4 साल की उम्र में पोलियो.. आलू बेचा.. टोटो चलाया.. अब कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखेगा बिहार के झंडू का जलवा
उनके कोच ने कहा झंडू दिनभर सब्जी बेचकर रात को प्रैक्टिस करता था. 1994 का रिकॉर्ड 2025 में तोड़ा. नालंदा से महमूद आलम की रिपोर्ट

Published : June 29, 2026 at 7:44 PM IST
नालंदा: 4 साल की उम्र में पोलियो मारने के बावजूद झंडू कुमार (28) कभी भी जिम से दूर नहीं रह सके. 12 साल की उम्र से ही उन्हें बॉडी बनाने का जुनून था. झंडू का चयन 2026 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हुआ है. बिहार के खेल इतिहास में यह पहली बार है जब राज्य का कोई पैरा-एथलीट इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगा.
झंडू का पैरालंपिक का सफर: नालंदा जिले के हरनौत निवासी पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार की शारीरिक अक्षमता और घोर गरीबी भी उनके हौसलों को नहीं तोड़ पाई. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए झंडू, उनके जिम संचालक और माता-पिता ने अपने कड़े संघर्ष और खुशी को साझा किया है. झंडू कुमार ने अपनी इस कठिन यात्रा के बारे में खुलकर बात करते हुए बताया कि 2014-15 में उन्होंने जिम जाना शुरू किया था, लेकिन 2021 के आसपास उन्हें पैरा-गेम्स के बारे में पता चला.
"2018 में मैंने खुद सब्जी का व्यापार शुरू किया. मंडी जाने में बहुत परेशानी होती थी क्योंकि मेरे पास व्हीलचेयर तक नहीं थी. ओवरब्रिज बनने के कारण दुकान टूट गई, तो कोरोना काल में मैंने एक टोटो (ई-रिक्शा) खरीदा. मैं दिनभर टोटो चलाता और शाम को जिम करता था. टोटो चलाने से शरीर बहुत टूटता था, जिससे प्रैक्टिस का मौका नहीं मिल पाता था."- झंडू कुमार, पैरा-पावरलिफ्टर
गेम के लिए बेचनी पड़ी थी टोटो: झंडू कुमार बताते हैं, 2023 में दिल्ली में गेम खेलने के लिए पैसों की तंगी के कारण मुझे अपना टोटो भी बेचना पड़ा. वहां कोई मेडल नहीं मिला, लेकिन मैंने हार नहीं मानी. मुझे इंडिया के नंबर वन कोच राजेंद्र सिंह रहेलू, जिम के संचालक गौतम भैया और कुंदन भैया का बहुत सपोर्ट मिला.

"2023 में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में चयन होने के बाद अब मेरा सारा खर्च सरकार उठाती है और मैं वर्तमान में गुजरात के गांधीनगर NCO में ट्रेनिंग ले रहा हूं."-झंडू कुमार,पैरा-पावरलिफ्टर
झंडू की इच्छाशक्ति ने किया प्रभावित- गौतम सिंह: झंडू की प्रतिभा को निखारने वाले जिम के संचालक व कोच गौतम सिंह ने बताया कि उनकी मुलाकात झंडू से 2019 में हुई थी. उन्होंने कहा, मैं उसे देखकर अचंभित रह गया था. वह लड़का दिनभर सब्जी बेचता और शाम को जिम में पसीना बहाता था. उसी के कहने पर मैंने हरनौत में जिम खोला.

"जब मैं पहली बार उसे सासाराम में गेम खिलाने ले गया, तो उसका नाम 'झंडू' सुनकर लोग हंसने लगे. लेकिन जब उसने अपना शानदार परफॉर्मेंस दिया, तो सबने खड़े होकर तालियां बजाईं. आज वह वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-3 में है. मुझे उस पर बहुत गर्व है, उसने मेरी और खुद की उम्मीदों से कहीं आगे बढ़कर दिखाया है."- गौतम सिंह, जिम संचालक
पदकों का सफर: झंडू कुमार की खेल उपलब्धियों का सफर बेहद स्वर्णिम रहा है. 72 किलोग्राम भार वर्ग में खेलने वाले झंडू ने साल 2022 में कोलकाता में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपने पदकों का खाता खोला था.

इसके बाद साल 2024 में उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित खेलो इंडिया में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया और उसी वर्ष नोएडा/दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया.

1994 का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा: साल 2025 उनके लिए और भी बेहतरीन साबित हुआ, जहां उन्होंने 206 किलो वजन उठाकर 1994 का पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए नेशनल चैंपियनशिप और खेलो इंडिया दोनों में स्वर्ण पदक जीते.
एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पर कब्जा: इसी वर्ष उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमाते हुए चीन में आयोजित वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता और इजिप्ट में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 198 किलो वजन उठाकर विश्व स्तर पर छठा स्थान हासिल किया. इसके अलावा, 2026 की एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया.
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयनित: लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर अब वे 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयनित हो चुके हैं और भारत के लिए तिरंगा लहराने को पूरी तरह तैयार हैं. झंडू के माता-पिता आज भी हरनौत डाकबंगला के पास बिस्कोमान की जमीन पर एक झोपड़ीनुमा टीन शेड में किराए पर रहते हैं.

"मैं आलू बेचकर किसी तरह दाल-रोटी का गुजारा करता हूं. झंडू बचपन से ही पोलियो का शिकार है. वह पहले मेरी दुकान पर बैठता था और थोड़ा-बहुत आलू बेचकर जिम जाता था. आज बेटा देश के लिए खेल रहा है, यह बहुत खुशी की बात है, लेकिन हमें अब तक सरकार की तरफ से कोई लाभ या मदद नहीं मिली है."- रामानंद पासवान, झंडू के पिता

"मेरा बेटा गुजरात में खेलने गया है. हमें बहुत खुशी है. हमारे पास अपना घर नहीं है, हम किराए पर रहते हैं. हम सरकार से बस यही मांग करते हैं कि वह हमारे बेटे को एक नौकरी और रहने के लिए घर दें, ताकि हमारा जीवन सुधर सके."- कमला देवी, झंडू की मां
जज्बे को सलाम: आज झंडू कुमार को बिहार ही नहीं बल्कि पूरा देश सलाम कर रहा है. सपनों की राह पर आने वाले बड़े-बड़े रोड़ों को उन्होंने दरकिनार कर सफलता की नई इबारत लिखी है, जो जिंदगी से मायूस हो चुके लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत से कम नहीं है.

बता दें कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई 2026 से शुरू होकर 2 अगस्त 2026 तक चलेंगे. इन खेलों का आयोजन स्कॉटलैंड के सबसे बड़े शहर ग्लासगो में किया जा रहा है.
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