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जम्मू में माता वैष्णो देवी कॉलेज की मान्यता रद्द, 50 स्टूडेंट्स का होगा ट्रांसफर

मेडिकल कॉलेज में एडमिशन को लेकर गरमागरम राजनीतिक विवाद, क्योंकि पहले बैच के 50 स्टूडेंट्स में से 42 मुस्लिम हैं.

MATA VAISHNO DEVI MEDICAL COLLEGE
जम्मू-कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की एमबीबीएस एडमिशन लिस्ट को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मी (PTI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 7, 2026 at 11:55 AM IST

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नई दिल्ली: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने के लिए दिया गया परमिशन लेटर वापस ले लिया है, क्योंकि उसने न्यूनतम मानकों के साथ का 'अवज्ञा' किया.

यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेज के खिलाफ कई ग्रुप्स के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि इसके पहले बैच में ज्यादातर एमबीबीएस स्टूडेंट मुस्लिम क्यों थे. मंगलवार को एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) की एक टीम ने औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने मिनिमम एकेडमिक, टीचिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैंडर्ड के पालन में कमियां पायी. साथ ही एकेडमिक साल के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की परमिशन वापस लेने का फैसला किया.

एनएमसी के अनुसार स्टूडेंट के हितों की रक्षा के लिए केंद्र शासित प्रशासन को एकेडमिक ईयर 2025-26 के दौरान एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को जम्मू-कश्मीर के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में सामान्य से अधिक सीटों पर ट्रांसफर करने का अधिकार दिया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई पर असर न पड़े और उनका भविष्य सुरक्षित रहे. बोर्ड ने कहा कि पहले से एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा के लिए, उन्हें जम्मू-कश्मीर के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने का फैसला किया गया है.

दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रुप श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने नेशनल मेडिकल कमीशन के फैसले को अपने संघर्ष की जीत बताया है. ईटीवी भारत से बात करते हुए, संघर्ष समिति के प्रेसिडेंट कर्नल (रिटायर्ड) सुखबीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि वह इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनके मुताबिक जनता की मांगें पूरी की.

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राष्ट्रीय बजरंग दल के सदस्यों ने मंगलवार को जम्मू- कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की MBBS एडमिशन लिस्ट को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन (PTI)

उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति ने शुरू से ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना, मैनेजमेंट और एडमिशन प्रोसेस पर सवाल उठाए थे और अब नेशनल मेडिकल कमीशन के फैसले ने उनकी चिंताओं को सही साबित कर दिया है. यहां यह बताना जरूरी है कि एसएमवीडी इंस्टीट्यूट में चल रहे विवाद की जड़ें एडमिशन प्रोसेस से जुड़ी हैं.

इंस्टीट्यूशन को अपने एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए 50 एमबीबीएस सीटें दी गई थी, जिन पर नीट के जरिए एडमिशन दिए गए थे. हालांकि, पहले बैच में इन 50 स्टूडेंट्स में से 42 मुस्लिम थे. इस वजह से जम्मू में कई हिंदू संगठनों और राजनीतिक हलकों में तीखा विरोध हुआ, जिन्होंने सिलेक्शन पर सवाल उठाए और इसे 'सांप्रदायिक' कहा, जबकि सरकार और प्रशासन ने बार-बार कहा था कि एडमिशन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर होते हैं.

जम्मू में करीब 60 संगठनों ने मिलकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति बनाई, जिसने मेडिकल कॉलेज के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया. संघर्ष समिति ने न सिर्फ एडमिशन प्रोसेस पर सवाल उठाए, बल्कि मेडिकल कॉलेज को बंद करने की भी मांग की. हाल ही में समिति ने जम्मू के सिविल सेक्रेटेरिएट के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला और बिगड़ गय. इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को साफ कहा था कि एडमिशन प्रोसेस पूरी तरह से मेरिट पर आधारित था और पूरे मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया.

नेशनल मेडिकल कमीशन के ऐलान से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था, 'भारत सरकार को यह मेडिकल कॉलेज बंद कर देना चाहिए और इन स्टूडेंट को जम्मू-कश्मीर के किसी दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडजस्ट कर देना चाहिए, क्योंकि वे डर के माहौल में पढ़ाई नहीं कर सकते.

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जम्मू- कश्मीर के एलजी 27 दिसंबर 2025 को श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के 11वें कॉन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान एक स्टूडेंट को डिग्री देते हुए (PTI)

अगर मैं पेरेंट होता तो मुझे अपने बच्चों को वहां पढ़ने भेजने की चिंता होती. इन स्टूडेंट्स ने मेरिट के आधार पर सीटें हासिल की थी लेकिन वहां जिस तरह की पॉलिटिक्स चल रही है, वह उनके पढ़ने के लिए अच्छी नहीं है. इस बयान के कुछ ही घंटों के अंदर, नेशनल मेडिकल कमीशन ने इस इंस्टीट्यूशन को बंद करने और मान्यता रद्द करने का फैसला किया.

सभी स्टूडेंट को दूसरे इंस्टिट्यूट में शिफ्ट किया जाएगा

चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड ने मंगलवार को एक ऑर्डर जारी किया जिसमें कहा गया है कि एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट्स को केंद्र शासित प्रदेश एडमिनिस्ट्रेशन की सक्षम अथॉरिटी द्वारा जम्मू- कश्मीर के दूसरे मेडिकल इंस्टिट्यूट में एडजस्ट किया जाएगा. इसका मतलब है कि एडमिशन लेने वाले किसी भी स्टूडेंट को एडमिशन वापस लेने के फैसले की वजह से एमबीबीएस सीट नहीं गंवानी पड़ेगी. इसके बजाय, उन्हें जम्मू- कश्मीर के दूसरे मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में उनके रेगुलर मंज़ूर सीटों के अलावा एडजस्ट किया जाएगा.

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