना यह सुस्ता झूला पुल नेपाल के सबसे लंबे झूला पुलों में से एक माना जाता है. इसके निर्माण से पहले सुस्ता के निवासियों को मुख्य नेपाल आने के लिए या तो भारतीय क्षेत्र (बिहार) से होकर गुजरना पड़ता था या जोखिम भरी नाव यात्रा करनी पड़ती थी. यह पुल वहां के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जीवन रेखा है.
#WATCH नुवाकोट, नेपाल: नुवाकोट जिले के देवीघाट से ड्रोन से बनाए गए वीडियो में हालिया बाढ़ से हुए नुकसान को देखा जा सकता है। इनमें गांव और घर भारी कीचड़ में दबे हुए, पुल टूटे हुए और नदी के किनारे मलबा बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है। मौसम की वजह से कुछ समय के लिए रोके गए खोज और बचाव… pic.twitter.com/rZ7ChMe8Yn
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 30, 2026
खतरे का साया: नारायणी नदी के उफान पर होने के कारण 3 किलोमीटर लंबे (वास्तविक स्पैन लगभग 1,571 मीटर) इस प्रख्यात झूला पुल पर सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने आवागमन पूरी तरह रोक दिया है. नदी के रौद्र रूप के बीच पुल पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है.प्रशासन ने खतरे को देखते हुए सैकड़ों ग्रामीणों को गांवों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था, जलस्तर कम होने पर कुछ लोग वापस लौटे, लेकिन दोबारा बारिश और पानी बढ़ने की आशंका ने उनकी चिंता फिर बढ़ा दी है.
#WATCH नुवाकोट। नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सोलर प्लांट्स को नुकसान पहुंचाया है। त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सोलर प्लांट का बड़ा हिस्सा मलबे में दबकर नष्ट हो गया है। pic.twitter.com/VspjA8D483
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मृतकों की संख्या में इजाफा: नेपाल में भयानक अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 675 हो गई है और लगभग 2500 लोग अभी भी लापता हैं. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी मिली है. हिमालयी इलाके में खोज और बचाव अभियान का आज पांचवा दिन है. नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने मरने वालों की संख्या 675 बताई है. हालांकि इस संख्या में अभी और इजाफा होने का अंदेशा है. गांव और घर भारी कीचड़ में दबे हुए, पुल टूटे हुए और नदी के किनारे मलबा बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है. मौसम की वजह से कुछ समय के लिए रोके गए खोज और बचाव अभियान फिर से शुरू हो गए हैं. लापता लोगों का पता लगाने की कोशिशें जारी रखे हुए हैं.
नेपाली प्लांट को नुकसान: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सोलर प्लांट्स को नुकसान पहुंचाया है. नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सोलर प्लांट का बड़ा हिस्सा मलबे में दबकर नष्ट हो गया है.
#WATCH नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने ट्वीट किया, " भारत से चौथी उड़ान काठमांडू पहुंची, जिसमें 11 टन राहत सामग्री थी - जैसे कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट। इस उड़ान में टनल में खोज और बचाव अभियान के लिए उपकरणों के साथ अतिरिक्त तकनीकी टीम भी… pic.twitter.com/wOrk9H5nCE
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मदद को बढ़े हाथ: प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की ओर से पड़ोसी देश को हर तरह की सहायता की जा रही है. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि, भारत से चौथी उड़ान काठमांडू पहुंची, जिसमें 11 टन राहत सामग्री थी - जैसे कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट. इस उड़ान में टनल में खोज और बचाव अभियान के लिए उपकरणों के साथ अतिरिक्त तकनीकी टीम भी आई. दूसरी ओर समाजसेवी संस्थाओं की ओर से राहत सामग्री नेपाल तक पहुंचाई जा रही है. इसी कड़ी में पंजाब से राहत सामग्री लेकर एक गाड़ी को सोनौली बॉर्डर पर रोक दिया गया. पुख्ता दस्तावेज नहीं होने के चलते राहत सामग्री वाहन को नेपाल सीमा में नहीं प्रवेश करने दिया गया.
कुदरत का यह कहर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आपदाएं सिर्फ भौगोलिक सीमाएं नहीं बदलतीं, बल्कि हंसते-खेलते इलाकों को पल भर में उजाड़ देती हैं. उम्मीद है कि प्रशासन की मुस्तैदी और राहत एजेंसियों की मुस्तैदी से जल्द ही सुस्ता और नारायणी नदी के किनारे बसे गांवों में जिंदगी पटरी पर लौटेगी और इस खूबसूरत सुस्ता झूला पुल की रौनक फिर बहाल होगी.
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