Explainer: कम रैंक वाले NEET छात्र न हों परेशान! आखिरी राउंड तक 560 अंक वालों को भी मिल सकती है सरकारी MBBS सीट
पहले राउंड में 22,342 रैंक पर सरकारी सीट मिली, एक्सपर्ट्स बोले- अंतिम राउंड तक बदलेगा पूरा गणित. पढ़िए मनीष गौतम की स्पेशल रिपोर्ट.

Published : August 24, 2026 at 2:45 PM IST
कोटा: मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए सेंट्रल और स्टेट काउंसलिंग चल रही है. इसमें ऑल इंडिया 15 फीसदी कोटा (सेंट्रल) काउंसलिंग के तहत पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी हो गया है. इसमें 22,342 रैंक पर सरकारी सीट की क्लोजिंग रही है. इस रैंक पर नीट का स्कोर 572 अंक है, लेकिन कोटा के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतिम राउंड तक इसमें काफी फेरबदल हो जाएगा, इसीलिए काउंसलिंग में भाग ले रहे विद्यार्थियों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, 560 अंक तक वाले विद्यार्थियों को भी सीट मिल सकती है. इसमें अंतिम क्लोजिंग रैंक 28 से 29 हजार के बीच रहने की उम्मीद है.
कोटा के निजी कोचिंग संस्थान के करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट पारिजात मिश्रा का कहना है कि पिछले कई सालों से पहले और अंतिम राउंड की कट-ऑफ में काफी अंतर रहा है. बीते दो सालों (2024 और 2025) का रिकॉर्ड देखा जाए तो पहले राउंड से अंतिम राउंड तक जनरल, ईडब्ल्यूएस व ओबीसी कैटेगरी की क्लोजिंग रैंक में 5,000 रैंक तक की गिरावट दर्ज की गई है. इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद है.
5 से 6 हजार नीचे जाती है क्लोजिंग रैंक: पारिजात मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां पहले राउंड में 19,603 रैंक पर ही सरकारी एमबीबीएस की सीट अलॉट की गई थी, वहीं आगे के राउंड्स में यह लगातार नीचे जाती रही. आखिरी राउंड तक जनरल कैटेगरी के लिए यह 5,617 रैंक गिरकर 25,220 पर बंद हुई थी. इसी तरह वर्ष 2025 में पहले राउंड में 21,190 रैंक पर सीट अलॉट हुई थी, जिसके बाद लगातार क्लोजिंग रैंक नीचे गिरती गई और अंत में 27,360 पर जाकर थमी. इसमें कुल 6,170 रैंक की गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं रिजर्व कैटेगरी की बात की जाए तो वर्ष 2024 में पहले से अंतिम राउंड के बीच क्लोजिंग रैंक 23 से 33 हजार के बीच तक नीचे गिरी थी, जबकि वर्ष 2025 में यह अंतर 19 से 28 हजार के बीच दर्ज किया गया था.
इसे भी पढ़ें- NEET UG 2026: पहले राउंड के सीट अलॉटमेंट में 22,342 तक मिला MBBS सीट, AIIMS में सबसे नीचे रेवाड़ी 3948 पर
इन तीन कारणों से नीचे जाती है क्लोजिंग रैंक
1. फ्री एग्जिट का मौका: पहले राउंड में विद्यार्थियों को 'फ्री एग्जिट' (बिना पेनल्टी सीट छोड़ने) का मौका मिलता है, इसलिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी इसमें भाग लेते हैं. कई कैंडिडेट्स सीट मिलने के बाद फ्री एग्जिट कर लेते हैं, जबकि आगे के राउंड्स में ऐसी सुविधा नहीं होती है. वहां विद्यार्थियों को अलॉट की गई सीट को चुनना ही पड़ता है, साथ ही उन सीटों पर रिपोर्टिंग करके फीस भी जमा करनी पड़ती है. इसीलिए पहले राउंड में कट-ऑफ काफी हाई रहती है. दूसरे राउंड में अलॉट की गई सीट को ज्वाइन नहीं करने या छोड़ने पर सिक्योरिटी डिपॉजिट खोनी पड़ती है. काउंसलिंग करवा रही कमेटी इस सिक्योरिटी डिपॉजिट को जब्त कर लेती है. ऐसे में विद्यार्थी को अपने पुराने रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही तीसरे राउंड में दोबारा सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी पड़ती है.
2. स्टेट काउंसलिंग का विकल्प: विद्यार्थी सेंट्रल काउंसलिंग के साथ-साथ अपने राज्य की काउंसलिंग में भी भाग लेता है, जहां पर भी उसे पहले राउंड में बेहतर सीट अलॉट होती है, वह उसे चुन लेता है. कई छात्र दूसरे राज्यों की ओपन सीटों की काउंसलिंग में भी शामिल होते हैं और वहां सीट अलॉट होने पर एडमिशन ले लेते हैं. हालांकि, अधिकांश विद्यार्थी सेंट्रल और अपने होम स्टेट की काउंसलिंग में ही भाग लेते हैं.
3. एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी: देश में एमबीबीएस की सीटों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है, इसीलिए भी क्लोजिंग रैंक लगातार नीचे जा रही है. वर्ष 2022 और 2023 में अंतिम क्लोजिंग रैंक 22 से 23 हजार के बीच रही थी. वर्ष 2024 में जहां क्लोजिंग रैंक 25,220 थी, वहीं वर्ष 2025 में यह बढ़कर 27,360 हो गई. इस प्रकार महज एक साल में क्लोजिंग रैंक 2,140 रैंक नीचे गिर गई. ऐसे में इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि अंतिम क्लोजिंग रैंक 28 से 29 हजार के बीच पहुंच जाएगी.
इसे भी पढ़ें- Explainer: पीएम मोदी की 'फ्री ऑनलाइन कोचिंग' की घोषणा, क्या ऑफलाइन जितनी होगी कारगर? जानिए चुनौतियां
अंक से ज्यादा सटीक अंदाजा रैंक से: पारिजात मिश्रा ने बताया कि नीट की काउंसलिंग में अंक ज्यादा मायने नहीं रखता है, बल्कि ऑल इंडिया रैंक से कॉलेज मिलने का ज्यादा सटीक अंदाजा लगता है, क्योंकि हर साल नीट के पेपर के कठिनाई स्तर के अनुसार स्टूडेंट्स का स्कोर कम-ज्यादा होता रहता है. वर्ष 2024 में पेपर काफी आसान था, इसलिए 25,220 की क्लोजिंग रैंक पर भी 652 अंक थे. हालांकि, वर्ष 2025 में पेपर कठिन था, इसलिए 27,360 की क्लोजिंग रैंक पर स्कोर घटकर 525 अंक रह गया था. इसी तरह इस बार के पेपर को वर्ष 2024 से कठिन और वर्ष 2025 से थोड़ा आसान कहा जा सकता है. इस बार जनरल कैटेगरी के लिए सेंट्रल काउंसलिंग के पहले राउंड में 22,342 रैंक पर सरकारी सीट अलॉट हुई है, जिस पर नीट यूजी का स्कोर 572 अंक है, लेकिन आगे के राउंड्स में विद्यार्थियों की संख्या और सीटों के आधार पर 560 अंक तक वाले अंतिम विद्यार्थी को भी सरकारी सीट मिल सकती है.
एक अंक पर हजारों स्टूडेंट्स: नीट यूजी की परीक्षा में इस बार लगभग 20 लाख बच्चे बैठे थे. इस परीक्षा के परिणाम में काउंसलिंग के लिए कुल 11.21 लाख विद्यार्थियों को क्वालिफाइड घोषित किया गया है. इसकी क्वालीफाइंग कट-ऑफ जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 213 अंक थी. इसके नीचे रिजर्व कैटेगरी के स्टूडेंट्स क्वालीफाई हुए हैं, जिनमें ओबीसी, एससी और एसटी के लिए क्वालीफाइंग स्कोर 177 अंक था. इस बार 700 से ज्यादा अंक लाने वाले केवल 90 कैंडिडेट्स हैं और 690 से ज्यादा अंक वाले 138 छात्र हैं. वहीं 650 से ज्यादा अंक 1,492 विद्यार्थी लेकर आए हैं, जबकि 600 से ज्यादा अंक वाले विद्यार्थियों की संख्या 10,160 है. इसके नीचे वाले स्कोर पर एक-एक अंक पर सैकड़ों-हजारों की संख्या में विद्यार्थी मौजूद हैं और टाई-ब्रेकर नियमों के कारण उनकी रैंक भी अलग-अलग है.
इसे भी पढ़ें- NEET UG 2026: राजस्थान में इस कैटेगरी के स्टूडेंट्स को मिल रही कंफर्म सीट, MBBS फीस सवा करोड़ से ज्यादा
यहां सेंट्रल से ऊंची रहती है क्लोजिंग रैंक: पारिजात मिश्रा ने बताया कि हर स्टेट की क्लोजिंग रैंक अलग-अलग होती है. सेंट्रल काउंसलिंग की क्लोजिंग रैंक के बराबरी पर कुछ राज्य रहते हैं, तो कई बार कुछ राज्यों की क्लोजिंग रैंक सेंट्रल से भी काफी ऊंची (कम रैंक पर ही सीट फुल होना) चली जाती है. इनमें दिल्ली, हरियाणा, बिहार व राजस्थान शामिल हैं. इन राज्यों की क्लोजिंग रैंक वहां के मेडिकल कॉलेजों की रैंकिंग और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर तय होती है. अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते विद्यार्थी इन कॉलेजों को पहले चुनते हैं, जिससे इन राज्यों में काफी हाई रैंक पर ही सीटें क्लोज हो जाती हैं.

उन्होंने बताया कि इसके विपरीत महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य सेंट्रल काउंसलिंग के लगभग बराबर या उससे थोड़े नीचे रहते हैं. वहीं उत्तर-पूर्वी राज्य और कई छोटे राज्य ऐसे हैं, जहां स्टेट कोटे की क्लोजिंग रैंक सेंट्रल काउंसलिंग से काफी नीचे चली जाती है. यह कई बार 1 लाख रैंक तक भी नीचे होती है, क्योंकि वहां के स्थानीय बच्चों की रैंक के आधार पर ही स्टेट की सीटें अलॉट होती हैं. हालांकि, सेंट्रल काउंसलिंग के जरिए राज्यों की जो 15 फीसदी ऑल इंडिया कोटा सीटें भरी जाती हैं, वहां हमेशा ऊंची रैंक पर ही क्लोजिंग होती है.
देश में 1.39 लाख MBBS सीटें: देश में वर्तमान में कुल 1,39,589 MBBS सीटों पर केंद्रीय और राज्य स्तर की अलग-अलग काउंसलिंग चल रही है. इनमें पिछले साल के मुकाबले इस साल 2,261 सरकारी MBBS सीटें बढ़ गई हैं. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की बात की जाए तो वहां 7,800 सीटों की बढ़ोतरी हुई है. विभिन्न राज्यों में बढ़ी सरकारी सीटों के अलावा इस बार AIIMS में भी 150 सीटों की बढ़ोतरी हुई है. इनमें एम्स रेवाड़ी की नई 50 सीटें और चार अन्य एम्स संस्थानों में 25-25 सीटों का इजाफा शामिल है. सरकारी सीटें बढ़ने के कारण इन्हें ऑल इंडिया 15 फीसदी कोटा (सेंट्रल) काउंसलिंग के पूल में जोड़ा गया है. इसके अनुसार वर्तमान में कुल 31,000 एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग की सीटों के लिए केंद्रीय काउंसलिंग आयोजित की जा रही है.

इसे भी पढ़ें- NEET UG 2026: MBBS व BDS एडमिशन के लिए सेंट्रल काउंसलिंग शुरू, 12 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन
इसे भी पढ़ें- NEET UG 2026: राजस्थान की काउंसलिंग में 7433 MBBS सीटें, कम फीस वाली महज 2274

