सीजेआई बोले-राष्ट्र ने कई चुनौतियां पार की, अब युवा विधि स्नातकों और वकीलों के लिए जिम्मेदारियां संभालने का समय
सीजेआई सूर्यकांत ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवा वकीलों से भविष्य की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया.

By PTI
Published : August 15, 2026 at 7:15 PM IST
नई दिल्ली : भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने युवा विधि स्नातकों और वकीलों से भविष्य की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि देश ने पिछले आठ दशकों में कई कठिन चुनौतियों को पार किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
सुप्रीम कोर्ट परिसर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि देश की यात्रा उसकी उपलब्धियों के साथ समाप्त नहीं होती.
उन्होंने कहा, “किसी राष्ट्र की यात्रा उसकी उपलब्धियों के साथ समाप्त नहीं होती. हर उपलब्धि अपने साथ जिम्मेदारी और कर्तव्य का नया एहसास भी लेकर आती है. अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और आगे की यात्रा में कई मील का सफर तय करना है.”
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ न्यायाधीश, वकील और अदालत के कर्मचारी शामिल हुए. युवा वकीलों को संबोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से बार ने जो जिम्मेदारी संभाली है, वह जल्द ही उनके कंधों पर होगी.
उन्होंने कहा, “हमारे युवा विधि स्नातकों और युवा वकीलों से मैं कहना चाहता हूं कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से इस बार ने जो जिम्मेदारी संभाली है, वह बहुत जल्द आपके कंधों पर होगी. आपसे पहले की पीढ़ियों ने न्याय की जिन संस्थाओं का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया है, अब उनकी रक्षा करना और उन्हें आगे बढ़ाना आपकी जिम्मेदारी है.”
उन्होंने कहा, “कृपया यह जान लें कि बार और पीठ आपके विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं—आपको मार्गदर्शन देकर, सार्थक अवसर उपलब्ध कराकर और आप पर विश्वास जताकर. आगे की यात्रा में जो मील के पत्थर बाकी हैं, उन्हें आपको तय करना है और हम आपके साथ चलेंगे.”
सीजेआई ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का कानून से गहरा और स्थायी संबंध था तथा उस पीढ़ी के कुछ बेहतरीन कानूनी मनीषियों की सोच और प्रयासों के माध्यम से यह समझ विकसित हुई कि कानून का वास्तविक उद्देश्य केवल आदेश देना या विनियमन करना नहीं, बल्कि न्याय की सेवा करना, स्वतंत्रता की रक्षा करना और मानव गरिमा को कायम रखना है.
उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के दो महानतम निर्माताओं महात्मा गांधी और बीआर आंबेडकर के अलावा सरदार वल्लभभाई पटेल, मोतीलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय भी वकील थे. उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि कानूनी पेशा भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महज मूक दर्शक नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा था.
उन्होंने कहा कि देश ने पिछले आठ दशकों में कई कठिन चुनौतियों को पार किया और काफी उपलब्धियां हासिल कीं. उन्होंने कहा कि इसी दौरान उसकी कानूनी और न्यायिक संस्थाएं भी गणराज्य के साथ उल्लेखनीय रूप से विकसित और परिपक्व हुईं तथा देश की सामूहिक चेतना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्र की यात्रा में अभी कई मील का सफर तय करना बाकी है और ऐसे में उनका ध्यान स्वाभाविक रूप से आज के युवा वकीलों की ओर जाता है.
उन्होंने कहा, “वे वहीं खड़े हैं जहां कभी हम में से कई खड़े थे—उम्मीद और महत्वाकांक्षा से भरे हुए और शायद इस बात को लेकर थोड़े अनिश्चित कि आगे क्या होने वाला है. मुझे बार के शुरुआती वर्षों की चिंताएं व्यक्तिगत रूप से याद हैं. मैं यह बात अपने युवा साथियों का हौसला तोड़ने के लिए नहीं कह रहा, बल्कि इसलिए कह रहा हूं कि वे जानें कि हम उन्हें देखते हैं और उनकी चुनौतियों को समझते हैं.”
युवा वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज पेशा अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है, सीखने की प्रक्रिया अधिक कठिन हो गई है और शुरुआती वर्षों में अपनी वकालत स्थापित करने का दबाव काफी अधिक है.
उन्होंने कहा, “फिर भी, मैंने अपने युवा साथियों में असाधारण दृढ़ता, तेज बुद्धिमत्ता और न्याय के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता देखी है, जिससे मुझे इस पेशे के भविष्य पर पूरा भरोसा होता है.” उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी में ऐसी खूबियां हैं जो भविष्य को लेकर आश्वस्त होने के पर्याप्त कारण देती हैं.
सीजेआई ने कहा कि युवा वकील ऐसे दौर में बड़े हुए हैं, जहां प्रौद्योगिकी ने संवाद करने और ज्ञान तक पहुंचने के तरीके को बदल दिया है और वे इस अनुकूलन क्षमता को अदालत कक्ष में भी ला रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह और बार के अन्य सदस्यों ने भी इस अवसर पर संबोधित किया.
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