'हमने बुद्ध दिया युद्ध नहीं..' नालंदा साहित्य महोत्सव में भारत के साथ विदेशों से पहुंचे साहित्यकार
नालंदा साहित्य महोत्सव का उद्घाटन रविवार को आरिफ मोहम्मद खान और शशि थरूर ने किया. इस दौरान कई देश के साहित्यकार मौजूद रहे.

Published : December 21, 2025 at 8:18 PM IST
नालंदा: राजगीर के अंतर्राष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर में नालंदा साहित्य महोत्सव का उद्घाटन हुआ. यह महोत्सव दिसंबर तक चलेगा. कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे ऐतिहासिक बताया.
'बुद्ध दिया है. युद्ध नहीं': बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा इस कार्यक्रम के आयोजन से हमें काफी खुशी मिली. इस प्रकार के आयोजन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत ने बुद्ध दिया है. युद्ध नहीं. इस दौरान स्वामी विवेकानंद के संदेश को भी साहित्यकारों के सामने रखा.
"हमने बुद्ध दिया है, हमने युद्ध नहीं दिया. हम कुछ हद तक जिम्मेदार हैं. स्वामी विवेकानंद कहते थे कि भारत के पास एक संदेश है दुनिया को देने के लिए. उन्होंने कहा था कि किसी इंसान की पहचान उसकी जाति और रंग से नहीं होनी चाहिए. भारत ने कभी इसका दावा नहीं किया." -आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, बिहार
वैश्विक विमर्श का केंद्र बनेगी नालंदा की धरती: शशि थरूर ने कहा कि साहित्य की चर्चा यूनिवर्सिटी के अंदर भी होनी चाहिए. प्राचीन ज्ञान की धरती नालंदा एक बार फिर वैश्विक विमर्श का केंद्र बनने जा रही है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय केवल साहित्य दर्शन नहीं, बल्कि विज्ञान और चिकित्सा की भी जननी थी.

"हमारा उद्देश्य साहित्य के जरिए एडिटरशिप और ट्रांसलेशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना है ताकि युवा इससे जुड़ सकें. यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि राजगीर महोत्सव की शुरुआत भी मैंने ही की थी और आज इस ऐतिहासिक साहित्यिक महाकुंभ का हिस्सा बना हूं." -शशि थरूर, कांग्रेस नेता
64 कलाओं का उत्सव: शशि थरूर ने कहा कि यहां साहित्य के साथ-साथ 64 कलाओं का उत्सव होगा. वैसे ही यह उत्सव उस पंच विद्या (हेतु, शब्द, शिल्प, चिकित्सा और अध्यात्म) की अवधारणा को पुनर्जीवित करेगा.

'साहित्य समाज का दर्पण': दूरदर्शी सांस्कृतिक दार्शनिक सोनल मानसिंह भी पहुंची. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में कला, संगीत और साहित्य के प्रति भाव, प्रेम नहीं है, वह साक्षात पशु है. उन्होंने कहा कि साहित्य को समाज का दर्पण कहा गया है. समाज में जो भी गतिविधियां होती है, सबका असर और चित्र साहित्य में ही मिलता है. एक समय था जब नालंदा, विक्रमशिला, तक्षशिला की ज्ञान परंपरा इतनी अद्भुत थी. एक बार फिर से इसे नवचेतना मिल रही है..
नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से यह छोटा-सा अंश, जहाँ पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह जी ने भर्तृहरि का यह कालजयी श्लोक उद्धृत किया, “साहित्यसंगीतकलाविहीनः साक्षात् पशुः पुच्छविषाणहीनः।” 🪷 #NalandaLiteratureFestival #NLF2025 pic.twitter.com/oeJKlnS9Qf
— Sonal Mansingh (@sonal_mansingh) December 21, 2025
क्या होगा खास?: महोत्सव में मशहूर पटकथा लेखर अदूर गोपालकृष्णन, फ्रांस और स्वीडन के लेखक, टेक महिंद्रा के प्रतिनिधि शामिल हुए. अगले पांच दिनों तक पैनल चर्चा, पुस्तक विमोचन, योग सत्र और पूर्वोत्तर भारत व बिहार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होगी.
कार्यक्रम का उद्देश्य: कार्यक्रम में कई देशों के साहित्यकार और विद्वान शामिल हुए. यह फेस्टिवल साहित्य एवं संस्कृति का एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसका उद्देश्य साहित्य, भाषा, संस्कृति और ज्ञान के विविध रूपों को प्रमुखता देना है. यह आयोजन लेगेसी, लैंग्वेज और लिटरेचर जैसे मूल विषयों पर केंद्रित है.

