ETV Bharat / bharat

भारत चीन सीमा से सटी नेलांग घाटी में भूमि कब्जा मामले में सुनवाई, केंद्र-राज्य सरकार से जवाब तलब

उत्तरकाशी के सीमांत नेलांग घाटी में बिना अधिग्रहण प्रक्रिया के भूमि पर कब्जा मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Uttarakhand High Court
उत्तराखंड हाईकोर्ट (फोटो- ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 19, 2026 at 8:19 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

नैनीताल: उत्तरकाशी जिले में चीन सीमा से सटी नेलांग घाटी में कथित रूप से ग्रामीणों की भूमि को बिना अधिग्रहण प्रक्रिया के सेना की ओर से अपनाए जाने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय रक्षा और गृह मंत्रालय के साथ ही उत्तराखंड के गृह और सचिव वन समेत जनजातीय कल्याण निदेशालय से जवाब तलब किया है.

दरअसल, उत्तरकाशी की जाड़ भोटिया जनकल्याण समिति की ओर से इस मामले को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस प्रकरण पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना ने नेलांग घाटी को अपने नियंत्रण ले लिया था. साथ ही यहां प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था.

इतना ही नहीं साल 1990 में भारत सरकार ने नेलांग गांव की 278 नाली भूमिधरी और 18 नाली सरकारी भूमि के हस्तांतरण की मंजूरी दे दी, लेकिन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई. समिति का आरोप है कि इसके बाद सेना ने गांव की भूमिधरी और सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया. इसके बदले में ग्रामीणों को मुआवजा भी नहीं दिया गया.

इस मामले में साल 2014 से 2019 तक भारत सरकार के साथ ही राज्य सरकार को कई प्रत्यावेदन दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. साल 2019 में ग्रामीणों की ओर से जाड़ भोटिया जनकल्याण समिति का गठन किया गया. इसके बाद उत्तरकाशी के जिलाधिकारी की ओर से साल 2020 में ग्रामीणों के पुनर्वास से संबंधित मुद्दे को सुलझाने के लिए 13 सदस्यीय समिति का गठन किया गया. जिसमें सेना और सशस्त्र बलों को भी शामिल किया गया.

समिति की संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि घाटी के नेलांग गांव की 6.173 हेक्टेयर भूमिधरी जमीन पर सेना का कब्जा है. उसमें भवन और हेलीपैड बने हैं. साथ ही जादूंग गांव की 2.807 हेक्टेयर भूमि पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सेना और वन विभाग काबिज है.

जादूंग गांव को बाइव्रेंट विलेज के रूप में किया जा रहा विकसित: ये भी कहा गया कि साल 2024 में सरकार की ओर से कहा गया कि जादूंग गांव को सरकार बाइव्रेंट विलेज के रूप में विकसित करेगी और यहां चरणबद्ध तरीके से 23 होमस्टे विकसित किए जाएंगे. याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि उन्हें भी बाइव्रेंट विलेज योजना का लाभ मिले और उनका विकास के साथ पुनर्वास किया जाए.

ये भी पढ़ें-