भारत की पहली कार्मेलाइट नन मदर एलिसवा को 'ब्लेस्ड' घोषित किया गया
मदर एलिसवा ने कूनामावु में महिलाओं के लिए थर्ड ऑर्डर ऑफ डिस्काल्ड कार्मेलाइट्स (TOCD) की स्थापना की थी.

Published : November 9, 2025 at 12:55 PM IST
तिरुवनंतपुरम: भारत की पहली कार्मेलाइट नन मदर एलिस्वा को 'Blessed' (ब्लेस्ड) घोषित किया गया है. यह घोषणा मलेशिया के पेनांग डायोसीज के बिशप कार्डिनल डॉ सेबेस्टियन फ्रांसिस ने की. यह समारोह एर्नाकुलम के वल्लारपदम बेसिलिका में आयोजित किया गया.
पेनांग डायोसीज के बिशप कार्डिनल सेबेस्टियन फ्रांसिस ने कहा कि मदर एलिस्वा की पवित्र, साहसी और प्रेम से भरा जीवन अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा. इसके साथ ही वेरापोली आर्चडायोसीज के आर्चबिशप डॉ जोसेफ कलाथिपरम्बिल ने आदरणीय मदर एलिस्वा को 'ब्लेस्ड' घोषित करने का अनुरोध किया.
ब्लेस्ड मदर एलिस्वा की प्रतिमा का अनावरण
जैसे ही कार्डिनल सेबेस्टियन फ्रांसिस ने संत घोषित किए जाने की घोषणा की, तो चर्च की घंटियां बज उठीं. भारत में अपोस्टोलिक नन्सियो, आर्कबिशप डॉ लियोपोल्डो गिरेली ने एक संदेश दिया. कार्डिनल डॉ. ओसवाल्ड ग्रेसियस ने ब्लेस्ड मदर एलिस्वा की प्रतिमा का अनावरण किया और एल्टर (ऊंचा टेबल जो किसी भी धार्मिक समारोह का केंद्र होता है) पर स्थापित किया.
पवित्र मिस्सा के बाद CBCI के अध्यक्ष आर्कबिशप मार एंड्रयूज थजाथ ने एलिस्वाम्मा की नोवेना का विमोचन किया. स्मारिका का विमोचन KRLCBC के अध्यक्ष आर्कबिशप डॉ वर्गीस चक्कलक्कल ने किया. उद्घोषणा समारोह में भारत और विदेश के कई कार्डिनल, आर्कबिशप, बिशप और पुरोहित शामिल हुए.
TOCD की स्थापना की
मदर के निधन के 112 वर्ष बाद पोप लियो की स्वीकृति से उन्हें 'ब्लेस्ड' का दर्जा दिया गया. केरल चर्च के इतिहास में स्वर्णिम गौरव लाने वाली मदर एलिसवा ने 13 फरवरी, 1866 को कूनामावु में महिलाओं के लिए थर्ड ऑर्डर ऑफ डिस्काल्ड कार्मेलाइट्स (TOCD) की स्थापना की.
उन्होंने केरल में लड़कियों के लिए पहला स्कूल, एक बोर्डिंग हाउस और एक अनाथालय स्थापित किया. चौबीस साल बाद 17 सितंबर, 1890 को TOCD धार्मिक मण्डली को इस संस्कार के आधार पर विभाजित कर दिया गया और दो अलग-अलग मण्डलियां बनाई गईं. पहली कॉन्ग्रिगेशन ऑफ टेरेशियन कार्मेलाइट्स (CTC) और दूसरी कॉन्ग्रिगेशन ऑफ द मदर ऑफ कार्मेल (CMC). मदर एलिसवा ने केरल में महिलाओं के लिए पहला समर्पित स्कूल स्थापित किया और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया.
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