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शादी, संघर्ष और सफलता..बिहार की 'हनी गर्ल' की कहानी जो NCERT की किताबों तक पहुंची

बिहार की हनी गर्ल की सफलता की कहानी अब NCERT में पढ़ी जा रही है. जानिए शादी, संघर्ष और सफलता के राज.

Muzaffarpur Honey Girl Anita Kushwaha
अनीता कुशवाहा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 7, 2026 at 2:37 PM IST

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मुजफ्फरपुर: बचपन में हमेशा शहद खाने की जिद करने वाली आज अनीता की पहचान 'हनी गर्ल' के रूप में हो रही है. ग्रमीण क्षेत्र से आने वाली अनीता आज विदेशों तक चर्चा में है. यह पहचान ऐसे ही नहीं मिली, इसके लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा. आइये जानते हैं हनी गर्ल के संघर्ष की कहानी.

साधारण परिवार में जन्म: मुजफ्फरपुर के बोचहा प्रखंड के पटियासा गांव में साधारण परिवार में अनीता कुशवाहा का जन्म हुआ. बिहार में अभी भी ज्यादातर लड़कियां उच्च शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाती हैं. परिवार के लोग जहां शादी कर देते हैं, वहां जाकर ससुराल में परिवार संभालने का काम करती है, लेकिन अनीता की किस्मत में हनी गर्ल बनना लिखा था.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

दो बॉक्स से शुरुआत: अपने संघर्ष के बारे में अनीता कहती हैं कि शुरू से प्रकृति से लगाव रहा है. गांव में अपना लीची का बगान है, जहां कुछ लोग मधुमक्खी पालन के लिए आते थे. उनसे मां शहद लेती थीं. 'मुझे शहद खाना बचपन से काफी पसंद है. मना करने के बाद भी चोरी-छिपे शहद का मजा लेती थी' बगान में मधुमक्खी पालक को देखकर मैंने भी मधुमक्खी पालन की सोची. उसी से दो बॉक्स लेकर शुरुआत की.

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बिहार से हरियाणा तक ट्रेनिंग: एक 13 साल की साधारण लड़की और बिना अनुभव यह आसान नहीं था. इसलिए एक बेहतर मधुमक्खी पालक बनने के लिए अनीता ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से ट्रेनिंग ली. इसके अलावा चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय हरियाणा से मधुमक्खी पालन के बारे में टेकनिकल प्रशिक्षण लिया.

500 बॉक्स में मधुमक्खी पालन: ट्रेनिंग लेने के बाद अनीता मधुमक्खी पालन करने लगी. मधुमक्खी के बॉक्स की संख्या बढ़ती गयी. आज अनीता के पास करीब 500 बॉक्स हैं, जिसमें मधुमक्खी अपना शदह निकालती है. इससे अनीता की किसम्त चमक गयी है.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

"बचपन से शहद खाना पसंद है. घर के बगल में मधुमक्खी पालक को देखने के बाद लगा कि मैं भी कर सकती हूं. उनसे दे 2 बॉक्स लिए थे. 2 से 10, 10 से 20 और आज कुल 500 बॉक्स मौजूद हैं, जिसमें मधुमक्खी पालन कर शहद तैयार किया जाता है." -अनीता, हनी कंपनी की ऑनर

अनीता हनी गर्ल के नाम से मशहूर है. इसको लेकर कहती हैं कि 'ये मेहनत का फल है. जब मैं शुरुआत में काम करती थी तो लोग कहते थे कि डर नहीं लगता है. मधुमक्खी अगर काट लिया तो. उस वक्त उसी शहद की कमाई से पढ़ाई लिखाई और परिवार का भरण-पोषण हुआ.'

Muzaffarpur Honey Girl Anita Kushwaha
हनी गर्ल अनीता कुशवाहा (ETV Bharat)

मजबूरी से जुनून तक: अनीता कहती हैं कि इसकी शुरुआत करना कोई शौक नहीं था. बल्कि मजबूरी थी. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो पढ़ाई जारी रखने के लिए पैसों की कमी नहीं हो, इसलिए मधुमक्खी पालन शुरू किया. मधुमक्खी पालन सहारा बना. धीरे-धीरे यह काम न सिर्फ आमदनी का जरिया बना, बल्कि जुनून में बदल गया.

'ऐसा लगा था सपना टूट जाएगा': अनीता कहती हैं कि एक वक्त लगा था कि यह जुनून कहीं खत्म ना हो जाए. साल 2013 में अनीता के माता-पिता ने सीतामढ़ी के नानपुर में शादी तय कर दी. शादी के बाद जब ससुराल वालों को पता चला कि अनीता मधुमक्खी पालन करती है तो कई सवाल उठे. ससुराल के लोगों ने कहा कि एक महिला होकर ये सब काम करेगी तो कैसे होगा?

बिहार की हनी गर्ल की सफलता की कहानी (ETV Bharat)

Anita's Honey ब्रांड को मिली पहचान: हालांकि पति संजय कुमार ने काफी सहयोग किया. इसके बाद ससुराल के लोग भी मान गए. संजय कुमार कहते हैं कि जब मुझे पता चला कि अनीता मधुमक्खी पालन करती हैं तो काफी खुशी हुई. घर के लोग भी मान गए. लोगों को लगता था कि एक महिला कैसे करेगी, लेकिन काम देखकर सभी को अच्छा लगा. इसी का नतीजा है कि आज अनीता शहद कंपनी की मालकिन बन गयी है. Anita's Honey ब्रांड मार्केट में अपनी पहचान बना ली है.

बिहार से दुबई तक बिजनेश: अनीता का दावा है कि शहद क्वालिटी में बेस्ट है. यह ऑर्गेनिक शहद है. इसमें किसी भी प्रकार की कोई मिलावट नहीं है. जो एक बार इसका स्वाद चख ले, उन्हें Anita's Honey ही चाहिए होता है. यह ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों जगह मौजूद है. मुजफ्फरपुर शहर के मिठनपुरा में स्टोर है. दुबई तक कुरियर की जाती है.

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अनीता कुशवाहा को सम्मानित करते विजय सिन्हा (ETV Bharat)

4 किस्म का शहद: अनीता फिलहाल मुख्य रूप से 4 किस्म का शहद तैयार करती हैं. इसमें तुलसी, जामुन, लीची और सरसो का शहद तैयार करती है. सहजन वेराइटी भी मौजूद है. हमारी शहद की अलग खासियत है. इसमें 80 प्रतिशत नेचुरल शुगर है. अलग से कोई मीठा नहीं मिलाया जाता है. फ्रुक्टोज और ग्लूकोज की मात्रा अच्छी है. 18 प्रतिशत पानी, 2 प्रतिशत खनिज, विटामिन, प्रोटीन है. बाजार में अनीता शहद की कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो है.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

कई अवार्ड मिले: अनीता ने मधुमक्खी पालन से कई उपलब्धि हासिल की. कई अवार्ड मिले. जिस साल अनीता की शादी हुई, उसी साल 2013 में स्वर्ण इंडिया की ओर से बिहार विकास रत्न अवार्ड दिया गया. इससे पहले 2012 एक प्रतिष्ठित अखबार ने कर्मयोगी सम्मान से सम्मानित किया.

यूनिसेफ ने बनायी डॉक्यूमेंट्री: सबसे पहली उपलब्धि यूनिसेफ की ओर से मिली थी. 2006 में यूनिसेफ की ओर से एक गर्ल स्टार का प्रोजेक्ट आया था, जिसमें अनीता को लेकर डॉक्यूमेंट्री बनायी गयी और सम्मानित किया गया. यूनिसेफ संस्था दुनिया भर के बच्चों के जीवन को बचाना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और बचपन से लेकर किशोरावस्था तक उनकी पूरी क्षमता का विकास करने काम काम करती है.

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रति संजय के साथ हनी गर्ल अनीता कुशवाहा (ETV Bharat)

NCRT की पुस्तक में बायोग्राफी: 2010 में बिहार कृषि विभाग से सम्मानित किया गया. इसके अलावे 'बेस्ट बीकीपर अवार्ड' सेंट्रल कृषि विश्वविद्यालय पूसा, बिहार दिया गया. 'बिहारी हो तो ऐसा अवार्ड' मिला. युवा आइकन के लिए नामांकित हो चुकी हैं. सबसे बड़ी उपलब्धि है कि अनीता की सफलता की कहानी स्कूलों में पढ़ाई जाती है. NCRT कक्षा 4 की पुस्तक में Anita And The Honey चैप्टर है.

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NCERT किताब में हनी गर्ल अनीता कुशवाहा की कहानी (ETV Bharat)

10 से 12 लाख का कारोबार: आज 'हनी गर्ल' अनिता कुशवाहा ने ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक कहानी. सालाना कारोबार 10 से 12 लाख रुपये के बीच पहुंच चुका है. गांव के कई लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं.

महिलाओं को दे रहीं ट्रेनिंग: कई लोग मधुमक्खी पालन भी सीखते हैं. कई महिलाओं को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दी है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें. अनीता बताती हैं कि मधुमक्खी पालन के दौरान कई बातों का ख्याल रखा जाता है. इससे शहद उत्पादन में फायदा मिलता है.

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हनी गर्ल अनीता कुशवाहा (ETV Bharat)

मधुमक्खी पालन कैसे करें?: मधुमक्खी पालन करने से पहले योजना तैयार करना जरूरी है. सबसे पहले कृषि विज्ञान केंद्र या अनुभवी से इसका प्रशिक्षण लेना चाहिए. इसके बाद जगह का चुनाव करें. ऐसी जगह चुने जहां, फूल, पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो. सीधी तेज धूप नहीं पड़नी चाहिए. यानि कोई आम या लीची का बगीचा हो तो बेहतर है.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

उपकरण और अन्य सामग्री: इसके अलावा उपकरण और अन्य सामग्री की जरूरत होती है. इसमें मधुमक्खी के छत्ते की आव्यशकता है. शुरुआत में 2-4 डिब्बों से मधुमक्खी पालन की शुरुआत कर सकते हैं. सुरक्षा के लिए दस्ताने, जालीदार टोपी, सूट, आदि जरूरी है. अन्य उपकरण में स्मोकर, जिसके माध्यम से धुआं लगाकर मधुमक्खी को भगाया जाता है ताकि छत्तों से शहद निकालने में परेशानी नहीं हो. शहद निकालने की मशीन भी होती है.

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी: मधुमक्खी पालन के दौरान खास बातों का ध्यान रखना होता है. सबसे पहले मधुमक्खी की कॉलोनी स्थापित की जाती है. इसके लिए मधुमक्खी नर और रानी को बॉक्स में रखा जाता है ताकि प्रजनन से मधुमक्खी की संख्या में बढ़ोतरी हो. नियमित भोजन, स्वास्थ्य का ध्यान रखना होता है. भोजन में सूरजमुखी, सरसों जैसी फसलें फायदेमंद है. इसके अलावे कीटनाशकों और बीमारियों से बचाएं.

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अनीता कुशवाहा को सम्मानित करती यूनिसेफ की अधिकारी (ETV Bharat)

मधुमक्खी के प्रकार: सबसे बड़ा सवाल है कि कौन सी मधुमक्खी बेहतर है. एपिस मेलिफेरा एक यूरोपीय मधुमक्खी है जो वाणिज्यिक पालन के लिए लोकप्रिय है. इसके अलावे भारतीय मधुमक्खी एपिस सेराना इंडिका, एपिस फ्लोरिया एक छोटी मधुमक्खी जो ज्यादातर जंगल में अपना निवास बनाती है. एपिस डोरसॅटा जो एक आक्रामक के रूप में जानी जाती है. इसका पालन कठिन है. टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस जो परागण के लिए महत्वपूर्ण, लेकिन कम शहद देती है.

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