नेपाल बाढ़ त्रासदी: गंडक नदी से मिले नेपाल बाढ़ पीड़ितों के 4 शव, पोस्टमार्टम के बाद नेपाल पुलिस को सुपुर्द
लहरों में बहकर आईं सरहद पार से मौतें!

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 31, 2026 at 7:08 AM IST
|Updated : August 31, 2026 at 11:24 AM IST
महराजगंज: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का खौफनाक असर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में देखने को मिला. निचलौल क्षेत्र से होकर बहने वाली नारायणी (गंडक) नदी में बहकर भारतीय सीमा में चार शव आए. कानूनी प्रक्रिया के बाद नेपाल पुलिस को सौंप दिए गए हैं.
गंडक नदी में खौफनाक मंजर!: निचलौल क्षेत्र के टेलफाल के पास स्थानीय लोगों ने गंडक नदी में शव बहते देखे थे. सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया. मौके पर पहुंची एसएसबी और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर नदी से तीन महिलाओं और एक पुरुष का शव बाहर निकाला. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के दौरान तेज बहाव में शव नारायणी नदी के रास्ते भारतीय क्षेत्र तक पहुंच गए थे.
नेपाल पुलिस को सौंपा गया शव: तीन महिलाओं और एक पुरुष समेत चार अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उनके डीएनए सैंपल सुरक्षित कर लिए गए. इसके बाद देर रात चारों शवों को ठूठीबारी बॉर्डर के रास्ते नेपाल प्रशासन को सुपुर्द कर दिया गया. चारों शवों की पहचान नहीं हो सकी थी. ऐसे में निर्धारित 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया गया और भविष्य में वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए सैंपल भी सुरक्षित रखे गए.
पोस्टमार्टम और डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चारों शव देर रात नेपाल पुलिस को सौंप दिए गए. इसके बाद शवों को ले जा रही एम्बुलेंस को सुरक्षा व्यवस्था के बीच एस्कॉर्ट करते हुए महेशपुर सशस्त्र प्रहरी पुलिस के माध्यम से नवलपरासी भेजा गया.- डॉ. प्रशांत कुमार, अपर जिलाधिकारी
मौके पर प्रशासन की टीम: घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सीमा से सटे नदी क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए. फिलहाल नारायणी नदी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन नेपाल की आपदा के बाद भारतीय सीमा से सटे क्षेत्रों में प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है.
गंडक के उफान में ढलान: नेपाल के कैचमेंट एरिया में हुई बारिश और प्राकृतिक आपदा के बाद गंडक नदी के उफान में अब कमी दर्ज की जा रही है. रविवार को दिन भर चढ़ने के बाद बैराज का डिस्चार्ज सोमवार सुबह और घटकर नियंत्रित स्थिति में आ गया है. सिंचाई खण्ड-2 बाढ़ नियंत्रण कक्ष की सोमवार सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर बैराज से डिस्चार्ज घटकर 1,11,500 क्यूसेक पर आ गया है. बैराज का अपस्ट्रीम जलस्तर 108.26 मीटर और डाउनस्ट्रीम 107.02 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 109.670 मीटर से काफी नीचे है. रविवार शाम सात बजे डिस्चार्ज 1.80 लाख क्यूसेक पार कर गया था, जिसके बाद से लगातार गिरावट जारी है.
काठमांडू की लाइफलाइन ठप: नेपाल में आपदा के बाद मुग्लिन-काठमांडू हाईवे कृष्णभीर और परेवाभीर में सड़क धंसने से पूरी तरह अवरुद्ध है. इसके चलते यातायात का पूरा दबाव वैकल्पिक हेटौड़ा-कुलेखानी-फाखेल-कीर्तिपुर मार्ग पर आ गया है. यह मार्ग बेहद संकरा और घुमावदार है. भैरहवा के सुरेश पंत के अनुसार जिस रूट पर रोजाना दो हजार गाड़ियां चलती थीं, वहां अब सात हजार से अधिक वाहन रेंग रहे हैं. हेटौड़ा से काठमांडू की 75 किमी की दूरी तय करने में यात्रियों को 3 घंटे के बजाय 8 से 10 घंटे लग रहे हैं. संसाधन कम होने से नेपाली ट्रैफिक पुलिस को व्यवस्था संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है.
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