बेटे को मरा मान बैठा था परिवार, वो 2 साल बाद जिंदा लौटा, पाकिस्तान बॉर्डर पर मिला था मुंगेर का धर्मेन्द्र
दो साल से जिस बेटे के जिंदा होने की आस छोड़ चुका था परिवार, मुंगेर पुलिस ने उसे कश्मीर से लाकर मां से मिलाया. पढ़ें

Published : May 21, 2026 at 10:14 AM IST
मुंगेर: बिहार के मुंगेर से एक मां के प्यार, भरोसे और इंतजार से जुड़ी बेहद भावनात्मक खबर सामने आई है. वो कहते हैं न कि मां की दुआ और उम्मीद कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती. जिले के वासुदेवपुर थाना क्षेत्र के चंडिका स्थान निवासी एक बेबस परिवार के लिए यह बात तब सच साबित हुई, जब दो वर्षों से लापता उनका लाडला बेटा अचानक सकुशल वापस अपने घर लौट आया.
पाकिस्तान सीमा पर मिला: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान सीमा के समीप संदिग्ध और बेसुध परिस्थिति में मिले युवक को मुंगेर पुलिस और जिला प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण वापस लाया गया. बेटे को इतने दिनों बाद अपने सामने जिंदा देखकर बूढ़ी मां की आंखें छलक उठीं और पूरे गांव में आंसुओं के बीच खुशी का माहौल बन गया.
अचानक खो गया था बेटा: मिली जानकारी के अनुसार चंडिका स्थान निवासी धर्मेंद्र कुमार करीब दो वर्ष पहले अचानक अपने घर से कहीं लापता हो गया था. असहाय परिवार वालों ने अपने कलेजे के टुकड़े को हर गली, हर चौराहे पर तलाशा. लेकिन धर्मेंद्र का कोई सुराग नहीं मिल पाया. परिवार ने बताया था ध्रमेंद्र 19 अगस्त 2024 को घर से 50 रुपये लेकर निकला था और फिर वापस नहीं लौटा.
मां की सुलगती आस: धीरे-धीरे लंबा समय बीतता गया और हर बीतते दिन के साथ परिवार की उम्मीदें भी पूरी तरह दम तोड़ने लगीं. बदहवास मां मुन्नी देवी हर दिन दरवाजे पर टकटकी लगाए अपने बेटे के लौटने की आस में रोती रहती थीं. इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान सीमा के पास बेहद संदिग्ध हालत में एक युवक के मिलने की सूचना स्थानीय पुलिस को मिली.

सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान: वह बेहद संवेदनशील सीमा क्षेत्र था, इसलिए देश की सुरक्षा एजेंसियां भी तुरंत सतर्क हो गईं. युवक को तुरंत हिरासत में लेकर लालपोरा थाना पहुंचाया गया, जहां उससे बेहद प्यार और गहनता से पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान उसने टूटी-फूटी आवाज में अपना नाम धर्मेंद्र कुमार और खुद को बिहार के मुंगेर जिले का निवासी बताया.
प्रशासन का मानवीय चेहरा: इस संवेदनशील मामले की सूचना तत्काल जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा मुंगेर जिला प्रशासन को दी गई. सूचना मिलते ही मुंगेर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने एक मां के दर्द को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की. युवक की पहचान सुनिश्चित करने और उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए तुरंत तीन सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया.

कश्मीर रवाना हुई टीम: इस रेस्क्यू टीम में असरगंज के एलईओ कुमार अमन, वासुदेवपुर थाना के एसआई सुनील कुमार और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार राणा को शामिल किया गया. डीएम और एसपी के निर्देश पर यह टीम 15 मई को मुंगेर से दूर बर्फीले जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुई.
कानूनी अड़चनों के बाद राहत: वहां कुपवाड़ा प्रशासन और स्थानीय पुलिस के मानवीय सहयोग से युवक की पहचान की पूरी तरह पुष्टि की गई. सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल जांच पूरी करने के बाद टीम ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और 19 मई की रात उसे लेकर मुंगेर पहुंची.
फूट-फूटकर रोई मां: बुधवार रात मेडिकल जांच के बाद जब धर्मेंद्र कुमार को उसके परिजनों के हवाले किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं. बेटे को देखते ही मां मुन्नी देवी ने रोते हुए उसे सीने से लगा लिया और फूट-फूटकर रोई.

"हम लोग दो साल से बहुत परेशान थे, हर जगह खोजे लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. लगने लगा था कि मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं है. मुंगेर पुलिस और जिला प्रशासन की वजह से आज मेरा बेटा वापस घर आ गया। इसके लिए हम जीवनभर आभारी रहेंगे." - मुन्नी देवी. युवक की मां
भाई के भी छलक पड़े आंसू: धर्मेंद्र के भाई उपेंद्र सिंह ने भी रुंधे गले से बताया कि परिवार ने भाई को ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किया था, लेकिन हर तरफ से सिर्फ निराशा ही हाथ लगी थी. हम लोगों ने काफी खोजबीन की थी.

"जब हर उम्मीद टूट गई तब अचानक प्रशासन से सूचना मिली कि भाई जम्मू-कश्मीर में मिला है. पहले तो कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ. प्रशासन जिस तरह मेहनत कर मेरे भाई को सुरक्षित वापस लाया वह सराहनीय है." - उपेंद्र सिंह, युवक के भाई
पिता के आंगन में बहार: धर्मेंद्र के लाचार पिता उपेंद्र सहनी भी अपने बेटे की वापसी से बेहद भावुक और खुश नजर आए. उन्होंने आंखों में आंसू लिए कहा कि हम लोग भीतर से पूरी तरह टूट चुके थे. अब बेटा वापस आ गया है तो ऐसा लग रहा है जैसे उजड़े हुए घर में फिर से खुशियां लौट आई हों. हम जिला प्रशासन और पुलिस के बहुत आभारी हैं.

मानसिक रूप से था कमजोर: रोते हुए परिजनों ने बताया कि धर्मेंद्र मानसिक रूप से काफी कमजोर है. आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक बीमारी के कारण वह रास्ता भटकते-भटकते अनजाने में इतनी दूर भारत-पाकिस्तान सीमा पर जम्मू-कश्मीर पहुंच गया. फिलहाल उसकी हालत सामान्य है. पूरा परिवार उसकी देखभाल में जुट गया है.
गांव वाले बोले 'चमत्कार': धर्मेंद्र की इस अविश्वसनीय और सुरक्षित घर वापसी के बाद पूरे इलाके में इस घटना की चर्चा है. गांव के लोग इसे किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहे. स्थानीय लोगों ने भी मुंगेर पुलिस, जिला प्रशासन और जम्मू-कश्मीर पुलिस की इस संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्रवाई की दिल से सराहना की.
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