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1 बगीचा.. 1 पेड़.. कई देशों के आम.. टाटा ट्रस्ट के पूर्व एक्सपर्ट ने बिहार के रक्सा गांव में कर दिया कमाल

यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट की नौकरी छोड़ खेती करने वाले विकास की आज मैंगो मैन के रूप में पहचान है. मुजफ्फरपुर से विवेक की रिपोर्ट..

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मुजफ्फरपुर के विकास कुमार यादव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 19, 2026 at 11:37 AM IST

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मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मरवन प्रखंड स्थित रक्सा गांव में एक ऐसा आम का बगीचा है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं. यहां के किसान विकास कुमार यादव, जिन्हें लोग अब 'मैंगो मैन' के नाम से जानते हैं, अपने बगीचे में 92 प्रकार के आम उगा रहे हैं.

मैंगो मैन विकास के बगीचे में दुर्लभ आम: उनके बगीचे में जापान, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, पाकिस्तान और अन्य देशों की कई दुर्लभ किस्मों के आम मौजूद हैं. सबसे खास बात यह है कि उनके बगीचे में एक ही पौधे पर तीन अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं, जो इस बगीचे को और भी अनोखा बनाता है.

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थाईलैंड का चॉक अनन आम (ETV Bharat)

खेती करने का था जुनून- विकास कुमार यादव: विकास कुमार यादव बताते हैं, "खेती उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जुनून है. वे किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-किसानी का माहौल देखा है. उनके पिता और दादा भी खेती किया करते थे. विकास कहते हैं, 'खेती हमारे खून में है. बचपन में जब पढ़ाई करता था, तब भी टमाटर और मिर्च के पौधे लगाता था. पौधों को बढ़ते देखना मुझे हमेशा अच्छा लगता था."

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट के पूर्व कृषि विशेषज्ञ: पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास ने कृषि क्षेत्र में प्रोफेशनल तरीके से काम किया. उन्होंने करीब 5 वर्षों तक अलग-अलग संस्थाओं और कंपनियों में नौकरी की. इस दौरान उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में कृषि विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया. वे यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के साथ भी जुड़े रहे, जहां उनकी भूमिका एग्रीकल्चर डेवलपमेंट से संबंधित थी.

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आम्रपाली आम (ETV Bharat)

क्यों लिया कृषि विशेषज्ञ बनने का फैसला: नौकरी के दौरान उन्होंने महसूस किया कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या सही मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण पौधों की उपलब्धता है. कई किसानों को अच्छा पौधा नहीं मिल पाता था, जिससे उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. यही सोच उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

"मैंने देखा कि किसान मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन उन्हें सही पौधा और सही जानकारी नहीं मिलती. तभी मन में विचार आया कि क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे किसानों को बेहतर पौधे उपलब्ध कराए जा सकें."- विकास कुमार यादव, मैंगो मैन

देश-विदेश के आमों से गुलजार है बगीचा: इस सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2014 में आम की अलग-अलग किस्मों पर काम शुरू किया. शुरुआत में वे अपने बगीचे में देश-विदेश से अच्छे पौधे लाए और उनका परीक्षण किया. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी. हालांकि उस समय वे नौकरी भी कर रहे थे और परिवार के सदस्य बगीचे की देखभाल करते थे.

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केन्सिंग्टन प्राइड आम (ETV Bharat)

8.5 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ी : वर्ष 2023 में उन्होंने बड़ा फैसला लिया. करीब 8.5 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर वे पूरी तरह खेती में उतर गए. उनके इस फैसले ने परिवार और परिचितों को चौंकाया, लेकिन विकास अपने निर्णय को लेकर स्पष्ट थे. वे कहते हैं, अच्छी नौकरी थी, अच्छा पैकेज था, लेकिन मन खेती में ही लगता था. इसलिए नौकरी छोड़कर घर लौट आया और पूरी तरह खेती शुरू कर दी.

92 तरह के आम: आज विकास के बगीचे में 92 तरह के आम हैं. इनमें कई विदेशी और बेहद दुर्लभ किस्में शामिल हैं. उनके बगीचे में जापानी मियाजाकी, केन्सिंग्टन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, पिको, अल्फांसो, कैरी , फेयरचाइल्ड, मल्लिका, आम्रपाली, नाओमी, ऑस्टिन आम की प्रजातियां हैं.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

इसके साथ ही सेंसेशन , डंकेन, किस , येलो डायमंड , गोल्डन क्वीन , रेड एम्परर , सनराइज़ , फ्लोरिगॉन , रोसा , साब्रे , नेलम , पीच मैंगो , ब्लैक मैंगो, किंग मैंगो, गोल्ड नगेट, प्राइड ऑफ बर्मा और चॉक अनन जैसी कई वैरायटी मौजूद हैं. इसके अलावा बिहार और भारत की भी अनेक प्रसिद्ध किस्में उनके बगीचे की शोभा बढ़ा रही हैं.

1 पेड़.. तीन स्वाद: इस बगीचे की सबसे बड़ी खासियत ग्राफ्टिंग तकनीक है. विकास ने कई पौधों पर प्रयोग किए हैं. उनका दावा है कि उनके पास एक ऐसा पेड़ है, जिसमें लगने वाले आम में तीन अलग-अलग स्वाद महसूस होते हैं—हल्का खट्टा, हल्का मीठा और एक अलग फ्लेवर. यह अनोखा प्रयोग लोगों को खासा आकर्षित करता है.

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एक पेड़ से तीन आम का स्वाद (ETV Bharat)

नेपाल तक जाते हैं विकास के पौधे: विकास केवल आम की खेती ही नहीं कर रहे, बल्कि एक सफल नर्सरी व्यवसाय भी चला रहे हैं. उनके यहां से सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों के किसान पौधे खरीदने आते हैं. यहां तक कि पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग उनके बगीचे तक पहुंचते हैं और पौधों की खरीदारी करते हैं.

"हमारे यहां से बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पौधे भेजे जाते हैं. नेपाल से भी लोग पौधे खरीदने आते हैं. किसानों का भरोसा ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है."- विकास कुमार यादव, मैंगो मैन

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विकास कुमार यादव का बगीचा (ETV Bharat)

हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी: आर्थिक रूप से भी विकास की यह पहल सफल साबित हो रही है. वे बताते हैं कि मजदूरी और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. आम के सीजन में यह कमाई और बढ़ जाती है.

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ऑस्ट्रेलिया का आम (ETV Bharat)

कृषि नवाचार का मॉडल बना नर्सरी: रक्सा गांव का यह बगीचा अब सिर्फ खेती का केंद्र नहीं, बल्कि कृषि नवाचार का मॉडल बन चुका है. बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंचकर नई तकनीक, ग्राफ्टिंग और दुर्लभ किस्मों की जानकारी लेते हैं. विकास कुमार यादव की कहानी यह साबित करती है कि यदि जुनून, मेहनत और सही सोच हो तो खेती भी सम्मान और अच्छी आय का मजबूत जरिया बन सकती है.

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