आंध्र में 'मुर्गा प्रीमियर लीग': IPL मैच से भी ज्यादा धूमधाम के साथ तैयार किए जा रहे अखाड़े, पढ़िये-क्या है खास!
'कॉकफाइट प्रीमियर लीग' (KPL) यानी संक्रांति के दौरान होने वाली मुर्गों की लड़ाई के लिए खास इंतजाम किये जाते हैं.


Published : January 11, 2026 at 5:43 PM IST
अमरावती (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश में संक्रांति के अवसर पर मुर्गों की लड़ाई का आयोजन केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक बेहद रोमांचक परंपरा बन गया है. 'कॉकफाइट प्रीमियर लीग' (KPL) यानी संक्रांति के दौरान होने वाली मुर्गों की लड़ाई के लिए खास इंतजाम किये जाते हैं. तटीय जिलों में मुर्गों की लड़ाई के मैदान किसी आईपीएल मैच से भी ज्यादा धूमधाम के साथ तैयार किए जा रहे हैं.
मुर्गों की लड़ाई के मैदानों में भारी बढ़ोतरी
पिछले वर्षों की तुलना में इस संक्रांति (2026) पर मुर्गों की लड़ाई के मैदानों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. पिछले साल अविभाजित पश्चिम गोदावरी जिले में जहां 150-200 मैदान बनाए गए थे, वहीं इस साल 450 मैदान तैयार किए जा रहे हैं. भीमवरम से ताडेपल्लीगुडेम के रास्ते पर 14 किलोमीटर के दायरे में ही 18 से अधिक बड़े मैदान मौजूद हैं.
रियल एस्टेट लेआउट्स को इन अखाड़ों में बदला जा रहा है. 5 से 10 एकड़ के क्षेत्र में ये मैदान तैयार किए जा रहे हैं, जबकि 2 से 3 एकड़ में केवल पार्किंग की व्यवस्था की गई है. मुख्य सड़कों के पास के बगीचों और खाली प्लॉटों में ये अखाड़े सजाए जा रहे हैं.

चोटों से बचने के लिए सिंथेटिक अखाड़े
मुर्गों के पैरों में चोट लगने से बचाने के लिए अब सिंथेटिक अखाड़े बनाए जा रहे हैं. बड़े मैदानों में एक बार में 4-5 हजार लोगों के बैठने और मैच देखने की व्यवस्था की गई है. आयोजक विशेष टोकन जारी कर रहे हैं, केवल टोकन वाले लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति है. आयोजक खुद ही उन्हें भोजन और सॉफ्ट ड्रिंक्स उपलब्ध करा रहे हैं.
मैदान के बाहर मौजूद लोगों के लिए मैच देखने हेतु एलईडी (LED) स्क्रीन लगाई जा रही हैं. रात में भी लड़ाई जारी रखने के लिए फ्लडलाइट्स लगाई जा रही हैं और वीआईपी लोगों के लिए कारवां भी तैयार किए जा रहे हैं. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बाउंसरों को काम पर रखा जा रहा है.
होटल के कमरों का किराया: 50,000 रुपये
मुर्गों की लड़ाई देखने के लिए दोनों तेलुगु राज्यों (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) के साथ-साथ कर्नाटक के बल्लारी और कलबुर्गी और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं. इसके कारण उन शहरों में होटल के कमरों की भारी मांग हो गई है जहां ये मुकाबले होने वाले हैं. भीमवरम, एलुरु, ताडेपल्लीगुडेम और तनुकु जैसे इलाकों के सभी होटल, लॉज, फंक्शन हॉल और गेस्ट हाउस पहले ही बुक हो चुके हैं.
भीमवरम के ज्यादातर होटल कमरे एक साल पहले ही बुक कर लिए गए थे. यहां तीन दिनों के लिए एक कमरे का किराया 30,000 से 50,000 रुपये तक वसूला जा रहा है. यहां तक कि खाली घरों और मछली पालन के तालाबों के पास बने कमरों को भी किराए पर दिया जा रहा है. जहां होटल उपलब्ध नहीं हैं, वहां लोगों के रुकने के लिए विशेष टेंट लगाए जा रहे हैं.
करोड़ों रुपये के दांव लगने की उम्मीद
संक्रांति के तीन दिनों के दौरान, मुर्गों की लड़ाई में करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है. प्रत्येक अखाड़े में रोजाना 25 से 40 लड़ाइयां होती हैं. कुछ बड़े अखाड़ों में, हर एक लड़ाई पर 5 लाख से 50 लाख रुपये तक का दांव लगाया जाता है. इसके अलावा, अलग से लगाए जाने वाले दांव भी लाखों रुपये तक पहुंच जाते हैं. प्रतिभागियों को पहले ही सूचित कर दिया जाता है कि केवल वही लोग आएं जो इस स्तर का दांव लगाने के लिए तैयार हों.
नकद पैसों की गिनती के लिए विशेष मशीनें और कर्मचारी तैनात किए गए हैं. इन अखाड़ों में खास तौर पर पाले गए मुर्गे लाए जाते हैं, जिनकी कीमत 2 लाख से 4 लाख रुपये के बीच होती है. इस बार मुर्गों की लड़ाई में पेरू और म्यांमार से आयात किए गए मुर्गों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
श्रीलंका से जुआ विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा
मुर्गों की लड़ाई के इन अखाड़ों में 'गुंडाटा' और 'कोठाटा' जैसे जुए के खेलों में भी करोड़ों रुपये का दांव लगाया जाता है. पश्चिम गोदावरी जिले में ऐसी चर्चाएं हैं कि इस बार इन खेलों के संचालन के लिए श्रीलंका से जुआ विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है. बताया गया है कि पश्चिम गोदावरी जिले के एक निर्वाचन क्षेत्र के पांच गांवों में होने वाले खेलों का ठेका, जो पिछले साल 70 लाख रुपये में दिया गया था, इस बार 1.50 करोड़ रुपये में बिका है.
पारिवारिक मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्था
पश्चिम गोदावरी जिले के यलमंचिली जैसे स्थानों पर मुर्गों की लड़ाई को एक 'फैमिली पैकेज' के रूप में आयोजित किया जा रहा है. एक तरफ जहां मुर्गों की लड़ाई के लिए बड़े अखाड़े तैयार किए जा रहे हैं, वहीं उसी स्थान पर संक्रांति समारोह के बहाने प्रदर्शनियां, महिलाओं के लिए रंगोली प्रतियोगिताएं और गोदावरी जिलों के पारंपरिक व्यंजनों वाले 'फूड कोर्ट' भी लगाए जा रहे हैं. रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को चांदी और सोने के पुरस्कार दिए जा रहे हैं.
एनटीआर जिले के तातगुंटला में, विशेष रूप से मुर्गों की लड़ाई के लिए एक आउटडोर स्टेडियम बनाया गया है. इसमें बीच में एक अखाड़ा है और चारों ओर सीढ़ीदार गैलरी (दर्शकों के बैठने की जगह) बनाई गई है. इस आयोजन का नाम 'काकतीय प्रीमियर लीग' (KPL) रखा गया है.
आयोजकों का दावा है कि वे मुर्गों की लड़ाई को जुए के तौर पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से मनोरंजन के लिए आयोजित कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे बिना मुर्गों के पैरों में चाकू बांधे लड़ाइयां करवाएंगे. उन्होंने बताया कि वे परिवारों के आने और आनंद लेने के लिए मुर्गों की लड़ाई, भेड़ों की लड़ाई और अन्य मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं.
इसे भी पढ़ेंः

